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100 से ज्यादा हत्याओं वाले डॉक्टर डेथ पर पुलिस रिकॉर्ड में सिर्फ 19 मुकदमे?
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पीली टी शर्ट में आरोपी डॉक्टर देवेंद्र शर्मा।
- फोटो : NOIDA
अभिषेक शर्मा
जिस कुख्यात डॉ. देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ के सिर रिकार्ड सौ से अधिक हत्याओं का आरोप है, उसके खिलाफ पुलिस रिकार्ड में महज 19 अपराध दर्ज हैं, जिनमें आठ हत्याएं हैं। यह गवाही देर रहा है थाना छर्रा के हिस्ट्रीशीटर का रिकार्ड। इससे साफ है कि पता नहीं कितनी हत्याएं और कितने अपराध ऐसे हैं, जो देवेंद्र ने किए और उनकी जानकारी आज तक पुलिस को नहीं हो पाई और वह या तो दर्ज नहीं हो पाए और अगर दर्ज हुए तो खुल नहीं पाए। कई राज्यों में जरायम कारनामों का डंका बजाने वाले डॉक्टर डेथ की गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद छर्रा पुलिस दिल्ली पुलिस से संपर्क कर रही है। वहां दर्ज होने वाले ताजा मुकदमों का ब्योरा एकत्र कर रही है।
छर्रा थाने के हिस्ट्रीशीटर देवेंद्र शर्मा पुत्र देवकी नंदन निवासी पुरैनी छर्रा के क्राइम रिकार्ड पर गौर करें तो पहला मुकदमा 1994 में बरला में प्राणघातक हमले का दर्ज हुआ। इसके बाद लगातार कई साल तक अपराध करता रहा और 2004 में उसके क्राइम पर हरियाणा में गिरफ्तारी पर ब्रेक लगा। फिर 2014 में उसने हरियाणा जेल में रहकर छर्रा के कारोबारी से रंगदारी मांगी और उन पर अपने गुर्गों से हमला भी कराया। उसके बाद से उस पर कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ। फरवरी में पैरोल जंप करने का आखिरी मुकदमा जयपुर में इसी साल दर्ज हुआ है। हिस्ट्रीशीटर होने के नाते बीट सिपाही व चौकी प्रभारी उसकी बराबर निगरानी करते हैं। इसी का नतीजा है कि उस पर यूपी के अलावा दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान में दर्ज एक एक मुकदमे का रिकार्ड यहां मौजूद है। मगर हैरानी है कि इतने बड़े अपराधी के मुकदमों का खुलासा क्यों नहीं हो पाया।
लगातार बीस दिन थाने में हाजिरी, 22वें दिन किया बैनामा
छर्रा पुलिस के रिकार्ड के अनुसार वह जनवरी में पैरोल पर रिहा होने के बाद यहां आया और 28 जनवरी से 16 फरवरी तक हर दिन छर्रा थाने में हाजिरी देने आया। 16 फरवरी के बाद वह थाने कभी नहीं आया। इस दौरान उसने बताया कि वह यहां अपनी जमीन बेचने आया है। जमीन बेचने के बाद वापस जेल चला जाएगा। थाने में हाजिरी लगाने के दौरान 16 फरवरी को उसने अतरौली तहसील में स्टांप खरीदे और 18 फरवरी को वहीं बैनामा रजिस्टर्ड हुआ। इसमें उसके गांव के दो पिता पुत्र नरेंद्र व रघुराज सिंह गवाह बने हैं, जबकि सात बीघा के करीब अपने हिस्से की पुस्तैनी जमीन का बैनामा भटौली सिकंदरपुर छेरत निवासी दो भाइयों नीरेश कुमार व ब्रजेश कुमार के नाम किया है। यह जमीन सरकारी आकलन के अनुसार 14 लाख 82 हजार की है, मगर दोनों भाइयों ने यह जमीन मात्र 10 लाख रुपये में खरीदी है।
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बदनसीबी : न बीवी बच्चों का पता, पिता को भी न दे सका कंधा
घर, परिवार, मित्र पड़ोसी कोई कुछ बोलने को नहीं तैयार
दिल्ली में बुधवार को गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में आए डॉक्टर देवेंद्र के गांव बृहस्पतिवार को दोपहर जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो लोग सहम गए। एकाएक चुप्पी साधने लगे। देवेंद्र का घर किसी पुरानी हिंदी फिल्म के सीन की तरह वीरान पड़ा था। दरवाजे पर ताला लटका था और दरवाजे के अलावा घर के चारों ओर ऊंची-ऊंची घास यह गवाही दे रही थी कि यहां कई साल से कोई नहीं आया।
