JN medical college: डॉक्टरों को नागपुर से लद्दाख तक का समर्थन, फाइमा ने वीसी को पत्र भेजकर दी चेतावनी
मेडिकल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को फाइमा ने समर्थन दिया है। संगठन की ओर से एएमयू कुलपति को पत्र भेजा गया है, जिसमें सीधे-सीधे 48 घंटे की चेतावनी दी गई है कि अगर रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगें न मानी तो वे समर्थन में खड़े हैं।
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अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को नागपुर से लद्दाख तक के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन का समर्थन मिल गया है। संगठन की ओर से एएमयू कुलपति को पत्र भेजा गया है, जिसमें सीधे-सीधे 48 घंटे की चेतावनी दी गई है कि अगर रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगें न मानी तो वे समर्थन में खड़े हैं। इस मांग पत्र में सात मांगों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें पूरा कराने को कहा गया है। इस पत्र की प्रति सीएम यूपी के साथ-साथ डीएम-एसएसपी को भी भेजी गई है।
संगठन की ओर से भेजे गए पत्र में रेजिडेंट डॉक्टरों पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा है कि इसके बाद भी उन पर एफआईआर व निलंबन निर्दोष डॉक्टरों को प्रताड़ित किया जाना है। जेएनएमसी में हाल में हुईं ये घटनाएं न केवल कानून व्यवस्था की विफलता को दर्शाती हैं, बल्कि चिकित्सा पेशे की अंतर्निहित गरिमा का व्यवस्थित और घोर अपमान भी हैं। यह स्थिति प्रशासन द्वारा अपनी जिम्मेदारियों की घोर उपेक्षा का स्पष्ट प्रमाण है।
रेजिडेंट डॉक्टर, जो मरीजों के इलाज के लिए समर्पित हैं, अपने आधिकारिक ड्यूटी घंटों के दौरान अस्पताल में हमले का शिकार हुए। हमले के बाद की प्रतिक्रिया भी उतनी ही चिंताजनक है। हमलावरों के खिलाफ तत्काल और निर्णायक कार्रवाई करने के बजाय, प्रशासन ने डॉक्टरों पर ही एफआईआर दर्ज करने और निलंबन नोटिस जारी करने का विकल्प चुना। ऐसी कार्रवाइयां उचित प्रशासनिक प्रतिक्रिया नहीं दर्शातीं, बल्कि संस्थागत धमकी का एक रूप हैं। जबकि ये डॉक्टर पीड़ित हैं, अपराधी नहीं। खुद पर हमले के खिलाफ विरोध करने वाले डॉक्टर को निलंबित करना नैतिक कायरता का कार्य है, जबकि जवाबदेही मांगने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग है।
साथ में संगठन ने अपनी मांगों का उल्लेख करते हुए कहा है कि अगर मांगों को 48 घंटों में पूरा नहीं किया गया तो संगठन सभी उपलब्ध माध्यमों से आगे बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। फाइमा संगठन जेएनएमसी के डॉक्टरों के साथ एकजुटता से खड़ा है। हम चुप नहीं रहेंगे और न अन्याय को नजरअंदाज होने देंगे। हमारे डॉक्टरों के लिए न्याय अत्यंत आवश्यक है।
ये की गईं प्रमुख सात मांगें
- रेजिडेंट डॉक्टरों को जारी किए गए सभी निलंबन नोटिस तुरंत रद्द किए जाएं।
- विरोध कर रहे डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस ली जाएं।
- हमलावरों के खिलाफ एफआईआर तुरंत दर्ज की जाए और आरोप पत्र दाखिल किया जाए।
- सहायक प्रॉक्टर फराज फारूक को जिम्मेदारियां निभाने में विफलता पर जांच होने तक पद से हटाया जाए।
- घायल डॉक्टरों को पर्याप्त आर्थिक मुआवजा दिया जाए।
- एक गेट पास प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाए जिससे प्रति रोगी दो से अधिक परिचारकों की अनुमति न हो।
- अस्पताल परिसर में सुरक्षा ऑडिट किया जाए और सुरक्षा उपायों को स्पष्ट रूप से बढ़ाया जाए।