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खुर्रमपुर कांड : घायल रामवीर की मौत के बाद अलीगढ़ में प्रदर्शन, लगाया जाम
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Fri, 10 Nov 2017 02:22 AM IST
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अलीगढ़ के एटा चुंगी चौराहे पर जाम लगाकर हंगामा करते लोग।
- फोटो : Amar Ujala
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विजयगढ़ थानाक्षेत्र के गांव खुर्रमपुर के मजरा नगला मेवाती में शौचालय को लेकर बीते शनिवार को हुए सांप्रदायिक बवाल में घायल हिंदू पक्ष के मुखिया रामवीर शर्मा की बुधवार तड़के मौत हो गई। इससे यह प्रकरण फिर गरमा गया। सुबह से ही पोस्टमार्टम केंद्र पर ग्रामीणों की भीड़ जमा होने लगी। उनके समर्थन में भाजपा के तीन विधायक, पूर्व मेयर व मेयर प्रत्याशी सहित कई वरिष्ठ नेता आ जुटे।
मांगों को पूरा करने को लेकर लोगों ने शव को एटा चुंगी चौराहे पर रख जाम लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद शाम चार बजे शव का अलीगढ़ में ही अंतिम संस्कार किया गया।
दूसरी ओर रामवीर की मौत की सूचना मिलते ही नगला मेवाती के लोग गांव छोड़ कर कहीं चले गए। घरों में उनके पशुओं को चारा-पानी तक देने वाला कोई मौजूद नहीं है। खुर्रमपुर में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। दोनों जगह बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
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खुर्रमपुर के माजरा नगला मेवाती में बीते शनिवार को दो समुदायों के लोगों में एक शौचालय तोड़ने को लेकर भिड़ंत हो गई थी। मस्जिद के पास बने इस शौचालय को तोड़ने पहुंचे हिंदू पक्ष का जब विरोध हुआ तो इस पक्ष ने फायरिंग कर दी। बचाव में मुस्लिम पक्ष ने भी हमला बोला था। इस बवाल में शनिवार को मौके पर हसीन पुत्र बुंदू खां की मौत हो गई थी, जबकि दूसरे पक्ष के मुखिया रामवीर शर्मा (50) सिर में गंभीर चोटें आने से जख्मी हो गए थे।
शहर के क्वार्सी चौराहे के पास स्थित एक ट्रामा सेंटर में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार तड़के करीब पांच बजे रामवीर की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। चूंकि गांव में तनाव कायम है इसलिए शव के वहां जाने से प्रशासन को तनाव बढ़ने की आशंका थी।
रामवीर शर्मा करीब एक दशक से क्वार्सी क्षेत्र के जीटी रोड स्थित प्रद्युम्न विहार में मकान बनाकर परिवार सहित रह रहे थे। इसलिए पुलिस ने आनन-फानन तय किया कि पोस्टमार्टम के बाद शव को शहर वाले आवास पर ले जाकर यहीं से अंतिम संस्कार करा दिया जाए। पोस्टमार्टम केंद्र पर पहुंचे एडीएम सिटी, एसपी सिटी ने वहां मौजूद परिजनों व भाजपा नेताओं के सामने यह प्रस्ताव रखा तो सहमति भी बन गई। दोपहर करीब 11.30 बजे पोस्टमार्टम के बाद शव प्रद्युम्न विहार पहुंच गया। मगर शव के यहां पहुंचते ही माहौल बदल गया।
यहां शर्मा पक्ष के गुस्साए लोग शव के अंतिम संस्कार से पहले खेत में बने शौचालय को तोड़ने की मांग करने लगे। इस पर यहां मौजूद अधिकारी उच्चाधिकारियों से फोन पर बात करने लगे। बाद में उन्होंने लोगों को समझाने का प्रयास किया, मगर वे नहीं माने। सूचना पाकर पहुंचे भाजपाइयों ने हस्तक्षेप किया तो लोगों ने उनके सामने भी अपनी मांग रख दी। लोगों ने कहा कि अगर शौचालय नहीं टूटा तो विवाद बढ़ सकता है।
इन लोगों ने बीते शनिवार को हुए विवाद में शर्मा पक्ष पर झूठा मुकदमा दर्ज होने और मुस्लिम पक्ष के खिलाफ कार्रवाई न होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विजयगढ़ पुलिस द्वारा लापरवाही बरतने से विवाद बढ़ा है। उन्होंने शौचालय तोड़वाने, मुकदमा निरस्त कराने और विजयगढ़ थाना प्रभारी, एसडीएम द्वारा दिए गए आदेश का अनुपालन न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। इस पर भाजपाइयों ने एडीएम सिटी व एसपी सिटी से वार्ता की।
