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पृथ्वी का 'दूसरा चांद' 24 साल की लंबी यात्रा पर रवाना
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पृथ्वी की कक्षा से बाहर आता एस्टोरोएड।
- फोटो : CITY OFFICE
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पृथ्वी के दूसरे चांद ने 24 साल का यात्रावास लिया है। आसान शब्दों में कहें तो एक छोटी सी कार के समान चट्टान, जिसकी चौड़ाई लगभग 7 फुट तथा वजन 4897 किलो था, पिछले 4-5 सालों से चंद्रमा की तरह पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा था। आज सोमवार को वो कक्षा से पूरी तरह निकल गया।
आईटीआई रोड स्थित हैरी एस्ट्रोनॉमी क्लब की मासिक अध्ययन रिपोर्ट सोमवार को स्थानीय प्रधान कार्यालय पर प्राप्त हुई, जिसका अवलोकन करने के बाद अध्यक्ष संजय खत्री की उपस्थिति में इस पर मौजूद सदस्यों के साथ चर्चा की गई। संस्था के प्रवक्ता रंजन राना ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान की एक महत्वपूर्ण खबर कोविड़ -19 व लॉकडाउन के कारण चर्चा में नहीं आ सकी। इस चट्टान या कहें एस्टेरोइड का नाम 2020âèÇUè3 है, जिसकी खोज 15 फरवरी 2020 को टेडी प्रोनी और कैस्पर विजोर्स ने स्काई ऑब्जर्वेटरी से की।
इस उल्का पिंड को मिनी मन कहा जाने लगा क्योंकि यह भी हमारी पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा था। इसकी ट्राजेक्टरी के अध्यन से मालूम हुआ कि यह हमारी पृथ्वी की परिक्रमा लगभग सन 2015-2016 से कर रहा था। इस एस्टेरोइड ने पृथ्वी की कक्षा मार्च के महीने से छोड़नी शुरू कर दी थी और मई आते ही यह पूरी तरह हमारी कक्षा से बाहर हो गया। अब यह सूर्य की परिक्रमा कर रहा है। यह दोबारा सन 2044 में हमारी धरती के पास से (कक्षा से दूर) गुजरेगा। इस अवसर पर दुष्यंत शर्मा, दिलीप कुमार, जयकिशन दीक्षित, संजीव खत्री मौजूद थे।
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आईटीआई रोड स्थित हैरी एस्ट्रोनॉमी क्लब की मासिक अध्ययन रिपोर्ट सोमवार को स्थानीय प्रधान कार्यालय पर प्राप्त हुई, जिसका अवलोकन करने के बाद अध्यक्ष संजय खत्री की उपस्थिति में इस पर मौजूद सदस्यों के साथ चर्चा की गई। संस्था के प्रवक्ता रंजन राना ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान की एक महत्वपूर्ण खबर कोविड़ -19 व लॉकडाउन के कारण चर्चा में नहीं आ सकी। इस चट्टान या कहें एस्टेरोइड का नाम 2020âèÇUè3 है, जिसकी खोज 15 फरवरी 2020 को टेडी प्रोनी और कैस्पर विजोर्स ने स्काई ऑब्जर्वेटरी से की।
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इस उल्का पिंड को मिनी मन कहा जाने लगा क्योंकि यह भी हमारी पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा था। इसकी ट्राजेक्टरी के अध्यन से मालूम हुआ कि यह हमारी पृथ्वी की परिक्रमा लगभग सन 2015-2016 से कर रहा था। इस एस्टेरोइड ने पृथ्वी की कक्षा मार्च के महीने से छोड़नी शुरू कर दी थी और मई आते ही यह पूरी तरह हमारी कक्षा से बाहर हो गया। अब यह सूर्य की परिक्रमा कर रहा है। यह दोबारा सन 2044 में हमारी धरती के पास से (कक्षा से दूर) गुजरेगा। इस अवसर पर दुष्यंत शर्मा, दिलीप कुमार, जयकिशन दीक्षित, संजीव खत्री मौजूद थे।
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