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दुर्दांत भीका के शव की शिनाख्त पुलिस को नहीं मिला परिवार

Thu, 24 May 2018 02:10 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Thu, 24 May 2018 02:10 AM IST
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Police did not get the identity of the goddess Bhinda
मुठभेड के बाद मारे गए बदमाश की जानकारी देते एसएसपी अजय साहनी। - फोटो : Amar Ujala
यूपी-हरियाणा सीमा पर टप्पल क्षेत्र की यमुना पट्टी पर मंगलवार देर रात मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात छैमार गिरोह के सरगना भीका उर्फ अब्दुल करीम उर्फ मियां उर्फ बाकिल पुत्र रसीद के शव की शिनाख्त के लिए बुधवार को काफी तलाश के बावजूद पुलिस को उसके परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। हालांकि संभल के गांव चिनियावली मढ़ैया के प्रधान ने उसकी पहचान कर ली है। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद भीका का शव पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह हाथरस में डकैती डालने के बाद हरियाणा निकल जाता।
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भीका के अपराध करने का तरीका इतना शातिराना था कि एक दशक तक न उसकी पहचान हो पाई और न वह पकड़ा जा सका था। हालांकि यूपी के अलावा उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा में उसने अनेक गंभीर अपराध किए। उस पर पचास हजार का इनाम घोषित था। पुलिस का कहना है कि वह 100 से अधिक हत्याओं व इतनी ही डकैतियों में शामिल था। इसीलिए पुलिस कई अनसुलझी डकैतियों को भीका गैंग से जोड़कर जांच की बात कह रही है। उसकी मौत को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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टप्पल क्षेत्र के घरबरा व महाराजगढ़ गांव के यमुना कटरी के जंगल में हुई मुठभेड़ में रात करीब डेढ़ बजे छैमार गैंग का सरगना भीका निवासी चिनियावली मढ़ैया, संभल (हाल पता दानिशपुर डेरा थाना दादों) सीने में दो गोलियां लगने पर जख्मी हुआ था। इसके बाद रात करीब ढाई बजे जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित किया गया। इससे पहले खैर सीएचसी पर इलाज दिया गया, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था। मुठभेड़ में उसके गैंग के चार अन्य साथी यमुना कटरी में भागने में सफल रहे। भीका के गैंग से 18/19 मई की रात दादों क्षेत्र के सांकरा की गंगा कटरी में पुलिस से मुठभेड़ हुई थी, उस दौरान भीका के तीन साथी मारे गए थे। उस समय भीका अपने अन्य साथियों सहित भागने में सफल रहा था।
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यह गैंग कासगंज के अमापुर व सहावर में हुईं चार हत्यायुक्त डकैतियों में प्रकाश में आया था। 18/19 मई की रात गैंग को हाथरस में किसी बड़ी डकैती को अंजाम देना था। उसकी रेकी व प्लानिंग भीका ने कर रखी थी। अगर मुठभेड़ न होती तो हाथरस की डकैती तय थी। इधर, बुधवार दोपहर पोस्टमार्टम में उसके सीने में दो गोलियां आर-पार होने की पुष्टि हुई है। देर शाम तक पुलिस भीका के परिजनों की खोज में लगी रही।

भीका के ग्राम प्रधान की मौजूदगी में शव सुपुर्द-ए-खाक
टप्पल में हुई मुठभेड़ में मारे गए छैमार गैंग के सरगना भीका के शव को उसके गांव चिनियावली के प्रधान नूर मोहम्मद की मौजूदगी में बुधवार देर रात टप्पल के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इस दौरान परिवार का कोई सदस्य साथ नहीं आया। प्रधान की मानें तो गांव की मढ़ैया से पिछले करीब तीन साल से छैमार गायब हैं। बीच में कभी कोई एकाध सदस्य जरूर आता रहा है। मगर कुछ अता-पता नहीं है।

इस मुठभेड़ में भीका की बेटी का आधार मिलने पर पुलिस टीम आधार कार्ड लेकर चिनियावली संभल गई थी। वहां प्रधान ने उसे पहचान लिया और स्वीकारा कि करीब तीन साल पहले उसने यह आधार कार्ड भीका के कहने पर बनवाया था। इसके बाद से उन लोगों का पता नहीं है। पुलिस टीम प्रधान को यहां देर शाम टप्पल लेकर पहुंची। यहां लाने का मकसद शव की पहचान कराना था। देर रात करीब 9 बजे प्रधान नूरमोहम्मद अपने साथ एक ग्रामीण को लेकर टप्पल पहुंचे। इस पर शव को जिला मुख्यालय से टप्पल पहुंचाया गया। जहां पहचान के बाद उसको टप्पल कब्रिस्तान में ही दफन करा दिया गया। इंस्पेक्टर टप्पल संजय पांडेय के अनुसार प्रधान ने बताया कि यह लोग पेशेवर अपराधी थे। इसलिए गांव के लोगों से ज्यादा नाता नहीं रहता था। हां, यह अपने साथ गधे व घोड़े जरूर पालते हैं, जिनकी मदद से अपना सामान इधर से उधर शिफ्ट करते हैं।


मरने से पहले दीं कई जानकारियां
मंगलवार रात सर्विलांस के माध्यम से इनपुट था कि भीका गैंग के साथ यमुना की कटरी में छिपा है और रात में हरियाणा की ओर भागेगा। इस पर टप्पल पुलिस व अन्य टीमें घेराबंदी में लगी रहीं। रात करीब 11 बजे यह गिरोह रपटा पुल के आसपास था कि मुठभेड़ में भीका जख्मी हो गया था। इस दौरान बदमाशों की फायरिंग में दो गोलियां सर्विलांस के सिपाही एमपी सिंह व सिपाही विजय की बुलेट प्रूफ जैकेट में लगीं। बाद में घायल भीका ने जिला अस्पताल आते समय सहावर व अमापुर की घटनाएं स्वीकार करते हुए अपने गिरोह के विषय में कई जानकारियां पुलिस को दीं। उन जानकारियों के आधार पर पुलिस अब उसके अन्य साथियों तक पहुंचने को प्रयासरत है। 
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