कासगंज के रेलवे अफसर की बेटी से हुआ था विवाह
देवेंद्र के घर से कुछ दूर पहले उसके बुजुर्ग ताऊ रामवीर शर्मा उर्फ रामू अपने दरवाजे पर मिले। लेकिन देवेंद्र का नाम सुनते ही कन्नी काटने लगे। इतना ही बताया कि हमारा उससे या उसके परिवार से कोई नाता नहीं है। जब धीरे-धीरे कुरेदना शुरू हुआ तो बताया कि उसके पिता दवा कंपनी में बतौर एजेंट नौकरी करते थे। दो बेटे देवेंद्र व सुरेंद्र की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। देवेंद्र को पटना विश्वविद्यालय से बीएएमएस कराया और सुरेंद्र की सीआईएसएफ में दरोगा के पद पर नौकरी लगवाई। बेटी का विवाह किया और दोनों बेटों का विवाह किया। देवेंद्र की पत्नी कासगंज के रेलवे अफसर की बेटी है। बीएएमएस करने के बाद वह जयपुर में क्लीनिक खोलने चला गया। उसके बाद से उसकी पत्नी व दो बेटे कभी गांव में वापस नहीं देखे।
छर्रा में फर्जी गैस एजेंसी खोलने के बाद नहीं लौटा गांव
इसी बीच वर्ष 1992 में उसने एक गैस एजेंसी खोली। करीब 500 लोगों को सिलेंडर बांटकर कनेक्शन भी दिए। तभी पता चला कि वह फर्जी एजेंसी है। यह भंडा फूटते ही देवेंद्र गायब हो गया। फिर धीरे-धीरे उसके अपराध सामने आते चले गए। बाद में पता चला कि बीवी इसे तलाक देकर बच्चों को लेकर अलग रह रही है। वह इसकी मिलीभगत से या इसके अपराध की वजह से यह नहीं पता। यह भी जानकारी में आया है कि इसका बेटा पुणे से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। रहते कहां हैं, यह किसी को नहीं मालूम।
पिता की मौत के बाद से ही भाइयों में संपत्ति विवाद
रामवीर शर्मा के मुताबिक, मां की कई दशक पहले मौत हो गई। 6 साल पहले तबियत बिगड़ने पर सुरेंद्र अपने पिता को साथ ले गया। हरिद्वार में उनका निधन होने पर वहीं अंतिम संस्कार हुआ। मगर, उम्रकैद के चलते देवेंद्र हरियाणा जेल में था। इसलिए अंतिम संस्कार में नहीं आ सका। उसकी अपने हिस्से की जमीन बेचने की खबर आई थी, तभी से सुरेंद्र उससे खफा था। अब लॉकडाउन में कई दिन कार लेकर आता था। मगर रात में कभी रुका नहीं। हमसे कोई मतलब भी नहीं। चर्चा सुनी है कि अपने हिस्से की जमीन बेच दी है। मगर इससे ज्यादा जानकारी नहीं है।
डॉक्टर डेथ का आपराधिक इतिहास
वर्ष 1994 में प्राणघातक हमला - बरला, वर्ष 1995 में हत्या - वृंदावन मथुरा, वर्ष 1996 में लूट - रोजा शाहजहांपुर, वर्ष 2001 में अपहरण - पलवल हरियाणा, वर्ष 2001 में फर्जी गैस एजेंसी संचालन - अमरोहा, वर्ष 2002 में अपहरण- बदरपुर नई दिल्ली, वर्ष 2002 में अपहरण/हत्या - थाना सेंट्रल फरीदाबाद हरियाणा, वर्ष 2002 में हत्या - हिंडोन सिटी राजस्थान, वर्ष 2002 में आलानकब में गिरफ्तारी - सोरों, वर्ष 2002 में चोरी के प्रयास में गिरफ्तारी - बांदीकूई राजस्थान, वर्ष 2003 में अपहरण/हत्या/साक्ष्य मिटाना/साजिश - पलवल हरियाणा, वर्ष 2003 में अपहरण/हत्या/साक्ष्य मिटाना - पलवल हरियाणा, वर्ष 2004 में हत्या - होडल फरीदाबाद, वर्ष 2004 में हत्या - अतरौली, वर्ष 2014 में फर्जीवाड़ा कर श्यौराज को जेल भिजवाना - बरला, वर्ष 2014 में कारोबारी मयंक गोयल पर जेल से हमले की साजिश - छर्रा, वर्ष 2014 में कारोबारी मयंक गोयल से जेल से रंगदारी मांगना - छर्रा, वर्ष 2020 में पैरोल जंप करना - लालकोठी जयपुर के अलावा हत्या लूट का एक मुकदमा निल पर यहां दर्ज होकर सासनी जांच के लिए गया।
