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कोरोना का डर : सुबह से लेकर शाम तक बाजार सूने, सड़कों पर सन्नाटा
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लॉकडाउन के दौरान अलीगढ़ के सारसौर चौराहे पर पसरा रहा सन्नाटा ।
- फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर शासन की ओर से 25 मार्च तक अलीगढ़ में किए लॉकडाउन का असर सोमवार को 90 प्रतिशत तक सफल रहा। सुबह से लेकर शाम तक बाजार सूने रहे। सड़कों पर सन्नाटा रहा। हर चौराहा पर सिर्फ पुलिस के जवान नजर आ रहे थे। वह भी लोगों को रोकने टोकने में लगे थे।
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सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक
क्वार्सी चौराहा से दुबे पड़ाव के हाल
सुबह के आठ बज रहे थे। सूरज अपने तेज पर चढ़ रहा था। मगर, सूर्य इन किरणों के साथ आम दिनों की तरह चौराहा का रंग नहीं बदल रहा था। बस यहां सूना पन नजर आ रहा था। पैदल-पैदल यहां से थोड़ा आगे बढ़ने पर स्वर्ण जयंती नगर का मोड़ पड़ा। इस मोड़ से स्वर्ण जयंती नगर के अंदर घुसने पर यहां रहने वाले बाशिंदे अपने-अपने घरों के सामने खड़े नजर आए। मगर, इनके चेहरे पर सुबह की ताजगी नहीं थी।
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इनको न ऑफिस जाने की जल्दी थी, न बच्चों को स्कूल ले जाने की। थोड़ा आगे जाने पर एक मोड़ पर दो व्यक्ति खड़े मिले यह व्यक्ति आपस में बात कर रहे थे कि देखो कोरोना ने जनता को कैसे घरों में कैद रहने को मजबूर कर दिया है। इसके बाद यहां से वापस लौटते हुए वापस रामघाट रोड़ पर आए। तब तक तकरीबन साढे आठ बज चुके थे।
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इस समय इस रोड पर वाहनों की कतार देखने को मिल जाती थी। मगर, आज सन्नाटा था। आगे बढ़ने पर रोड पर स्थित कुछ हॉस्पिटल दिखे। यह लोग परेशान थे कि सुबह किसी चाय वाले दुकान नहीं खुली। आगे बढ़ते हुए चलते-चलते अतरौली अड्डा आता है। आम दिनों में यहां दो चाय की दुकानें के खोखे खुले मिलते हैं, लेकिन यह भी बंद थे। सेंटर प्वाइंट चौराहा पर पहुंचते-पहुंचते दस बज गए। यहां तीन से चार पुलिसकर्मी तैनात थे।
यहां से रेलवे स्टेशन रोड होते हुए मीनाक्षी पुल तक पहुंचे तो यहां भी सन्नाटा नजर आया। आमतौर पर इस पुल से रेलवे स्टेशन का नजारा खचाखच भीड़भाड़ का नजर आता है। मगर, स्टेशन सन्नाटे में था। पुल पार करने पर दुबे पड़ाव चौराहा आता है। यह चौराहा बसों सहित अन्य वाहनों से सुबह से जाम से जूझता नजर आता है, लेकिन यहां भी सन्नाटा था। सिर्फ चौराहा पर कुछ पुलिसकर्मी खड़े थे। पुलिस वालों के बीच चर्चा थी कि कोरोना ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। भगवान अब इससे छुटकारा दिला दे।
सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक
