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आज मनाई जाएगी छोटी दीपावली
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पीतल के लक्ष्मी गणेश पसंद करती महिलाएं।
- फोटो : CITY OFFICE
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आज धूमधाम से छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी) मनाई जाएगी। दीपदान के लिए शाम को 06:15 से 09:05 बजे तक श्रेष्ठ मुहूर्त मिलेगा। यम दीपदान के लिए चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक मुख्य द्वार पर रखना शुभ रहेगा।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है, जिसे छोटी दीपावली भी कहते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है। दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी के दिन संध्या के बाद दीप जलाए जाते हैं। चतुर्दशी का पूजन करके अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज की पूजा व उपासना की जाती है। उन्होंने कहा कि नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर मनुष्य नरक के भय से मुक्त हो जाता है।
अहोई अष्टमी के जल से स्नान करने पर नरक के भय से मिलेगी मुक्ति
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अहोई अष्टमी के दिन लोटे में पानी भरकर रखा जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन इस लोटे का जल नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है। स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करें। ऐसा करने से मनुष्य द्वारा वर्ष भर किए गए पापों का नाश हो जाता है। इस दिन यमराज के निमित्त तेल का दीया घर के मुख्य द्वार से बाहर की ओर लगाएं। शाम के समय सभी देवताओं की पूजा के बाद तेल के दीपक जलाकर घर की चौखट के दोनों ओर, घर के बाहर व कार्य स्थल के प्रवेश द्वार पर रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने से लक्ष्मी जी सदैव घर में निवास करती हैं।
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श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है, जिसे छोटी दीपावली भी कहते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है। दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी के दिन संध्या के बाद दीप जलाए जाते हैं। चतुर्दशी का पूजन करके अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यमराज की पूजा व उपासना की जाती है। उन्होंने कहा कि नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर मनुष्य नरक के भय से मुक्त हो जाता है।
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अहोई अष्टमी के जल से स्नान करने पर नरक के भय से मिलेगी मुक्ति
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अहोई अष्टमी के दिन लोटे में पानी भरकर रखा जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन इस लोटे का जल नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से नरक के भय से मुक्ति मिलती है। स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना करें। ऐसा करने से मनुष्य द्वारा वर्ष भर किए गए पापों का नाश हो जाता है। इस दिन यमराज के निमित्त तेल का दीया घर के मुख्य द्वार से बाहर की ओर लगाएं। शाम के समय सभी देवताओं की पूजा के बाद तेल के दीपक जलाकर घर की चौखट के दोनों ओर, घर के बाहर व कार्य स्थल के प्रवेश द्वार पर रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने से लक्ष्मी जी सदैव घर में निवास करती हैं।
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