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डिटेंशन सेंटर की कहानी, भुक्तभोगी की जुबानी

Tue, 04 Feb 2020 01:42 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Feb 2020 01:42 AM IST
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Detention center
सउदी अरब में डिटेंशन में रहे दुर्गेश सिंघल (सफेद शर्ट में) फाइल फोटो - फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा
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सीएए, एनआरसी और एनपीआर के साथ एक शब्द और भी चर्चा में है, वह है डिटेंशन सेंटर। सऊदी अरब में नौकरी की तलाश में गए और वहां पर बुरी रह फंसकर रह गए अलीगढ़ के सारसौल निवासी दुर्गेश सिंघल ने भारत भेजे जाने से पहले अपना वक्त डिटेंशन सेंटर में गुजारा। यह वहां का कानून भी है। करीब एक हफ्ते तक डिटेंशन सेंटर में रहे दुर्गेश ने बताया कि वहां रहना बेहद यातना भरा था। इंडियन हेल्प डेस्क पोर्टल चलाने वाले रूपेश पाठक के सहयोग से उन्हें सुरक्षित भारत लाया जा सका।
दुर्गेश सिंघल को सऊदी अरब में यह कह कर ले जाया गया कि वहां पर ड्राइवर की नौकरी है। लेकिन वहां जाकर उसे बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में बतौर मजदूर लगा दिया गया। बेहद तेज गर्मी में अत्यधिक श्रम का काम करने से दुर्गेश की तबियत खराब हो गई। उसने वहां से भागना चाहा लेकिन नौकरी देने वाले वाले व्यापारी ( जिसे कफील कहते हैं) ने उसका पासपोर्ट पहले ही जब्त कर लिया था। जब दुर्गेश की जानकारी इंडियन हेल्प डेस्क के रूपेश पाठक को हुई तो तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयासों के चलते उसका मामला सऊदी दूतावास तक पहुंचा। वहां की अदालत ने उसे भारत भेजने से पहले डिटेंशन सेंटर भेजने का निर्देश दिया।
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जब दुर्गेश डिटेंशन सेंटर में पहुंचा तो पाया कि वह बहुत गंदा और बदबू भरा था। एक सेल में अलग अलग जगहों के लोग होते थे। यहां पर खाने का पैसा खुद ही देना होता था जिसका खर्चा इंडियन हेल्प डेस्क ने वहन किया। जगह जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। सऊदी सुरक्षा गार्ड इस तरह निगरानी रखते थे, जैसे जानवरों को घेर कर रख रहे हों। बताया कि आत्मसम्मान पूरी तरह टूट चुका था। एक हफ्ते बाद जब डिपोर्ट होने का मैसेज आया तो लगा जिंदगी दोबारा मिल गई है। अगले दिन सुबह जब दिल्ली में भारत की धरती पर प्लेन उतरा तो वह एक नई जिंदगी थी।
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दुर्गेश ने दूसरा पासपोर्ट नहीं बनवाया
सऊदी अरब पहुंचते ही दुर्गेश का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था। डिटेंशन सेंटर के दौरान दुर्गेश का अस्थायी पासपोर्ट वहां भारतीय दूतावास ने बनवाया। जिसके आधार पर वह भारत आ सका। यह पासपोर्ट तीन महीने के लिए वैध रहता है। भारत आने के बाद दुर्गेश ने बताया कि वह अब अपना दूसरा पासपोर्ट नहीं बनवाएगा। क्योंकि उसे अब भारत छोड़कर कहीं नहीं जाना है।
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