यहां से रेलवे स्टेशन रोड होते हुए मीनाक्षी पुल तक पहुंचे तो यहां भी सन्नाटा नजर आया। आमतौर पर इस पुल से रेलवे स्टेशन का नजारा खचाखच भीड़भाड़ का नजर आता है। मगर, स्टेशन सन्नाटे में था। पुल पार करने पर दुबे पड़ाव चौराहा आता है। यह चौराहा बसों सहित अन्य वाहनों से सुबह से जाम से जूझता नजर आता है, लेकिन यहां भी सन्नाटा था। सिर्फ चौराहा पर कुछ पुलिसकर्मी खड़े थे। पुलिस वालों के बीच चर्चा थी कि कोरोना ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। भगवान अब इससे छुटकारा दिला दे।
सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक
रेलवे रोड से लेकर ऊपरकोट का हाल
सुबह के ठीक 11 बज रहे थे। जीटी रोड से रेलवे रोड का हाल जानने को लेकर पैदल यात्रा शुरू होती है। यात्रा के पहले पड़ाव में रेलवे रोड से चलते हुए ढपरा रोड पर पहुंचते हैं। इस पूरे रोड पर हर ओर खामोशी थी। कुछ बाइकों पर इधर से उधर जा रहे थे। चालकों ने हेलमेट तो नहीं लेकिन मास्क जरूर पहन रखा था। यहां से हकीम की सराय होते हुए पहंचते हैं। यहां आम दिनों में कचौड़ी की दुकानें, ढकेलें लगी मिलती हैं। मगर, सोमवार को यह गायब थीं।
कचौड़ी तले जाने की खुशबू फिजा में नहीं घुली थी। यहां से आगे बढ़ने पर बारहद्वारी चौराहा पहुंचते हैं तो पुलिस के बैरिकेडिंग लगी मिलती है। पुलिस वाले लोगों को आगे महावीर गंज, अशोक नगर, रघुवीर पुरी, देहली गेट, ऊपरकोट की ओर जाने से रोक रहे थे। कुछ लोग पुलिस को कहते दिखे की वह दवा, किराना सामान लेने निकले हैं। इस पुलिस उनसे दवा के पर्चे मांगती है। यहां से पैदल-पैदल महावीर गंज होते हुए ऊपरकोट की ओर चलते-चलते 12 बज जाते हैं।
ऊपरकोट की ओर जाने के दौरान आमतौर पर यहां कपड़ा, फुटवियर की दुकानों पर भीड़ देखने को मिलती हैं, लेकिन यह दुकानें बंद थीं। 12:30 बजे करीब ऊपरकोट तक पहुंचते हैं। यहां मस्जिद के सामने हर रोज की तरह फुटपाथ पर दुकानें नहीं सजीं थीं। बाबरी मंडी की ओर जाने वाला रास्ता खामोश था। मस्जिद के सामने के देहली गेट की ओर बढऩे पर यहां पुलिस की बेरिकेटिंग फिर से लगी मिली। पुलिस लोगों को आने-जाने से रोकती नजर आई।
सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक
सुबह के ठीक 11 बज रहे थे। जीटी रोड से रेलवे रोड का हाल जानने को लेकर पैदल यात्रा शुरू होती है। यात्रा के पहले पड़ाव में रेलवे रोड से चलते हुए ढपरा रोड पर पहुंचते हैं। इस पूरे रोड पर हर ओर खामोशी थी। कुछ बाइकों पर इधर से उधर जा रहे थे। चालकों ने हेलमेट तो नहीं लेकिन मास्क जरूर पहन रखा था। यहां से हकीम की सराय होते हुए पहंचते हैं। यहां आम दिनों में कचौड़ी की दुकानें, ढकेलें लगी मिलती हैं। मगर, सोमवार को यह गायब थीं।
कचौड़ी तले जाने की खुशबू फिजा में नहीं घुली थी। यहां से आगे बढ़ने पर बारहद्वारी चौराहा पहुंचते हैं तो पुलिस के बैरिकेडिंग लगी मिलती है। पुलिस वाले लोगों को आगे महावीर गंज, अशोक नगर, रघुवीर पुरी, देहली गेट, ऊपरकोट की ओर जाने से रोक रहे थे। कुछ लोग पुलिस को कहते दिखे की वह दवा, किराना सामान लेने निकले हैं। इस पुलिस उनसे दवा के पर्चे मांगती है। यहां से पैदल-पैदल महावीर गंज होते हुए ऊपरकोट की ओर चलते-चलते 12 बज जाते हैं।
