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भूख से पीड़ित परिवार का मामलाः अस्पताल से मिली छुट्टी, गुड्डी के परिवार के चेहरे पर आई मुस्कान
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मलखान सिंह जिला अस्पताल से छुट्टी मिलने पर गुड्डी देवी के परिवार के सभी सदस्यों के चेहरों पर 11 दिन बाद मुस्कान दिखाई दी। 15 जून को भूख से बेहाल परिवार की हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार की हालत सुधरी तो स्टाफ ने हंसकर विदाई दी। नर्सों ने कहा कि अपना ख्याल रखना। इस दौरान गुड्डी देवी ने हर उस व्यक्ति का धन्यवाद किया, जिन्होंने बुरे वक्त में साथ दिया था। वहीं, परिवार घर पहुंचा तो मकान की रंगाई-पुताई, गैस-चूल्हा आदि देखकर खुश नजर आया।
15 जून को भूख से बेहाल होकर गुड्डी देवी के परिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शारीरिक कमजोरी के साथ बच्चे मानसिक रूप से परेशान थे। 2020 में लॉकडाउन से पहले गुड्डी देवी के पति बिजेंद्र की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया था। पांच बच्चों का पेट पालने के लिए गुड्डी देवी ने चार हजार रुपये में नौकरी शुरू की। फैक्टरी बंद होने के बाद पूरा परिवार भोजन के पैकेट पर निर्भर हो गया। लॉकडाउन खुला तो गुड्डी देवी का बड़ा बेटा अजय मजदूरी करने लगा। मजदूरी मिलती तो राशन लेकर पहुंच जाता। नहीं तो परिवार कभी-कभी चाय पीकर ही सो जाता। धीरे-धीरे पड़ोसियों की मदद भी सीमित हो गई। चार रोटी पर कुल छह लोग गुजारा करने लगे।
15-20 दिनों से ढंग का खाना नहीं मिला तो परिवार की हालत खराब हो गई। गुड्डी के दामाद कन्हैया लाल ने परिवार को जिला अस्पताल में 15 जून को भर्ती कराया। 40 वर्षीय गुड्डी के साथ अजय (20), विजय (15), अनुराधा (13), टीटू (10), सुंदरम (05) का अस्पताल में इलाज शुरू हुआ। एक बच्चे को खून तक चढ़ाना पड़ा। 11 दिनों तक इलाज और अच्छे खानपान से सभी की तबियत सुधर गई।
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तबियत में सुधार होने पर शुक्रवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी। छुट्टी के बाद परिवार घर पहुंचा तो मरम्मत के बाद नए कपड़े, चद्दर, घाट, पुताई देखकर खुश हो गया।
अमर उजाला फाउंडेशन ने मदद के लिए की थी अपील
गुड्डी देवी के परिवार की हालत देखकर अमर उजाला फाउंडेशन ने लोगों से अपील की थी कि परिवार का सहयोग किया जाए। इस पर कई लोगों ने अस्पताल पहुंचकर फल और जरूरत का सामान पहुंचाया। इसके साथ ही समाजसेवियों ने दो महीने के राशन की मदद की। राजनैतिक पार्टियों से लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी अपने-अपने स्तर से मदद की। इसके अलावा हैंड्स फॉर हेल्प संस्था के पदाधिकारियों ने परिवार के लिए तीमारदार का काम किया। संस्था ने घर की मरम्मत और रंगाई पुताई कराई। जिला पूर्ति अधिकारी ने परिवार को गैस चूल्हे की व्यवस्था की। सेवा करने वाले सदस्यों में अध्यक्ष सुनील कुमार, डॉ. डीके वर्मा, डॉ. एसके गौड़. भूवनेश शर्मा, जितेंद्र, विवेक अग्रवाल, नीरज रानी, शिवम माहेश्वरी, विशाल वार्ष्णेय आदि का सहयोग रहा।
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15 जून को भूख से बेहाल होकर गुड्डी देवी के परिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शारीरिक कमजोरी के साथ बच्चे मानसिक रूप से परेशान थे। 2020 में लॉकडाउन से पहले गुड्डी देवी के पति बिजेंद्र की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया था। पांच बच्चों का पेट पालने के लिए गुड्डी देवी ने चार हजार रुपये में नौकरी शुरू की। फैक्टरी बंद होने के बाद पूरा परिवार भोजन के पैकेट पर निर्भर हो गया। लॉकडाउन खुला तो गुड्डी देवी का बड़ा बेटा अजय मजदूरी करने लगा। मजदूरी मिलती तो राशन लेकर पहुंच जाता। नहीं तो परिवार कभी-कभी चाय पीकर ही सो जाता। धीरे-धीरे पड़ोसियों की मदद भी सीमित हो गई। चार रोटी पर कुल छह लोग गुजारा करने लगे।
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15-20 दिनों से ढंग का खाना नहीं मिला तो परिवार की हालत खराब हो गई। गुड्डी के दामाद कन्हैया लाल ने परिवार को जिला अस्पताल में 15 जून को भर्ती कराया। 40 वर्षीय गुड्डी के साथ अजय (20), विजय (15), अनुराधा (13), टीटू (10), सुंदरम (05) का अस्पताल में इलाज शुरू हुआ। एक बच्चे को खून तक चढ़ाना पड़ा। 11 दिनों तक इलाज और अच्छे खानपान से सभी की तबियत सुधर गई।
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तबियत में सुधार होने पर शुक्रवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी। छुट्टी के बाद परिवार घर पहुंचा तो मरम्मत के बाद नए कपड़े, चद्दर, घाट, पुताई देखकर खुश हो गया।
अमर उजाला फाउंडेशन ने मदद के लिए की थी अपील
गुड्डी देवी के परिवार की हालत देखकर अमर उजाला फाउंडेशन ने लोगों से अपील की थी कि परिवार का सहयोग किया जाए। इस पर कई लोगों ने अस्पताल पहुंचकर फल और जरूरत का सामान पहुंचाया। इसके साथ ही समाजसेवियों ने दो महीने के राशन की मदद की। राजनैतिक पार्टियों से लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी अपने-अपने स्तर से मदद की। इसके अलावा हैंड्स फॉर हेल्प संस्था के पदाधिकारियों ने परिवार के लिए तीमारदार का काम किया। संस्था ने घर की मरम्मत और रंगाई पुताई कराई। जिला पूर्ति अधिकारी ने परिवार को गैस चूल्हे की व्यवस्था की। सेवा करने वाले सदस्यों में अध्यक्ष सुनील कुमार, डॉ. डीके वर्मा, डॉ. एसके गौड़. भूवनेश शर्मा, जितेंद्र, विवेक अग्रवाल, नीरज रानी, शिवम माहेश्वरी, विशाल वार्ष्णेय आदि का सहयोग रहा।