फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   FAIMA supports striking doctors at JN Medical College

JN medical college: डॉक्टरों को नागपुर से लद्दाख तक का समर्थन, फाइमा ने वीसी को पत्र भेजकर दी चेतावनी

Sat, 09 May 2026 10:36 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sat, 09 May 2026 10:36 AM IST
सार

मेडिकल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को फाइमा ने समर्थन दिया है। संगठन की ओर से एएमयू कुलपति को पत्र भेजा गया है, जिसमें सीधे-सीधे 48 घंटे की चेतावनी दी गई है कि अगर रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगें न मानी तो वे समर्थन में खड़े हैं।

विज्ञापन
FAIMA supports striking doctors at JN Medical College
जेएन मेडिकल कॉलेज में धरने पर बैठे डॉक्टर - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को नागपुर से लद्दाख तक के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन का समर्थन मिल गया है। संगठन की ओर से एएमयू कुलपति को पत्र भेजा गया है, जिसमें सीधे-सीधे 48 घंटे की चेतावनी दी गई है कि अगर रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगें न मानी तो वे समर्थन में खड़े हैं। इस मांग पत्र में सात मांगों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें पूरा कराने को कहा गया है। इस पत्र की प्रति सीएम यूपी के साथ-साथ डीएम-एसएसपी को भी भेजी गई है।

विज्ञापन


संगठन की ओर से भेजे गए पत्र में रेजिडेंट डॉक्टरों पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा है कि इसके बाद भी उन पर एफआईआर व निलंबन निर्दोष डॉक्टरों को प्रताड़ित किया जाना है। जेएनएमसी में हाल में हुईं ये घटनाएं न केवल कानून व्यवस्था की विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि चिकित्सा पेशे की अंतर्निहित गरिमा का व्यवस्थित और घोर अपमान भी हैं। यह स्थिति प्रशासन द्वारा अपनी जिम्मेदारियों की घोर उपेक्षा का स्पष्ट प्रमाण है। 
विज्ञापन


रेजिडेंट डॉक्टर, जो मरीजों के इलाज के लिए समर्पित हैं, अपने आधिकारिक ड्यूटी घंटों के दौरान अस्पताल में हमले का शिकार हुए। हमले के बाद की प्रतिक्रिया भी उतनी ही चिंताजनक है। हमलावरों के खिलाफ तत्काल और निर्णायक कार्रवाई करने के बजाय, प्रशासन ने डॉक्टरों पर ही एफआईआर दर्ज करने और निलंबन नोटिस जारी करने का विकल्प चुना। ऐसी कार्रवाइयां उचित प्रशासनिक प्रतिक्रिया नहीं दर्शातीं, बल्कि संस्थागत धमकी का एक रूप हैं। जबकि ये डॉक्टर पीड़ित हैं, अपराधी नहीं। खुद पर हमले के खिलाफ विरोध करने वाले डॉक्टर को निलंबित करना नैतिक कायरता का कार्य है, जबकि जवाबदेही मांगने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

साथ में संगठन ने अपनी मांगों का उल्लेख करते हुए कहा है कि अगर मांगों को 48 घंटों में पूरा नहीं किया गया तो संगठन सभी उपलब्ध माध्यमों से आगे बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। फाइमा संगठन जेएनएमसी के डॉक्टरों के साथ एकजुटता से खड़ा है। हम चुप नहीं रहेंगे और न अन्याय को नजरअंदाज होने देंगे। हमारे डॉक्टरों के लिए न्याय अत्यंत आवश्यक है।

ये की गईं प्रमुख सात मांगें

  • रेजिडेंट डॉक्टरों को जारी किए गए सभी निलंबन नोटिस तुरंत रद्द किए जाएं।
  • विरोध कर रहे डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस ली जाएं।
  • हमलावरों के खिलाफ एफआईआर तुरंत दर्ज की जाए और आरोप पत्र दाखिल किया जाए।
  • सहायक प्रॉक्टर फराज फारूक को जिम्मेदारियां निभाने में विफलता पर जांच होने तक पद से हटाया जाए।
  • घायल डॉक्टरों को पर्याप्त आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
  • एक गेट पास प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाए जिससे प्रति रोगी दो से अधिक परिचारकों की अनुमति न हो।
  • अस्पताल परिसर में सुरक्षा ऑडिट किया जाए और सुरक्षा उपायों को स्पष्ट रूप से बढ़ाया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed