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सरकार हिलाने में जुटे नौशाद-मुस्तकीम थे सजायाफ्ता अपराधी
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Tue, 25 Sep 2018 01:08 AM IST
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मुठभेड़ में मारे गए अपराधियों का फोटो दिखाते एसएसपी।
- फोटो : Rupesh
हरदुआगंज मुठभेड़ के बाद सियासी सवालों से घिरी पुलिस ने दिन-रात एक कर मुठभेड़ में मारे गए दोनों अपराधियों मुस्तकीम-नौशाद का लंबा-चौड़ा क्राइम रिकार्ड खोज ही निकाला। मारे गए दोनों अपराधी और उनके परिवारों से जुड़े सदस्य घुमंतू जाति के पेशेवर अपराधी हैं और उन्हें कई मुकदमों में अदालतों से सजा भी हो चुकी हैं। खास बात है कि यह नाम पते बदलकर अब तक अपराध करते आए हैं।
इन दोनों व इनके परिजनों को हापुड़ के उस दूध व्यापारी ने यहां आकर पहचाना है, जिसे लूट के दौरान गोली मारी गई थी और लंबे समय तक इलाज के बाद उसके मुकदमे में इन अपराधियों को सजा हुई थी। इसी गैंग ने रामपुर के एक ब्लाक प्रमुख की हत्या कर पिस्टल तक लूटी थी और इसी परिवार के दो सदस्य रुड़की में मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।
इनके घर की तलाशी में पुलिस की चार वर्दियां भी मिली हैं। यह सभी पश्चिम बंगला के पुरुलिया जिले के ही बलरामपुर रहने वाले हैं। इस बात की पुष्टि वहां की पुलिस ने भी इनके परिजनों से मुलाकात के बाद कर दी। यहां तक कि पुलिस ने इनके जमानतदारों को भी खोज निकाला है।
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छर्रा में फर्जी मकान नंबर पर बने फर्जी आधार कार्ड और वोट
एसएसपी अजय कुमार साहनी ने सोमवार को पुलिस कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान मुठभेड़ के बाद विवेचना में अब तक इनके विषय में मिली जानकारियों को साझा किया। एसएसपी के अनुसार छर्रा में यह लोग जिन सात मकानों में किराये पर रहे, उनके बजाय नगर पंचायत के वार्ड नंबर 3 शिवपुरी आंशिक भाग संख्या छह के मकान नंबर 205 पर नौशाद व मुस्तकीम के अलावा उनके परिवार के करीब 18 सदस्यों के वोट क्रम संख्या 462 से 479 तक वर्ष 2017 के नगर निकाय चुनाव में बने। मतदाता सूची में जिस मकान नंबर पर उनके वोट बने हैं, उस नंबर पर कोई मकान मौके पर है ही नहीं। खास बात है कि इस वोटर लिस्ट में मुस्तकीम की उम्र 19 व नौशाद की 18 वर्ष दर्शायी गई है, जबकि हकीकत में यह दोनों 25 से 35 की उम्र तक के हैं। इसी तरह उनका आधार कार्ड भी बना है। अंदेशा है कि यह निकाय चुनाव से पहले किसी पार्षद प्रत्याशी की मदद से बीएलओ ने बनवाया होगा। इसे लेकर बीएलओ को जांच का हिस्सा बनाया गया है। किसने यह वोट बनवाए थे। इसकी जांच जिला प्रशासन की मदद से कराई जा रही है।
पुरुलिया की बलरामपुर पुलिस बोली, हो सकते हैं बांग्लादेशी
एसएसपी के अनुसार जांच में यह तय हो गया कि यह सभी लोग विभिन्न जनपदों में घुमंतू जाति की तरह नाम पते बदलकर रहते आए हैं और कहीं भी अपराध के दौरान पकड़े जाने पर गलत नाम पते बताकर जेल जाते हैं। फिर वहां से ठिकाना बदल लेते हैं। जब सर्विलांस की मदद से इनके विषय में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया तक पुलिस पहुंची तो वहां के बलरामपुर थाना पुलिस संपर्क किया गया। वहां की पुलिस ने जांच के बाद इस बात की तस्दीक की है कि मुस्तकीम व नौशाद परिवार के काफी लोग अभी वहां रह रहे हैं। वहां की पुलिस ने यहां तक कहा कि यह कहना बेहद मुश्किल है कि यह लोग भारतीय हैं या बांग्लादेशी हैं, क्योंकि वहां 50 फीसदी लोग इसी तरह के हैं, जिनके मूल निवास की ठोस जानकारी पश्चिम बंगला प्रशासन तक को नहीं है। सभी की बोली भाषा मिलती जुलती होने के कारण प्रशासन स्पष्ट नहीं कर पाया है। इस मौके पर एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव, एसपी देहात मणीलाल पाटीदार, एसपी क्राइम आशुतोष द्विवेदी, सीओ प्रथम विशाल पांडेय आदि मौजूद रहे।
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इन दोनों व इनके परिजनों को हापुड़ के उस दूध व्यापारी ने यहां आकर पहचाना है, जिसे लूट के दौरान गोली मारी गई थी और लंबे समय तक इलाज के बाद उसके मुकदमे में इन अपराधियों को सजा हुई थी। इसी गैंग ने रामपुर के एक ब्लाक प्रमुख की हत्या कर पिस्टल तक लूटी थी और इसी परिवार के दो सदस्य रुड़की में मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।
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इनके घर की तलाशी में पुलिस की चार वर्दियां भी मिली हैं। यह सभी पश्चिम बंगला के पुरुलिया जिले के ही बलरामपुर रहने वाले हैं। इस बात की पुष्टि वहां की पुलिस ने भी इनके परिजनों से मुलाकात के बाद कर दी। यहां तक कि पुलिस ने इनके जमानतदारों को भी खोज निकाला है।
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छर्रा में फर्जी मकान नंबर पर बने फर्जी आधार कार्ड और वोट
एसएसपी अजय कुमार साहनी ने सोमवार को पुलिस कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान मुठभेड़ के बाद विवेचना में अब तक इनके विषय में मिली जानकारियों को साझा किया। एसएसपी के अनुसार छर्रा में यह लोग जिन सात मकानों में किराये पर रहे, उनके बजाय नगर पंचायत के वार्ड नंबर 3 शिवपुरी आंशिक भाग संख्या छह के मकान नंबर 205 पर नौशाद व मुस्तकीम के अलावा उनके परिवार के करीब 18 सदस्यों के वोट क्रम संख्या 462 से 479 तक वर्ष 2017 के नगर निकाय चुनाव में बने। मतदाता सूची में जिस मकान नंबर पर उनके वोट बने हैं, उस नंबर पर कोई मकान मौके पर है ही नहीं। खास बात है कि इस वोटर लिस्ट में मुस्तकीम की उम्र 19 व नौशाद की 18 वर्ष दर्शायी गई है, जबकि हकीकत में यह दोनों 25 से 35 की उम्र तक के हैं। इसी तरह उनका आधार कार्ड भी बना है। अंदेशा है कि यह निकाय चुनाव से पहले किसी पार्षद प्रत्याशी की मदद से बीएलओ ने बनवाया होगा। इसे लेकर बीएलओ को जांच का हिस्सा बनाया गया है। किसने यह वोट बनवाए थे। इसकी जांच जिला प्रशासन की मदद से कराई जा रही है।
पुरुलिया की बलरामपुर पुलिस बोली, हो सकते हैं बांग्लादेशी
एसएसपी के अनुसार जांच में यह तय हो गया कि यह सभी लोग विभिन्न जनपदों में घुमंतू जाति की तरह नाम पते बदलकर रहते आए हैं और कहीं भी अपराध के दौरान पकड़े जाने पर गलत नाम पते बताकर जेल जाते हैं। फिर वहां से ठिकाना बदल लेते हैं। जब सर्विलांस की मदद से इनके विषय में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया तक पुलिस पहुंची तो वहां के बलरामपुर थाना पुलिस संपर्क किया गया। वहां की पुलिस ने जांच के बाद इस बात की तस्दीक की है कि मुस्तकीम व नौशाद परिवार के काफी लोग अभी वहां रह रहे हैं। वहां की पुलिस ने यहां तक कहा कि यह कहना बेहद मुश्किल है कि यह लोग भारतीय हैं या बांग्लादेशी हैं, क्योंकि वहां 50 फीसदी लोग इसी तरह के हैं, जिनके मूल निवास की ठोस जानकारी पश्चिम बंगला प्रशासन तक को नहीं है। सभी की बोली भाषा मिलती जुलती होने के कारण प्रशासन स्पष्ट नहीं कर पाया है। इस मौके पर एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव, एसपी देहात मणीलाल पाटीदार, एसपी क्राइम आशुतोष द्विवेदी, सीओ प्रथम विशाल पांडेय आदि मौजूद रहे।