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दस साल से चल रहा था रोडवेज में टिकटों का फर्जीवाड़ा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Thu, 04 Oct 2018 02:18 AM IST
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रोडवेज के रंग में डग्गामार बस
- फोटो : अमर उजाला
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रोडवेज की एक दो नहीं पूरी पचास बसों में टिकटों का फर्जीवाड़ा वर्ष 2008 से चल रहा था। कभी कभार सख्ती होती तो एक आध महीने बंद हो जाता और उसके बाद फिर से चल पड़ता पूरा गोरखधंधा। ऊपर से नीचे तक सब कुछ सेट था। रोडवेज की बस, कंडक्टर, ड्राइवर, टिकट चेकिंग स्टाफ और ऊपर के अधिकारी।
यहां तक की इस गिरोह के सरगना का आना जाना सचिवालय तक था और लखनऊ के बड़े अधिकारियों तक उसकी पहुंच थी। इस गोलमाल की लगातार शिकायत होती रही, लेकिन किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी। पूरे दस साल से ये कारोबार फलफूल रहा था। गिरोह ने बाकायदा बाउंसर पाल रखे थे जो फर्जी टिकट का विरोध करने पर मुसाफिरों को मारपीट कर खामोश करा देते। कोई अधिकारी कुछ कहता तो बाउंसर आंखें तरेर देते। मारपीट के डर से वो अधिकारी भी खामोश हो जाता।
लेकिन जब ये शिकायत एक रसूखदार के माध्यम से सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंची तो एसटीएफ के साथ ही पुलिस के बडे़ अफसर का तंत्र हरकत में आया। बीती 21 अगस्त को एसटीएफ ने इगलास में बस को रोक कर छापा मारा और पूरा मामला खोल दिया। मामला खुला तो पता चला कि नीचे से ऊपर तक सब सेटिंग बहुत तगड़ी है। लखनऊ में इस पूरे मामले की प्रेस कांफ्रेंस हुई। उसके बाद से ही तय माना जा रहा था कि अब बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई होनी है। अभी तक इस पूरे प्रकरण में रोडवेज को कितना राजस्व घाटा हुआ..? इसका आकलन नहीं हुआ है। ये भी तय नहीं हुआ है कि लाखों रुपये के इस घाटे की भरपाई कैसे होगी..?
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21 अगस्त को पकड़े गए गैंग के मास्टर माइंड देवेंद्र सिंह व मेघ सिंह ने बताया था कि वो पिछले 10 वर्ष से अधिक समय से वह रोडवेज की बसों में फर्जी टिकट गिरोह संगठित स्तर पर चला रहे हैं। हाथरस, अलीगढ़, मथुरा और सादाबाद क्षेत्र में ये गिरोह सक्रिय था। उनके साथ मुख्य रूप से अशोक व सोनू सहयोग करते हैं, जो मौके से भागने में सफल रहे। पकड़े गए 11 सदस्यों व 2 फरार साथियों पर इगलास कोतवाली में धारा-147, 148, 149, 307, 409, 332, 353, 352 व 7 सीएलए एक्ट, 13/7 भ्रष्टाचार अधिनियम और 25 आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
ये हुए थे गिरफ्तार
1-देवेंद्र पुत्र मान सिंह पिलखुनी राया मथुरा
2-मेघ सिंह पुत्र कारे सिंह करील मुरसान हाथरस
3-ओमवीर पुत्र राजवीर मोहल्ला असबार इगलास
4-खेम सिंह पुत्र राजवीर सिंह दातुन नगरिया इगलास
5-अरविंद पुत्र राजाराम गढ़ा खेड़ा गोंडा अलीगढ़
6-रविंद्र सिंह पुत्र बहादुर सिंह हकीमपुर हाइवे मथुरा
7-शिवराम पुत्र हरी सिंह नगला जमुनी बल्देव मथुरा
8-रवि तौमर पुत्र रामवीर सिंह नगला जमुनी बल्देव मथुरा
9-कुशलपाल पुत्र बलवीर सिंह रामपुर बकटरा इगलास
10-ज्ञानेंद्र पुत्र रामेंद्र सिंह अतुर्रा गोंडा अलीगढ़
11-बांके बिहारी पुत्र दान बिहारी शर्मा मावली जमुनापार मथुरा
ये फरार
-अशोक पुत्र चंद्रपाल नगला नेचला इगलास
-सोनू पुत्र विजयपाल इगलास
यह माल हुआ था बरामद
1 वैगनआर कार, 2 रोडवेज बस संख्या क्रमश: यूपी 85 एए 9036, यूपी 85 एएच 9600, दो ईटीएम मशीन, एक तमंचा देशी 315 बोर, एक खोखा, 9 मोबाइल एप्पल से लेकर एमआई तक, कुल 23 हजार 750 रुपया, एक सोने की अंगूठी, एक सोने की जंजीर, एक हाथ की घड़ी फास्ट ट्रैक की, देवेंद्र सिंह से आधार कार्ड, डीएल, एटीएम कार्ड, रविंद्र सिंह से पैनकार्ड, मेघ सिंह से दो रोडवेज के आईकार्ड व आधार कार्ड, ज्ञानेंद्र सिंह से एक आधार कार्ड, 2 डीएल, 1 रोडवेज का आईकार्ड, एक पैनकार्ड, एक एटीएम कार्ड आदि।
रोडवेज के घाटे की भरपाई कैसे होगी..?
