मेडिकल में चिकित्सकों की हड़ताल: बंद रहे इमरजेंसी के दरवाजे, दर्द से कराहते रहे मरीज, परेशान हुए तीमारदार
एएमयू के मेडिकल कॉलेज में 5 मई की रात डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच हुए विवाद के बाद जूनियर डॉक्टरों के निलंबन और एफआईआर से नाराज रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं। 7 मई को इमरजेंसी के बाहर दर्द, बेबसी और आंसुओं के कई दृश्य दिखाई दिए, जो उपचार की आस में थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में आने वाले मरीजों और तीमारदारों के चेहरे पर चिंता देखी गई। कोई घायल परिजन को संभाल रहा है, तो कोई डॉक्टरों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच जारी टकराव को कोस रहा है। तीसरे दिन भी इमरजेंसी सेवाएं ठप रहीं और मरीज दर्द से कराहते नजर आए।
इमरजेंसी के गेट के बाहर खड़ीं एंबुलेंस और मायूस लौटते परिवार की ये तस्वीरें बता रही हैं कि इस टकराव की सबसे बड़ी कीमत आम मरीज चुका रहा है। पांच मई की रात डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच हुए विवाद के बाद जूनियर डॉक्टरों के निलंबन और एफआईआर से नाराज रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं। बृहस्पतिवार को इमरजेंसी के बाहर दर्द, बेबसी और आंसुओं के कई दृश्य दिखाई दिए, जो उपचार की आस में थे।
बचा लो बहुत दर्द हो रहा है
अतरौली क्षेत्र के दीनापुर गांव की रहने वाली भूरी देवी सिर में गंभीर चोट लगने के बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। उनके सिर से लगातार खून बह रहा था। परिजनों ने इमरजेंसी के गेट पर मदद मांगी, लेकिन वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने हड़ताल का हवाला देते हुए दूसरे अस्पताल जाने की सलाह दे दी। भूरी देवी दर्द से कराहती रहीं और उनके तीमारदार आंखों में आंसू लिए मदद की गुहार लगाते रहे। काफी देर तक इंतजार के बाद परिजन उन्हें निजी अस्पताल लेकर रवाना हो गए।
हादसे के घायल को भी नहीं मिला इलाज
सहजपुर पिसावा निवासी चंद्रप्रकाश सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उनके सिर और पैर में गंभीर चोटें थीं। परिवार के लोग उन्हें उम्मीद के साथ मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें भी भर्ती नहीं किया गया। हालत बिगड़ती देख परिजन मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल ले गए।
मेडिकल कॉलेज परिसर में बढ़ी बेचैनी
इमरजेंसी सेवाएं बंद होने से मेडिकल कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। दूर-दराज़ से आने वाले मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं। कई मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज का खर्च गरीब परिवारों पर भारी पड़ रहा है।
डॉक्टरों को मनाने में जुटा यूनिवर्सिटी प्रशासन
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म कराने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन जुट गया है। डॉक्टरों को मनाने में लगे हैं कि वह इमरजेंसी की ड्यूटी पर लौटें, क्योंकि गरीब मरीजों को परेशानी हो रही है। रही बात उनकी मांगों की, तो उन पर गौर करने का वादा भी किया जा रहा है।
जूनियर डॉक्टरों के दर्द काे समझना होगा : अमुटा
अमुटा के अध्यक्ष प्रो. तुफैल अहमद ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों के दर्द को भी समझना होगा। आखिर उन्हें बार-बार हड़ताल पर जाने की जरूरत क्यों पड़ती है। मेडिकल कॉलेज परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। यह भी जानना अहम है कि क्या डॉक्टरों पर कार्य का दबाव तो नहीं है। कार्य दबाव के चलते उनका व्यवहार तो नहीं बदल रहा है, सभी बिंदुओं पर गहन मंथन करना होगा।