ऊपरकोट की ओर जाने के दौरान आमतौर पर यहां कपड़ा, फुटवियर की दुकानों पर भीड़ देखने को मिलती हैं, लेकिन यह दुकानें बंद थीं। 12:30 बजे करीब ऊपरकोट तक पहुंचते हैं। यहां मस्जिद के सामने हर रोज की तरह फुटपाथ पर दुकानें नहीं सजीं थीं। बाबरी मंडी की ओर जाने वाला रास्ता खामोश था। मस्जिद के सामने के देहली गेट की ओर बढऩे पर यहां पुलिस की बेरिकेटिंग फिर से लगी मिली। पुलिस लोगों को आने-जाने से रोकती नजर आई।
सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक
रेलवे रोड से लेकर ऊपरकोट का हाल
सुबह के ठीक 11 बज रहे थे। जीटी रोड से रेलवे रोड का हाल जानने को लेकर पैदल यात्रा शुरू होती है। यात्रा के पहले पड़ाव में रेलवे रोड से चलते हुए ढपरा रोड पर पहुंचते हैं। इस पूरे रोड पर हर ओर खामोशी थी। कुछ बाइकों पर इधर से उधर जा रहे थे। चालकों ने हेलमेट तो नहीं लेकिन मास्क जरूर पहन रखा था। यहां से हकीम की सराय होते हुए पहंचते हैं। यहां आम दिनों में कचौड़ी की दुकानें, ढकेलें लगी मिलती हैं। मगर, सोमवार को यह गायब थीं।
कचौड़ी तले जाने की खुशबू फिजा में नहीं घुली थी। यहां से आगे बढ़ने पर बारहद्वारी चौराहा पहुंचते हैं तो पुलिस के बैरिकेडिंग लगी मिलती है। पुलिस वाले लोगों को आगे महावीर गंज, अशोक नगर, रघुवीर पुरी, देहली गेट, ऊपरकोट की ओर जाने से रोक रहे थे। कुछ लोग पुलिस को कहते दिखे की वह दवा, किराना सामान लेने निकले हैं। इस पुलिस उनसे दवा के पर्चे मांगती है। यहां से पैदल-पैदल महावीर गंज होते हुए ऊपरकोट की ओर चलते-चलते 12 बज जाते हैं।
ऊपरकोट की ओर जाने के दौरान आमतौर पर यहां कपड़ा, फुटवियर की दुकानों पर भीड़ देखने को मिलती हैं, लेकिन यह दुकानें बंद थीं। 12ऱ्30 बजे करीब ऊपरकोट तक पहुंचते हैं। यहां मस्जिद के सामने हर रोज की तरह फुटपाथ पर दुकानें नहीं सजीं थीं। बाबरी मंडी की ओर जाने वाला रास्ता खामोश था। मस्जिद के सामने के देहली गेट की ओर बढऩे पर यहां पुलिस की बेरिकेटिंग फिर से लगी मिली। पुलिस लोगों को आने-जाने से रोकती नजर आई।
सुबह के ठीक 11 बज रहे थे। जीटी रोड से रेलवे रोड का हाल जानने को लेकर पैदल यात्रा शुरू होती है। यात्रा के पहले पड़ाव में रेलवे रोड से चलते हुए ढपरा रोड पर पहुंचते हैं। इस पूरे रोड पर हर ओर खामोशी थी। कुछ बाइकों पर इधर से उधर जा रहे थे। चालकों ने हेलमेट तो नहीं लेकिन मास्क जरूर पहन रखा था। यहां से हकीम की सराय होते हुए पहंचते हैं। यहां आम दिनों में कचौड़ी की दुकानें, ढकेलें लगी मिलती हैं। मगर, सोमवार को यह गायब थीं।
