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भूख से पीड़ित परिवार का मामलाः पड़ोसी बोले, गुड्डी को था किडनी निकाले जाने का डर...इसलिए नहीं गई अस्पताल
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आगरा रोड स्थित मंदिर का नगला निवासी गुड्डी देवी व उनके बच्चों की हालत भूख की वजह से दिनोंदिन बिगड़ती जा रही थी। उनकी हालत देखकर पड़ोसियों ने 27 मई को एंबुलेंस को बुलवा लिया था, लेकिन गुड्डी किडनी निकाले जाने की डर से अस्पताल जाने को तैयार नहीं हुई। पड़ोसियों से बातचीत में यह बात निकलकर सामने आई है।
गुड्डी देवी के घर में तीन महीने से अनाज नहीं था। 15 दिनों से परिवार को भरपेट भोजन नहीं मिल पाया था, जिससे गुड्डी देवी, बेटा अजय (20), विजय (15) टीटू (10) सुंदर (5) व बेटी अनुराधा (13) की तबियत बिगड़ती जा रही थी। हालांकि, पड़ोसियों ने खाने-पीने व आर्थिक मदद की, जो नाकाफी थी। 15 जून को हालत बिगड़ने पर गुड्डी व उनके बच्चों को दामाद कन्हैयालाल ने मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां उनका उपचार चल रहा है। हैंड्स फॉर हेल्प संस्था भी गुड्डी देवी व परिवार की मदद कर रही है।
पड़ोसियों के बोल
गुड्डी देवी व उनके परिवार की मदद पड़ोसियों ने अपनी हैसियत के अनुसार की। किसी ने रोटी दी तो किसी ने रुपये से मदद की।
- उर्मिला, पड़ोसी
-
जब गुड्डी व बच्चों की तबियत खराब थी, तब पड़ोसियों ने एंबुलेंस बुलाई थी, लेकिन वह किडनी निकाले जाने की डर से अस्पताल जाने के लिए तैयार नहीं हुई।
- कुसुम देवी, पड़ोसी
गुड्डी देवी के घर में राशन की किल्लत थी। पड़ोसियों ने जो उनसे बन सकता था, उतनी मदद की। गांव में ज्यादातर लोग मजदूर तबके से हैं।
-सावित्री देवी, पड़ोसी
गुड्डी देवी की हरसंभव मदद की जाएगी। जितनी सरकारी सुविधाओं की पात्र होंगी, वह सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। उनके सुख-दुख में साथ हैं।
- वीरपाल सिंह, प्रधान
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गुड्डी देवी के घर में तीन महीने से अनाज नहीं था। 15 दिनों से परिवार को भरपेट भोजन नहीं मिल पाया था, जिससे गुड्डी देवी, बेटा अजय (20), विजय (15) टीटू (10) सुंदर (5) व बेटी अनुराधा (13) की तबियत बिगड़ती जा रही थी। हालांकि, पड़ोसियों ने खाने-पीने व आर्थिक मदद की, जो नाकाफी थी। 15 जून को हालत बिगड़ने पर गुड्डी व उनके बच्चों को दामाद कन्हैयालाल ने मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां उनका उपचार चल रहा है। हैंड्स फॉर हेल्प संस्था भी गुड्डी देवी व परिवार की मदद कर रही है।
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पड़ोसियों के बोल
गुड्डी देवी व उनके परिवार की मदद पड़ोसियों ने अपनी हैसियत के अनुसार की। किसी ने रोटी दी तो किसी ने रुपये से मदद की।
- उर्मिला, पड़ोसी
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जब गुड्डी व बच्चों की तबियत खराब थी, तब पड़ोसियों ने एंबुलेंस बुलाई थी, लेकिन वह किडनी निकाले जाने की डर से अस्पताल जाने के लिए तैयार नहीं हुई।
- कुसुम देवी, पड़ोसी
गुड्डी देवी के घर में राशन की किल्लत थी। पड़ोसियों ने जो उनसे बन सकता था, उतनी मदद की। गांव में ज्यादातर लोग मजदूर तबके से हैं।
-सावित्री देवी, पड़ोसी
गुड्डी देवी की हरसंभव मदद की जाएगी। जितनी सरकारी सुविधाओं की पात्र होंगी, वह सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। उनके सुख-दुख में साथ हैं।
- वीरपाल सिंह, प्रधान