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फैज की नज्म पर विवाद बेवजह हैः इरफान हबीब

Fri, 03 Jan 2020 08:15 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2020 08:15 PM IST
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Faiz Ahmad Faiz
इरफान हबीब। - फोटो : CITY OFFICE
मशहूर शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘हम देखेंगे’ के विरोध को प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने पूरी तरह गैर जरूरी बताया है। उन्होंने कहा है कि फैज ने यह नज्म जनरल जिया उल हक के सैनिक शासन के विरोध में लिखी थी। उस समय लाहौर में एक जलसा हुआ था और वहीं पर उन्होंने इस नज्म को पढ़ा था।
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प्रो. हबीब ने कहा कि इस नज्म को हिंदू विरोधी कहना या अन्य किसी संदर्भ में देखना आधारहीन है। कम्यूनिस्ट विचारधारा के फैज ने इस नज्म में कहा है कि तानाशाही खत्म होगी और लोकतांत्रिक व्यवस्था वाली हुकू्मत मुल्क में आनी चाहिए।
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पिछले दिनों आईआईटी कानपुर के छात्रों ने जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली में हुए नागरिकता कानून के विरोध में फैज की नज्म को अपने प्रदर्शन का हिस्सा बनाया था। जिसके बाद आईआईटी के एक प्रोफेसर ने इस नज्म को हिंदुओं की भावनाओं के विपरीत बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद अब यह नज्म अब चर्चा में है। पिछले वर्ष फैज अहमद फैज की जयंती पर दिल्ली में होने वाले एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनकी बेटी को वीजा नहीं मिल पाया था। फैज हिंदुस्तान में भी बेहद लोकप्रिय हैं।
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