Eid-Ul-Adha: ईदगाह-मस्जिदों में इस वक्त पढ़ी जाएगी नमाज, कुर्बानी के बाद अवशेष नहीं फेंके खुले में
पहली नमाज ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद में सुबह 6 बजे पढ़ी जाएगी। इसके बाद नई ईदगाह में सुबह 6:15 बजे नमाज होगी। फिर ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद बू अली शाह में सुबह 6:30 बजे नमाज होगी। इसके बाद नई ईदगाह में सुबह 7 बजे नमाज होगी।
विस्तार
17 जून को ईदुल अजहा की नमाज ईदगाह और मस्जिदों में पढ़ी जाएगी। एक बार फिर शहर मुफ्ती मो. खालिद हमीद ने ईदगाह और मस्जिदों के बाहर नमाज न पढ़ने की गुजारिश की है। कुर्बानी किए गए जानवरों के अवशेष को इधर-उधर न फेंकने की भी अपील की गई है।
शहर मुफ्ती मो. खालिद हमीद ने कहा कि ईदुल अजहा की नमाज पढ़ने के लिए इस बार शाहजमाल स्थित नई ईदगाह में दो बार नमाज पढ़ने का इंतजाम किया गया है। उन्होंने कहा कि बार-बार गुजारिश करने का मकसद सिर्फ इतना है कि लोगों को आगाह किया जा सके कि ईदगाह और मस्जिदों के बाहर कोई जमात या सफबंदी न हो सके।
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और कुर्बानी के चलते ईदुल अजहा की सबसे पहली नमाज ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद में सुबह 6 बजे पढ़ी जाएगी। इसके बाद नई ईदगाह में सुबह 6:15 बजे नमाज होगी। फिर ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद बू अली शाह में सुबह 6:30 बजे नमाज होगी। इसके बाद नई ईदगाह में सुबह 7 बजे नमाज होगी। एएमयू की जामा मस्जिद में अहले सुन्नत और अहले तशी के लोग ईदुल अजहा की नमाज पढ़ेंगे। पहली नमाज अहले सुन्नत की सुबह 7 बजे और दूसरी नमाज अहले तशी की नमाज सुबह 8:15 बजे होगी। पिछली बार के बजाय इस बार बकरों की कीमत ज्यादा है।
अवशेष को इधर-उधर न फेंकें
ईदुल अजहा पर जो साहिबे निसाब यानी मालदार हैं, उन पर कुर्बानी वाजिब है। शहर मुफ्ती ने कुर्बानी किए गए जानवरों के अवशेष को इधर-उधर न फेंकने की अपील की है। मौलाना सैयद अतीकुर्रहीम ने कहा कि ईदुल अजहा पर कुर्बानी देना वाजिब है। साहिबे निसाब होते हुए भी किसी शख्स ने कुर्बानी नहीं दी तो वह गुनहगार होगा। उन्होंने कहा कि कुर्बानी के लिए कोई महंगे जानवर जरूरी नहीं है, बल्कि वह बड़े जानवरों में हिस्सा भी ले सकते हैं। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाना चाहिए। एक हिस्सा गरीबों में, दूसरा हिस्सा दोस्त-रिश्तेदारों में और तीसरा हिस्सा अपने लिए रखना चाहिए।
बाजारों में देर रात होती रही खरीदारी
ईदुल अजहा पर बाजारों में रौनक रही। देर रात तक खरीदारी होती रही। नमाज को लेकर कुर्ता, पायजामा और टोपी की खरीदारी की गई। इत्र भी खरीदे गए। ऊपरकोट, सिविल लाइंस, जीवनगढ़, मेडिकल रोड, सिविल लाइंस सहित मुस्लिम बहुल क्षेत्र के बाजारों में लोगों ने अपनी जरूरतों के मुताबिक खरीदारी की।