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जिस कुख्यात डॉ. देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉक्टर डेथ के सिर रिकार्ड सौ से अधिक हत्याओं का आरोप है, उसके खिलाफ पुलिस रिकार्ड में महज 19 अपराध दर्ज हैं, जिनमें आठ हत्याएं हैं। यह गवाही देर रहा है थाना छर्रा के हिस्ट्रीशीटर का रिकार्ड। इससे साफ है कि पता नहीं कितनी हत्याएं और कितने अपराध ऐसे हैं, जो देवेंद्र ने किए और उनकी जानकारी आज तक पुलिस को नहीं हो पाई और वह या तो दर्ज नहीं हो पाए और अगर दर्ज हुए तो खुल नहीं पाए। कई राज्यों में जरायम कारनामों का डंका बजाने वाले डॉक्टर डेथ की गिरफ्तारी की खबर मिलने के बाद छर्रा पुलिस दिल्ली पुलिस से संपर्क कर रही है। वहां दर्ज होने वाले ताजा मुकदमों का ब्योरा एकत्र कर रही है।
छर्रा थाने के हिस्ट्रीशीटर देवेंद्र शर्मा पुत्र देवकी नंदन निवासी पुरैनी छर्रा के क्राइम रिकार्ड पर गौर करें तो पहला मुकदमा 1994 में बरला में प्राणघातक हमले का दर्ज हुआ। इसके बाद लगातार कई साल तक अपराध करता रहा और 2004 में उसके क्राइम पर हरियाणा में गिरफ्तारी पर ब्रेक लगा। फिर 2014 में उसने हरियाणा जेल में रहकर छर्रा के कारोबारी से रंगदारी मांगी और उन पर अपने गुर्गों से हमला भी कराया। उसके बाद से उस पर कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ। फरवरी में पैरोल जंप करने का आखिरी मुकदमा जयपुर में इसी साल दर्ज हुआ है। हिस्ट्रीशीटर होने के नाते बीट सिपाही व चौकी प्रभारी उसकी बराबर निगरानी करते हैं। इसी का नतीजा है कि उस पर यूपी के अलावा दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान में दर्ज एक एक मुकदमे का रिकार्ड यहां मौजूद है। मगर हैरानी है कि इतने बड़े अपराधी के मुकदमों का खुलासा क्यों नहीं हो पाया।
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लगातार बीस दिन थाने में हाजिरी, 22वें दिन किया बैनामा
छर्रा पुलिस के रिकार्ड के अनुसार वह जनवरी में पैरोल पर रिहा होने के बाद यहां आया और 28 जनवरी से 16 फरवरी तक हर दिन छर्रा थाने में हाजिरी देने आया। 16 फरवरी के बाद वह थाने कभी नहीं आया। इस दौरान उसने बताया कि वह यहां अपनी जमीन बेचने आया है। जमीन बेचने के बाद वापस जेल चला जाएगा। थाने में हाजिरी लगाने के दौरान 16 फरवरी को उसने अतरौली तहसील में स्टांप खरीदे और 18 फरवरी को वहीं बैनामा रजिस्टर्ड हुआ। इसमें उसके गांव के दो पिता पुत्र नरेंद्र व रघुराज सिंह गवाह बने हैं, जबकि सात बीघा के करीब अपने हिस्से की पुस्तैनी जमीन का बैनामा भटौली सिकंदरपुर छेरत निवासी दो भाइयों नीरेश कुमार व ब्रजेश कुमार के नाम किया है। यह जमीन सरकारी आकलन के अनुसार 14 लाख 82 हजार की है, मगर दोनों भाइयों ने यह जमीन मात्र 10 लाख रुपये में खरीदी है।
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बदनसीबी : न बीवी बच्चों का पता, पिता को भी न दे सका कंधा
घर, परिवार, मित्र पड़ोसी कोई कुछ बोलने को नहीं तैयार
दिल्ली में बुधवार को गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में आए डॉक्टर देवेंद्र के गांव बृहस्पतिवार को दोपहर जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो लोग सहम गए। एकाएक चुप्पी साधने लगे। देवेंद्र का घर किसी पुरानी हिंदी फिल्म के सीन की तरह वीरान पड़ा था। दरवाजे पर ताला लटका था और दरवाजे के अलावा घर के चारों ओर ऊंची-ऊंची घास यह गवाही दे रही थी कि यहां कई साल से कोई नहीं आया।
