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डॉली प्रकरण:दाई सस्पेंड महिला डॉक्टर को हटाया

Sun, 28 Jan 2018 01:51 AM IST
अभिषेक शर्मा, न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़
अभिषेक शर्मा, न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़ Updated Sun, 28 Jan 2018 01:51 AM IST
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अमर उजाला द्वारा कुपोषण के उपचार के नाम पर हो रहे घालमेल के खिलाफ शुरू किया गया अभियान लगातार रंग ला रहा है। अमर उजाला के 22 जनवरी के अंक में प्रकाशित ‘कुपोषित डॉली को निगल गया भ्रष्टाचार’ खबर से संबंधित प्रकरण में कार्रवाई की गई। बच्ची कुपोषण के लाल घेरे में थी और 56 दिनों तक इंतजार करने पर भी उसे उपचार नहीं मिला था। जांच में यह बात उजागर हो गई। इसमें भ्रष्टाचार का भी खुलासा हुआ और डॉली को भर्ती कराने में लापरवाही भी सामने आई।
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इस आधार पर शनिवार शाम सीएमओ ने भ्रष्टाचार के आरोप में दाई प्रेमवती को सस्पेंड करते हुए हेल्थ विजिटर को चेतावनी देकर छोड़ा है। वहीं बेटी को कुपोषण का उपचार दिलाने में आरबीएसके टीम की डॉ. गीतिका गुप्ता को लापरवाह मानते हुए अकराबाद से हटाकर बिजौली से संबद्ध कर दिया है। 
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अकराबाद के गांव सिंहपुर की नौ माह की डॉली पुत्री सूरजपाल 20 नवंबर को कुपोषण के लाल घेरे में चिह्नित हुई थी। टीम को उसी वक्त डॉली को एनआरसी भर्ती कराना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। लिहाजा इस बच्ची की मौत हो गई। उधर, सूरजपाल ने यह भी बताया कि डॉली के जन्म के समय भी विजयगढ़ सीएचसी पर नर्स, एएनएम और दाई ने मिलकर दो हजार रुपये रिश्वत ली थी। 
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माता-पिता को भी माना गया लापरवाह
जांच में यह भी सामने आया कि कुपोषित डॉली को उपचार दिलाने के मां-बाप के प्रयास भी नाकाफी थे। डॉली को टीके भी पूरे नहीं लगे थे। जन्म के बाद वे झोलाछापों के पास तो गए, लेकिन किसी भी सरकारी अस्पताल तक नहीं आए। सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल ने कहा कि बच्चे को लेकर माता पिता ज्यादा जिम्मेदार होते हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारी के प्रति सतर्क रहना चाहिए। 

इस मामले की जांच एसीएमओ डॉ. पीके शर्मा से कराई गई। दोषी मिले तीन लोगों को दंडित किया गया है। दाई को रिश्वत लेने पर सस्पेंड कर दिया है। हेल्थ विजिटर को रिश्वत का हिस्सा मिलने की पुष्टि नहीं हुई, इसलिए उन्हें कड़ी चेतावनी दी गई है। स्क्रीनिंग करने वाली टीम की डॉ. गीतिका गुप्ता की लापरवाही सामने आई है। उन्हें यहां से हटाकर बिजौली में संबद्ध कर दिया है। ऐसे सभी परिवारों से अपील है कि बच्चा कुपोषित चिह्नित होने के बाद उपचार के लिए सीधे किसी भी सरकारी अस्पताल पहुंचें। 

-डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ

मैं अमर उजाला को जीवनभर नहीं भूलूंगा। गरीब आदमी हूं। आज तक मुझे सिर्फ  फटकार मिली है, लेकिन अमर उजाला ने मेरा दुख सुना। मुश्किल की इस घड़ी में अमर उजाला मेरे साथ खड़ा रहा। मुझे खुशी है कि कुछ तो कार्रवाई हुई। इस कार्रवाई से गरीब को परेशान करने वाले कुछ तो डरेंगे। हालांकि नर्स और ड्राइवर ने भी पैसे लिए थे। 
- सूरजपाल, पीड़ित पिता
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