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एकता की डोर मजबूत करने में लगा रहे जोर

Mon, 31 Oct 2022 01:24 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 31 Oct 2022 01:24 AM IST
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Efforts are being made to strengthen the thread of unity
31 अक्तूबर को देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन राष्ट्र एकता की, अखंडता और सुरक्षा बनाए रखने की शपथ दिलाई जाती है। वहीं, जिले में कुछ ऐसे भी हैं, जो सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में अपना जोर लगा रहे हैं। सामाजिक सद्भाव को आगे लेकर चल रहे हैं। इनमें शहर के जमाल उद्दीन मलिक हैं, जो दोनों धर्मों के लावारिस शवों का अंतिम संस्कार व सुपुर्द-ए-खाक करते हैं, जबकि रूबी खान भी सांप्रदायिक सौहार्द की पक्षधर हैं। वह रोजा और नवरात्र रखकर एकता का पैगाम दे रही हैं।
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व्यापार में राम-रहीम की झलक
महानगर के नगला पटवार के जमाल उद्दीन मलिक (64) सामाजिक सद्भाव को लेकर फिक्रमंद हैं। वह 18 साल से समाजसेवा से जुड़े हैं। आधा दर्जन सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखने वाले जमाल उद्दीन ने बताया कि उनके शब्दकोष में हिंदू-मुस्लिम के शब्द नहीं हैं, बल्कि वह इंसानियत को सर्वोपरि मानते हैं। हर साल करीब 200-250 लावारिस शवों को उसके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करते हैं। अचल सरोवर और गंगा सेवा समिति से संबंध रखकर वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं और सामाजिक काम भी करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने मेडिकल स्टोर का नाम भी राम-रहीम रखा है। वह सामाजिक सद्भाव में विश्वास रखते हैं।
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आयतों के साथ आरती भी
महानगर के माबूदनगर में रहने वालीं रूबी आसिफ खान (37) ने बताया कि बचपन से ही वह अपने त्योहार के साथ हिंदू धर्म के त्योहार को खुशी-खुशी मनाती हैं। कुरान की आयतों के पढ़ने के साथ आरती भी करती हैं। पिछले पांच वर्षों से रोजे के साथ व्रत रख रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश है कि देश में अमन-चैन कायम रहे। सांप्रदायिक सौहार्द पर शरारती तत्वों की नजर न लगे। इसलिए वह गणेश चतुर्थी और नवरात्र पर गणेशजी और देवी जी की मूर्ति स्थापित की, लेकिन यह बात कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आ रही है। भले ही लोगों को यह बात पसंद न आए। मगर वह अपने सौहार्द के मिशन को लेकर चलती रहेंगी। छठ महापर्व पर उन्होंने व्रत भी रखा है।
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