कासगंज के रेलवे अफसर की बेटी से हुआ था विवाह
देवेंद्र के घर से कुछ दूर पहले उसके बुजुर्ग ताऊ रामवीर शर्मा उर्फ रामू अपने दरवाजे पर मिले। लेकिन देवेंद्र का नाम सुनते ही कन्नी काटने लगे। इतना ही बताया कि हमारा उससे या उसके परिवार से कोई नाता नहीं है। जब धीरे-धीरे कुरेदना शुरू हुआ तो बताया कि उसके पिता दवा कंपनी में बतौर एजेंट नौकरी करते थे। दो बेटे देवेंद्र व सुरेंद्र की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। देवेंद्र को पटना विश्वविद्यालय से बीएएमएस कराया और सुरेंद्र की सीआईएसएफ में दरोगा के पद पर नौकरी लगवाई। बेटी का विवाह किया और दोनों बेटों का विवाह किया। देवेंद्र की पत्नी कासगंज के रेलवे अफसर की बेटी है। बीएएमएस करने के बाद वह जयपुर में क्लीनिक खोलने चला गया। उसके बाद से उसकी पत्नी व दो बेटे कभी गांव में वापस नहीं देखे।
छर्रा में फर्जी गैस एजेंसी खोलने के बाद नहीं लौटा गांव
इसी बीच वर्ष 1992 में उसने एक गैस एजेंसी खोली। करीब 500 लोगों को सिलेंडर बांटकर कनेक्शन भी दिए। तभी पता चला कि वह फर्जी एजेंसी है। यह भंडा फूटते ही देवेंद्र गायब हो गया। फिर धीरे-धीरे उसके अपराध सामने आते चले गए। बाद में पता चला कि बीवी इसे तलाक देकर बच्चों को लेकर अलग रह रही है। वह इसकी मिलीभगत से या इसके अपराध की वजह से यह नहीं पता। यह भी जानकारी में आया है कि इसका बेटा पुणे से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। रहते कहां हैं, यह किसी को नहीं मालूम।
पिता की मौत के बाद से ही भाइयों में संपत्ति विवाद
रामवीर शर्मा के मुताबिक, मां की कई दशक पहले मौत हो गई। 6 साल पहले तबियत बिगड़ने पर सुरेंद्र अपने पिता को साथ ले गया। हरिद्वार में उनका निधन होने पर वहीं अंतिम संस्कार हुआ। मगर, उम्रकैद के चलते देवेंद्र हरियाणा जेल में था। इसलिए अंतिम संस्कार में नहीं आ सका। उसकी अपने हिस्से की जमीन बेचने की खबर आई थी, तभी से सुरेंद्र उससे खफा था। अब लॉकडाउन में कई दिन कार लेकर आता था। मगर रात में कभी रुका नहीं। हमसे कोई मतलब भी नहीं। चर्चा सुनी है कि अपने हिस्से की जमीन बेच दी है। मगर इससे ज्यादा जानकारी नहीं है।
डॉक्टर डेथ का आपराधिक इतिहास
वर्ष 1994 में प्राणघातक हमला - बरला, वर्ष 1995 में हत्या - वृंदावन मथुरा, वर्ष 1996 में लूट - रोजा शाहजहांपुर, वर्ष 2001 में अपहरण - पलवल हरियाणा, वर्ष 2001 में फर्जी गैस एजेंसी संचालन - अमरोहा, वर्ष 2002 में अपहरण- बदरपुर नई दिल्ली, वर्ष 2002 में अपहरण/हत्या - थाना सेंट्रल फरीदाबाद हरियाणा, वर्ष 2002 में हत्या - हिंडोन सिटी राजस्थान, वर्ष 2002 में आलानकब में गिरफ्तारी - सोरों, वर्ष 2002 में चोरी के प्रयास में गिरफ्तारी - बांदीकूई राजस्थान, वर्ष 2003 में अपहरण/हत्या/साक्ष्य मिटाना/साजिश - पलवल हरियाणा, वर्ष 2003 में अपहरण/हत्या/साक्ष्य मिटाना - पलवल हरियाणा, वर्ष 2004 में हत्या - होडल फरीदाबाद, वर्ष 2004 में हत्या - अतरौली, वर्ष 2014 में फर्जीवाड़ा कर श्यौराज को जेल भिजवाना - बरला, वर्ष 2014 में कारोबारी मयंक गोयल पर जेल से हमले की साजिश - छर्रा, वर्ष 2014 में कारोबारी मयंक गोयल से जेल से रंगदारी मांगना - छर्रा, वर्ष 2020 में पैरोल जंप करना - लालकोठी जयपुर के अलावा हत्या लूट का एक मुकदमा निल पर यहां दर्ज होकर सासनी जांच के लिए गया।