कचौड़ी तले जाने की खुशबू फिजा में नहीं घुली थी। यहां से आगे बढ़ने पर बारहद्वारी चौराहा पहुंचते हैं तो पुलिस के बैरिकेडिंग लगी मिलती है। पुलिस वाले लोगों को आगे महावीर गंज, अशोक नगर, रघुवीर पुरी, देहली गेट, ऊपरकोट की ओर जाने से रोक रहे थे। कुछ लोग पुलिस को कहते दिखे की वह दवा, किराना सामान लेने निकले हैं। इस पुलिस उनसे दवा के पर्चे मांगती है। यहां से पैदल-पैदल महावीर गंज होते हुए ऊपरकोट की ओर चलते-चलते 12 बज जाते हैं।
ऊपरकोट की ओर जाने के दौरान आमतौर पर यहां कपड़ा, फुटवियर की दुकानों पर भीड़ देखने को मिलती हैं, लेकिन यह दुकानें बंद थीं। 12ऱ्30 बजे करीब ऊपरकोट तक पहुंचते हैं। यहां मस्जिद के सामने हर रोज की तरह फुटपाथ पर दुकानें नहीं सजीं थीं। बाबरी मंडी की ओर जाने वाला रास्ता खामोश था। मस्जिद के सामने के देहली गेट की ओर बढऩे पर यहां पुलिस की बेरिकेटिंग फिर से लगी मिली। पुलिस लोगों को आने-जाने से रोकती नजर आई।
करीब डेढ़ बजे यहां की गलियों में बऽो क्त्रिस्केट खेलते और महिलाएं घरों के बाहर खड़ी होकर बातचीत में मशकूल नजर आती हैं। पुरुष भी कहीं तीन तो कहीं चार की संख्या में खड़े होकर बात करते नजर आए। यहां से निकलते हुए दो बजे तक देहली गेट चौराहा पर पहुंचते हैं। यहां थाने के सामने सिर्फ पुलिस खड़ी नजर आती है। चौराहा पर जाम के बजाए खामोशी के बीच पुलिस की बेरिकेटिंग नजर आई। पुलिस यहां भी लोगों को रोकने-टोकने और घरों में कैद रहने की अपील करती नजर आई।
दोपहर दो से चार बजे तक सासनी गेट इलाके का हाल
दोपहर ठीक दो बजे दुबे पड़ाव तिराहा से आगरा रोड पर चलते-चलते मदार गेट होते हुए हलवाई खाने पहुंचने पर देखने को मिलता है कि यहां मिष्ठान की दुकानें बंद थीं। बाजार कोरोना के जहर के ग्रस्त नजर आ रहा था। यहां से सराफा बाजार होते हुए जयगंज इलाके में पहुंचने के दौरान कई पड़ावों पर पुलिस नजर आई। कुछ बाइक सवार भी दिखे। मगर, यह लोग चेहरे पर एक चिंता लिए घूम रहे थे और बंद बाजार को निहार रहे थे।
करीब तीन बजे सासनी गेट चौराहा पर पहुंचने पर यह से आगरा और मथुरा को जाने वाले रास्ते सूने नजर आ रहे थे। आगरा रोड पर आगे बढ़ते हुए एडीए कालोनी में घुसने पर यहां भी चारों ओर सिर्फ सन्नाटा पसरा नजर आया।
दोपहर दो से चार बजे तक सासनी गेट इलाके का हाल
दोपहर ठीक दो बजे दुबे पड़ाव तिराहा से आगरा रोड पर चलते-चलते मदार गेट होते हुए हलवाई खाने पहुंचने पर देखने को मिलता है कि यहां मिष्ठान की दुकानें बंद थीं। बाजार कोरोना के जहर के ग्रस्त नजर आ रहा था। यहां से सराफा बाजार होते हुए जयगंज इलाके में पहुंचने के दौरान कई पड़ावों पर पुलिस नजर आई। कुछ बाइक सवार भी दिखे। मगर, यह लोग चेहरे पर एक चिंता लिए घूम रहे थे और बंद बाजार को निहार रहे थे।
करीब तीन बजे सासनी गेट चौराहा पर पहुंचने पर यह से आगरा और मथुरा को जाने वाले रास्ते सूने नजर आ रहे थे। आगरा रोड पर आगे बढ़ते हुए एडीए कालोनी में घुसने पर यहां भी चारों ओर सिर्फ सन्नाटा पसरा नजर आया।