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कमाई का पहिया तेजी से घूमा रही इलेक्ट्रिक चाक : धर्मवीर
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अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मांटी कला बोर्ड के अध्यक्ष धर्मवीर प्रजापति शिल्पकारों को विद्युत चाक वित
- फोटो : CITY OFFICE
मिट्टी के दीपक और बर्तन
1-375 परिवार जिले में बना रहे मिट्टी के दीपक और बर्तन
2-36 को बोर्ड से इलेक्ट्रिक चाक मिली, 36 को और मिलेगी
गंगा-यमुना के दोआबे पर बसे अलीगढ़ की मिट्टी में किसी भी आकार में ढल जाने की गजब की क्षमता है। इसलिए यहां हार्डवेयर, मूर्ति और ताले की डाई बहुत बेहतरीन बनती है। यही मिट्टी खूबसूरत दीपक और बर्तनों को भी मनमोहक आकार दे रही है। इलेक्ट्रिक चाक ने इस काम और आसान कर दिया है, जिससे कुम्हारों की दीपावली बेहतर होने जा रही है। सोमवार को माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष धर्मवीर प्रजापति ने बरौला स्थिति अपने आवास पर 26 कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक देते हुए ये बात कही।
इस मौके पर धारा सिंह, जगदीश, रूम सिंह, महाराज सिंह, वीरेंद्र सिंह, रमेश, टीकम सिंह, श्रीपाल, शिव सिंह एवं अमर सिंह समेत कुल 26 लाभार्थियों को विद्युत चाक दी गई। कुम्हार बताते हैं कि हाथ से घूमने वाली चाक अब एक बटन से घूमती और रुकती है। चाक घूमाने में लगनी वाली मेहनत खत्म हो गई है, इसलिए बर्तनों को आकार देने में ही पूरा ध्यान लगता है। नवंबर में दीपावली पंचोत्सव है। इसलिए कुम्हार अभी से दिन रात दीपक, कुल्हड़, मिट्टी के गणेश लक्ष्मी, बर्तन और खिलौने बनाने में जुटे हैं।
केस-एक
गोपीचंद्र पुत्र किशोरीलाल निवासी भोपतपुर ने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाना उनका पैतृक कार्य है। जब से प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा है, तभी से मिट्टी के कुल्हड़ों की मांग बढ़ी है। जागरूकता आने से मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग बढ़ा है। जब से विद्युत चलित चाक मिली है तब से ज्यादा बर्तन बन रहे हैं और आमदनी में तीन हजार रुपये महीने तक इजाफा हुआ है।
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केस-दो
प्रेम चंद्र पुत्र नत्थी सिंह निवासी क्वार्सी ने बताया कि मिट्टी के बर्तन, कुल्हड़, गुल्लक, दीपक बनाना उनका पैतृक कार्य है। ससुराल में भी यही काम होता है। वह और उनकी पत्नी छह घंटे चाक पर बर्तन बना कर 8 से 9 हजार रुपये कमा लेते हैं। अगर विद्युत चलित चाक मिल जाए तो उतने समय में अधिक बर्तन बनेंगे और वह 12 हजार रुपये महीने का काम कर सकेंगे।
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1-375 परिवार जिले में बना रहे मिट्टी के दीपक और बर्तन
2-36 को बोर्ड से इलेक्ट्रिक चाक मिली, 36 को और मिलेगी
गंगा-यमुना के दोआबे पर बसे अलीगढ़ की मिट्टी में किसी भी आकार में ढल जाने की गजब की क्षमता है। इसलिए यहां हार्डवेयर, मूर्ति और ताले की डाई बहुत बेहतरीन बनती है। यही मिट्टी खूबसूरत दीपक और बर्तनों को भी मनमोहक आकार दे रही है। इलेक्ट्रिक चाक ने इस काम और आसान कर दिया है, जिससे कुम्हारों की दीपावली बेहतर होने जा रही है। सोमवार को माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष धर्मवीर प्रजापति ने बरौला स्थिति अपने आवास पर 26 कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक देते हुए ये बात कही।
इस मौके पर धारा सिंह, जगदीश, रूम सिंह, महाराज सिंह, वीरेंद्र सिंह, रमेश, टीकम सिंह, श्रीपाल, शिव सिंह एवं अमर सिंह समेत कुल 26 लाभार्थियों को विद्युत चाक दी गई। कुम्हार बताते हैं कि हाथ से घूमने वाली चाक अब एक बटन से घूमती और रुकती है। चाक घूमाने में लगनी वाली मेहनत खत्म हो गई है, इसलिए बर्तनों को आकार देने में ही पूरा ध्यान लगता है। नवंबर में दीपावली पंचोत्सव है। इसलिए कुम्हार अभी से दिन रात दीपक, कुल्हड़, मिट्टी के गणेश लक्ष्मी, बर्तन और खिलौने बनाने में जुटे हैं।
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केस-एक
गोपीचंद्र पुत्र किशोरीलाल निवासी भोपतपुर ने बताया कि मिट्टी के बर्तन बनाना उनका पैतृक कार्य है। जब से प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा है, तभी से मिट्टी के कुल्हड़ों की मांग बढ़ी है। जागरूकता आने से मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग बढ़ा है। जब से विद्युत चलित चाक मिली है तब से ज्यादा बर्तन बन रहे हैं और आमदनी में तीन हजार रुपये महीने तक इजाफा हुआ है।
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केस-दो
प्रेम चंद्र पुत्र नत्थी सिंह निवासी क्वार्सी ने बताया कि मिट्टी के बर्तन, कुल्हड़, गुल्लक, दीपक बनाना उनका पैतृक कार्य है। ससुराल में भी यही काम होता है। वह और उनकी पत्नी छह घंटे चाक पर बर्तन बना कर 8 से 9 हजार रुपये कमा लेते हैं। अगर विद्युत चलित चाक मिल जाए तो उतने समय में अधिक बर्तन बनेंगे और वह 12 हजार रुपये महीने का काम कर सकेंगे।