लॉकडाउन की मार: तीन माह से थी भोजन की किल्लत, भूख से बेहाल परिवार की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
परिवार के मुखिया की पिछले लॉकडाउन में मौत हो गई थी। बीते तीन महीने से परिवार को खाने की किल्लत थी। आमदनी का कोई जरिया नहीं है। मंगलवार को सभी के पेट में दर्द शुरू हुआ तो जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
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आगरा रोड के मोहल्ले मंदिर नगला निवासी गुड्डी देवी ने बताया कि 2020 में लॉकडाउन से कुछ दिन पहले पति की बीमारी से मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बाद चार हजार रुपये महीने पर एक फैक्टरी में काम भी किया, लेकिन थोड़े दिन बाद वह भी बंद हो गई।
लॉकडाउन में बंटने वाले खाने के पैकेट पर गुजारा किया। लॉकडाउन खुला तो गुड्डी का बड़ा बेटा अजय मजदूरी करने लगा। इससे कुछ दिन काम चला। इस साल फिर कोरोना कर्फ्यू लग गया। ऐसे में परिवार को ठीक से खाना नसीब नहीं हुआ। पड़ोसियों से कुछ रोटियां मिल जातीं तो बांटकर खा लेते थे। कभी सिर्फ चाय पीकर ही सो जाते।
मंगलवार को हालत बिगड़ने पर गुड्डी के दामाद कन्हैया लाल ने पूरे परिवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती कराया। गुड्डी के साथ अजय (20), विजय (15), अनुराधा (13), टीटू (10), सुंदरम (05) अस्पताल में भर्ती हैं। जहां सभी का उपचार जारी है। सूचना पर प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
परिवार के खाने-पीने से लेकर इलाज तक के लिए जिला अस्पताल में निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों ने बताया कि इनकी जांचें कराई गई हैं। रिपोर्ट आना बाकी है। देखकर ही लग रहा है कि इन्हें कई दिनों से काफी कम मात्रा में खाना मिल रहा था।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर मिली मदद
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पर कई समाजसेवी आगे आए और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। रूबी आसिफ खान, आसिफ खान, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुरेश चंद्र शर्मा, राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ, नामित पार्षद पंकज सक्सेना, धीरज वर्मा, पंकज सैनी व रीतेश वार्ष्णेय फल और जरूरत का सामान लेकर पहुंचे। साथ ही सभी ने कहा कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सभी मिलकर कम से कम दो महीने का राशन उपलब्ध कराएंगे। इसके साथ ही हर संभव मदद का प्रयास भी करेंगे।
नहीं है राशन कार्ड और आधार कार्ड
गुड्डी देवी ने बताया कि उनके पास राशन कार्ड नहीं है। साथ ही किसी का भी आधार कार्ड नहीं बना है। राशन डीलर के पास कुछ राशन मांगने भी गई थीं। लेकिन वहां से कुछ नहीं मिला। स्थानीय प्रधान से भी कहा, लेकिन उसने भी नहीं सुनी। मजबूरन पूरा परिवार भूखे सोने लगा।
खाना देखकर रोने लगा टीटू
दस वर्षीय टीटू को बुधवार को सेब और खरबूजे काटकर दिए गए तो उसने फेंक दिए। रोते हुए बोला कि जब भूख लगी थी तब तो दिया नहीं, अब मुझे नहीं खाना। यहां हैंड्स फॉर हेल्प संस्था के सहयोग से धीरे-धीरे उसे सेब खिलाया गया।
हैंड्स फॉर हेल्प के पदाधिकारी सेवा में जुटे
भूख से पीड़ित गुड्डी देवी के परिवार की सूचना जैसे ही हैंड्स फॉर हेल्प संस्था को मिली, वैसे ही उसके पदाधिकारी परिवार की सेवा में जुट गए हैं। वे सभी के लिए कपड़े, चप्पलें, फल, खाना उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही बिस्तर बदलने से लेकर पेशाब-शौच कराने में सहयोग कर रहे हैं। संस्था के अध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि जब तक इनको जरूरत है, हर सेवा संस्था की तरफ से की जाएगी।
मदद देने के लिए डीएम ने दिए निर्देश
जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परिवार को समुचित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराते हुए जॉब कार्ड एवं राशन कार्ड बनाए जाएं। जिलापूर्ति अधिकारी राजेश कुमार सोनी ने बताया कि पीड़ित परिवार को आटा, दाल, चावल, नमक, मसाले, तेल उपलब्ध कराया है।
इसके अलावा राजस्व विभाग ने भी उपरोक्त सामग्री दी है। खंड विकास अधिकारी विनोद कुमार ने बताया गया कि किसी भी परिजन का आधार कार्ड एवं बैंक खाता न होने के कारण फौरी तौर पर पांच हजार रुपये नकद दिए गए हैं।
आधार कार्ड बनाए जाने के बाद पेंशन, राशन एवं मनरेगा जॉब कार्ड बनाया जाएगा। सीएमएस डॉ. रामकिशन ने बताया कि पीड़ित परिवार को समुचित इलाज मुहैया कराया जा रहा है। अब परिवार की हालत में सुधार है।