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अलीगढ़ः 70 हजार न देने पड़ें, इसलिए दोस्त को मार डाला

Tue, 25 Jan 2022 01:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jan 2022 01:15 AM IST
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Did not have to pay 70 thousand, so killed the friend
थाना क्वार्सी पुलिस द्वारा पकड़ा गया दोस्त की हत्या में वांछित अभियुक्त। - फोटो : CITY OFFICE
क्वार्सी क्षेत्र के नगला मल्लाह निवासी वाल्मीकि समाज के युवक विनोद की हत्या महज 70 हजार रुपये की उधारी देने से बचने के लिए उसके दोस्त ने की थी। पुलिस ने आरोपी दोस्त को गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा कर दिया है। इस वारदात में उसका एक और साथी शामिल था। वह फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
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इंस्पेक्टर क्वार्सी विजय सिंह के अनुसार, नगला मल्लाह का पशु व्यापारी 25 वर्षीय विनोद वाल्मीकि 15 जनवरी की शाम घर से गया था। रविवार सुबह उसकी लाश चिलकौरा रोड पर मिली थी। पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या करना उजागर हुआ था। पुलिस व परिवार को पहले ही दिन से उसके दोस्त आशिफ उर्फ जब्बा पर शक था। पुलिस के अनुसार, आशिफ ने स्वीकार किया है कि विनोद से उसने 70 हजार रुपये उधार ले रखे थे। नियत समय पर वह रुपये वापस नहीं कर पाया। इस पर विनोद लगातार उस पर दबाव बना रहा था। इसी के चलते अपने दूसरे दोस्त नाजिम संग मिलकर यह हत्या करना तय किया। साजिश के तहत शनिवार को वे दोनों उसे बातों में लगाकर ले गए और बीयर भी पिलाई। इसी दौरान अंधेरे में चिलकौरा रोड पर एकांत में उसकी गला दबाकर हत्या कर शव को एक कोठरी के पास फेंक कर और बाइक वहीं कुछ दूरी पर खड़े कर चले आए। घटना के वक्त विनोद का मोबाइल भी आशिफ ने बंद कर अपने घर में छिपाया था, जिसे पुलिस ने बरामद किया है। सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय के अनुसार घटना का खुलासा हो गया है। सोमवार को आशिफ को न्यायालय में पेशी के बाद जेल भेज दिया। अभी नाजिम की तलाश जारी है।
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सीसीटीवी और फोन पे ने पहुंचाया सच्चाई तक
घटना के बाद परिवार ने भी आशिफ पर संदेह जताया था और शुरुआती तथ्यों में पुलिस भी उसी के इर्द-गिर्द घूम रही थी। उसे पहले दौर में जब पूछताछ के लिए बुलाया तो वह पुलिस को इधर उधर भटकाकर चला गया। इसके बाद पुलिस ने नए सिरे से सीसीटीवी की खोज शुरू की तो घटनास्थल के रास्ते पर एक जगह विनोद के साथ आशिफ कैद पाया गया। इसी बीच सर्विलांस की मदद से यह भी जानकारी आई कि घटना के बाद विनोद के मोबाइल के फोन पे एकाउंट से दस हजार रुपये दस हजार रुपये निकाले गए हैं। जब इस रुपये निकालने के तथ्य को चेक किया तो उसमें भी आशिफ ही सामने आया। इसके बाद फिर से हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ में वह टूट गया और स्वीकारा कि दस हजार रुपये में से पांच-पांच हजार दोनों ने बांट लिए थे।
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