एक वर्ष में 7200 नसबंदी: ऐसे तो कुत्तों की आबादी बढ़ने से रोकने में लगेंगे और सात साल
शहर में करीब 60,000 कुत्ते हैं, एक साल में इनमें से 7200 की नसबंदी हुई है। यानी इस तरह तो सभी की नसबंदी करने में सात साल और लग जाएंगे, तब तक इनकी संख्या और बढ़ जाएगी।
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अलीगढ़ में कुत्तों के काटने मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कुत्तों की संख्या बढ़ने से रोकने के लिए इनकी नसबंदी कराई जा रही है, लेकिन उसकी रफ्तार सुस्त है। नगर निगम के एक आकलन के अनुसार शहर में करीब 60,000 कुत्ते हैं, एक साल में इनमें से 7200 की नसबंदी हुई है। यानी इस तरह तो सभी की नसबंदी करने में सात साल और लग जाएंगे, तब तक इनकी संख्या और बढ़ जाएगी।
खूंखार कुत्तों ने गत वर्ष 16 अप्रैल को एएमयू में सैर पर निकले एक सेवानिवृत्त चिकित्सक को घेर कर मार डाला था। यह घटना काफी सुर्खियों में रही थी। इसके एक सप्ताह बाद स्वर्ण जयंती नगर में चार माह की बच्ची को कुत्ते घर से खींचकर झाड़ियों में ले गए थे और उसे नोच-नोचकर मार डाला था। इन घटना के बाद नगर निगम की नींद टूटी और कुत्तों की नसबंदी का कार्य शुरू किया गया। नसबंदी कराने का कार्य दक्ष फाउंडेशन को दिया गया है। कुत्तों को पकड़ने के बाद धोर्रा माफी स्थित सेंटर पर लाया जाता है।
नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि महानगर में करीब 60,000 कुत्ते हैं। अभी 52,800 कुत्तों की नसबंदी होनी बाकी है। इस पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नसबंदी के बाद चार दिनों तक कुत्तों को एंटीबायोटिक दवाई दी जातीं हैं। कभी कभी कुत्तों की हालत बिगड़ जाती है, जिसके बाद उन्हें कुछ दिन और रखा जाता है। इस दौरान उनको दूध, रोटी और दलिया दिया जाता है। इसके बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से उसे लाया जाता है।
माह में सात हजार और एक दिन में 275 लोग हो रहे कुत्तों के शिकार
महानगर में मलखान सिंह जिला अस्पताल, दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय में एक दिन में 275 लोग कुत्तों के काटने के शिकार होकर वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इन दोनों अस्पतालों में माह में करीब सात हजार लोग पहुंचते हैं। यह आंकड़ा तो इन दो अस्पतालों का है। निजी चिकित्सकों से वैक्सीन लगवाने वालों का आंकड़ा अलग है।
यह हैं आंकड़े
60,000 कुत्ते हैं नगर निगम के अनुमान के अनुसार महानगर में
918 रुपये का भुगतान एक कुत्ते की नसबंदी के लिए दिया जा रहा
70 से 80 कुत्ते ही एक बार में रखे जाते हैं धोर्रा माफी सेंटर पर
7200 कुत्तों की एक साल में की गईं नसबंदी, चार दिन होती है देखभाल
कान काटकर बनाया जाता है पहचान का निशान
पशुचिकित्सा अधिकारी के अनुसार जिन कुत्तों की नसबंदी की जाती है, उनकी पहचान के लिए कान को काटा जाता है। इलेक्ट्रोकोटिंग मशीन के कान पर वी शेप में कट लगाया जाता है। इससे उनकी पहचान होती है, कि इनकी सर्जरी हो चुकी है। इन कुत्तों को एंटी रेबीज का इंजेक्शन भी लगाया जाता है।
शहर में कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर निगम लगातार प्रयास कर रही है। इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत न होने की वजह से यह काम अभी धीमी गति से चल रहा है। जल्द ही अभियान गति पकड़ेगा। - अमित आसेरी, नगर आयुक्त
एक समय पर सिर्फ 70 से 80 कुत्तों को ही सेंटर में रखा जाता है। एक ही संस्था होने की वजह से अभियान की गति धीमी है। नवंबर तक नया सेंटर बनकर तैयार हो जाएगा, जिसके बाद और नई संस्थाओं को भी ठेका दिया जाएगा। - डा. राजेश वर्मा, पशुचिकित्सा अधिकारी