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अलीगढ़ को भी मिला बापूू का प्यार
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sun, 02 Oct 2016 01:50 AM IST
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mahatma gandhi
अहिंसा के पुजारी और महान युग परिवर्तक महात्मा गांधी का अलीगढ़ की जमीन से गहरा नाता रहा है। वह अपने जीवनकाल में चार बार अलीगढ़ आए लेकिन जब भी आए एक नई इबारत देश और दुनिया के लिए लिख गए। इस बात का जिक्र ऐतिहासिक दस्तावेजों में मौजूद है।
उन्होंने यहां आकर न सिर्फ राष्ट्रीय आंदोलन को धार दी बल्कि यहां के शिक्षाविदें को अंग्रेजों के विरोध के लिए तैयार किया। भारत की वास्तविक दशा का निरीक्षण करते हुए सबसे पहले वह 28 नवंबर 1917 को अलीगढ़ आए। स्टेशन पर छात्रों ने स्वागत किया। स्टेशन से गांधी लायल लाइब्रेरी (मालवीय पुस्तकालय मैदान) में पहुंचे। वहां लगभग 2 हजार लोगों की सभा को संबोधित किया।
1920 में गांधी जी अपने निकट सहयोगी जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्थापक मोहम्मद अली के साथ अलीगढ़ आए और कोठी हबीब बाग में अब्दुल मजीद ख्वाजा के यहां रुके।
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1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान ख्वाजा गिरफ्तार हुए और आंदोलन की कमान उनकी पत्नी खुर्शीद बेगम ने संभाली। यहीं पर रुककर उन्होंने खिलाफत आंदोलन को धार दी।
25 अक्टूबर 1920 को महात्मा गांधी ने मोअम्डन एंग्लो ओरियंटल कॉलेज में भ्रमण किया। यहीं पर उन्हें छात्र संघ की आजीवन सदस्यता भी प्रदान की गई।
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उन्होंने यहां आकर न सिर्फ राष्ट्रीय आंदोलन को धार दी बल्कि यहां के शिक्षाविदें को अंग्रेजों के विरोध के लिए तैयार किया। भारत की वास्तविक दशा का निरीक्षण करते हुए सबसे पहले वह 28 नवंबर 1917 को अलीगढ़ आए। स्टेशन पर छात्रों ने स्वागत किया। स्टेशन से गांधी लायल लाइब्रेरी (मालवीय पुस्तकालय मैदान) में पहुंचे। वहां लगभग 2 हजार लोगों की सभा को संबोधित किया।
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1920 में गांधी जी अपने निकट सहयोगी जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्थापक मोहम्मद अली के साथ अलीगढ़ आए और कोठी हबीब बाग में अब्दुल मजीद ख्वाजा के यहां रुके।
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1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान ख्वाजा गिरफ्तार हुए और आंदोलन की कमान उनकी पत्नी खुर्शीद बेगम ने संभाली। यहीं पर रुककर उन्होंने खिलाफत आंदोलन को धार दी।
25 अक्टूबर 1920 को महात्मा गांधी ने मोअम्डन एंग्लो ओरियंटल कॉलेज में भ्रमण किया। यहीं पर उन्हें छात्र संघ की आजीवन सदस्यता भी प्रदान की गई।