पूरे दस साल से रोडवेज की पचास बसों में टिकटों का फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ लिया है। अधिकारियों से लेकर ड्राइवर कंडक्टर तक सब पर कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन एक बड़ा सवाल अनसुलझा है कि इस दौरान रोडवेज को जो घाटा हुआ उसका आंकलन कब होगा..? सरकारी राजस्व के इस घाटे की भरपाई कैसे होगी..? इस सवाल का जवाब अब तक नहीं मिला है। हाल ही में परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह अलीगढ़ आए थे तो भी उनके सामने इस तरह के सवाल उठाए गए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
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यहां तक की इस गिरोह के सरगना का आना जाना सचिवालय तक था और लखनऊ के बड़े अधिकारियों तक उसकी पहुंच थी। इस गोलमाल की लगातार शिकायत होती रही, लेकिन किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी। पूरे दस साल से ये कारोबार फलफूल रहा था। गिरोह ने बाकायदा बाउंसर पाल रखे थे जो फर्जी टिकट का विरोध करने पर मुसाफिरों को मारपीट कर खामोश करा देते। कोई अधिकारी कुछ कहता तो बाउंसर आंखें तरेर देते। मारपीट के डर से वो अधिकारी भी खामोश हो जाता।
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लेकिन जब ये शिकायत एक रसूखदार के माध्यम से सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंची तो एसटीएफ के साथ ही पुलिस के बडे़ अफसर का तंत्र हरकत में आया। बीती 21 अगस्त को एसटीएफ ने इगलास में बस को रोक कर छापा मारा और पूरा मामला खोल दिया। मामला खुला तो पता चला कि नीचे से ऊपर तक सब सेटिंग बहुत तगड़ी है। लखनऊ में इस पूरे मामले की प्रेस कांफ्रेंस हुई। उसके बाद से ही तय माना जा रहा था कि अब बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई होनी है। अभी तक इस पूरे प्रकरण में रोडवेज को कितना राजस्व घाटा हुआ..? इसका आकलन नहीं हुआ है। ये भी तय नहीं हुआ है कि लाखों रुपये के इस घाटे की भरपाई कैसे होगी..?
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21 अगस्त को पकड़े गए गैंग के मास्टर माइंड देवेंद्र सिंह व मेघ सिंह ने बताया था कि वो पिछले 10 वर्ष से अधिक समय से वह रोडवेज की बसों में फर्जी टिकट गिरोह संगठित स्तर पर चला रहे हैं। हाथरस, अलीगढ़, मथुरा और सादाबाद क्षेत्र में ये गिरोह सक्रिय था। उनके साथ मुख्य रूप से अशोक व सोनू सहयोग करते हैं, जो मौके से भागने में सफल रहे। पकड़े गए 11 सदस्यों व 2 फरार साथियों पर इगलास कोतवाली में धारा-147, 148, 149, 307, 409, 332, 353, 352 व 7 सीएलए एक्ट, 13/7 भ्रष्टाचार अधिनियम और 25 आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
ये हुए थे गिरफ्तार
1-देवेंद्र पुत्र मान सिंह पिलखुनी राया मथुरा
2-मेघ सिंह पुत्र कारे सिंह करील मुरसान हाथरस
3-ओमवीर पुत्र राजवीर मोहल्ला असबार इगलास
4-खेम सिंह पुत्र राजवीर सिंह दातुन नगरिया इगलास
5-अरविंद पुत्र राजाराम गढ़ा खेड़ा गोंडा अलीगढ़
6-रविंद्र सिंह पुत्र बहादुर सिंह हकीमपुर हाइवे मथुरा
7-शिवराम पुत्र हरी सिंह नगला जमुनी बल्देव मथुरा
8-रवि तौमर पुत्र रामवीर सिंह नगला जमुनी बल्देव मथुरा
9-कुशलपाल पुत्र बलवीर सिंह रामपुर बकटरा इगलास
10-ज्ञानेंद्र पुत्र रामेंद्र सिंह अतुर्रा गोंडा अलीगढ़
11-बांके बिहारी पुत्र दान बिहारी शर्मा मावली जमुनापार मथुरा
ये फरार
-अशोक पुत्र चंद्रपाल नगला नेचला इगलास
-सोनू पुत्र विजयपाल इगलास
यह माल हुआ था बरामद
1 वैगनआर कार, 2 रोडवेज बस संख्या क्रमश: यूपी 85 एए 9036, यूपी 85 एएच 9600, दो ईटीएम मशीन, एक तमंचा देशी 315 बोर, एक खोखा, 9 मोबाइल एप्पल से लेकर एमआई तक, कुल 23 हजार 750 रुपया, एक सोने की अंगूठी, एक सोने की जंजीर, एक हाथ की घड़ी फास्ट ट्रैक की, देवेंद्र सिंह से आधार कार्ड, डीएल, एटीएम कार्ड, रविंद्र सिंह से पैनकार्ड, मेघ सिंह से दो रोडवेज के आईकार्ड व आधार कार्ड, ज्ञानेंद्र सिंह से एक आधार कार्ड, 2 डीएल, 1 रोडवेज का आईकार्ड, एक पैनकार्ड, एक एटीएम कार्ड आदि।
रोडवेज के घाटे की भरपाई कैसे होगी..?
पूरे दस साल से रोडवेज की पचास बसों में टिकटों का फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ लिया है। अधिकारियों से लेकर ड्राइवर कंडक्टर तक सब पर कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन एक बड़ा सवाल अनसुलझा है कि इस दौरान रोडवेज को जो घाटा हुआ उसका आंकलन कब होगा..? सरकारी राजस्व के इस घाटे की भरपाई कैसे होगी..? इस सवाल का जवाब अब तक नहीं मिला है। हाल ही में परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह अलीगढ़ आए थे तो भी उनके सामने इस तरह के सवाल उठाए गए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।