अधिकारी अंतिम संस्कार से पहले शौचालय तोड़वाने के लिए राजी नहीं हुए तो लोग मानव उपकार संस्था से मंगाए गए शव वाहन में शव रखकर गांव जाने के लिए तैयार हो गए। इस पर एडीएम सिटी व एसपी सिटी ने भाजपाइयों व प्रमुख रिश्तेदारों से फिर वार्ता की। इस दौरान समस्या का हल न होता देख फ्रीजर लगी गाड़ी में धक्का मारकर पैदल ही लोग शव को गांव ले जाने लगे। इससे वहां भगदड़ मच गई। पुलिस ने शव को एटा चुंगी पर रोक लिया। इस पर परिजन शव को सड़क पर रखकर चारों ओर बैठ गए और जाम लगा दिया। पुलिस व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
इस पर डीएम ऋषिकेश भास्कर याशोद व एसएसपी राजेश कुमार पांडेय वहां पहुंच गए। उन्होंने लोगों को समझाया। करीब एक घंटे तक अधिकारियों व परिजनों में तर्क-वितर्क होते रहे। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष चौ. देवराज सिंह, भाजपा के् तीन विधायकों संजीव राजा, अनिल पाराशर, रवेंद्रपाल सिंह, भाजपा के मेयर प्रत्याशी राजीव अग्रवाल, निवर्तमान मेयर शकुंतला भारती ने डीएम व एसएसपी से वार्ता की। भाजपा जिलाध्यक्ष ने परिजनों की सभी मांगों को पूरा करने के अलावा पीड़ित परिवार को 50 लाख का मुआवजा देने के लिए कहा।
डीएम व एसएसपी ने उनकी मांगों को मानते हुए एक सप्ताह में पूरा करने का भरोसा दिया है। इस पर मामला शांत हो गया। इसके बाद शाम चार बजे पुलिस की मौजूदगी में शव को शहर के नौरंगाबाद स्थित शमशान गृह ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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मांगों को पूरा करने को लेकर लोगों ने शव को एटा चुंगी चौराहे पर रख जाम लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद शाम चार बजे शव का अलीगढ़ में ही अंतिम संस्कार किया गया।
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दूसरी ओर रामवीर की मौत की सूचना मिलते ही नगला मेवाती के लोग गांव छोड़ कर कहीं चले गए। घरों में उनके पशुओं को चारा-पानी तक देने वाला कोई मौजूद नहीं है। खुर्रमपुर में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। दोनों जगह बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
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खुर्रमपुर के माजरा नगला मेवाती में बीते शनिवार को दो समुदायों के लोगों में एक शौचालय तोड़ने को लेकर भिड़ंत हो गई थी। मस्जिद के पास बने इस शौचालय को तोड़ने पहुंचे हिंदू पक्ष का जब विरोध हुआ तो इस पक्ष ने फायरिंग कर दी। बचाव में मुस्लिम पक्ष ने भी हमला बोला था। इस बवाल में शनिवार को मौके पर हसीन पुत्र बुंदू खां की मौत हो गई थी, जबकि दूसरे पक्ष के मुखिया रामवीर शर्मा (50) सिर में गंभीर चोटें आने से जख्मी हो गए थे।
शहर के क्वार्सी चौराहे के पास स्थित एक ट्रामा सेंटर में उनका इलाज चल रहा था। बुधवार तड़के करीब पांच बजे रामवीर की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। चूंकि गांव में तनाव कायम है इसलिए शव के वहां जाने से प्रशासन को तनाव बढ़ने की आशंका थी।
रामवीर शर्मा करीब एक दशक से क्वार्सी क्षेत्र के जीटी रोड स्थित प्रद्युम्न विहार में मकान बनाकर परिवार सहित रह रहे थे। इसलिए पुलिस ने आनन-फानन तय किया कि पोस्टमार्टम के बाद शव को शहर वाले आवास पर ले जाकर यहीं से अंतिम संस्कार करा दिया जाए। पोस्टमार्टम केंद्र पर पहुंचे एडीएम सिटी, एसपी सिटी ने वहां मौजूद परिजनों व भाजपा नेताओं के सामने यह प्रस्ताव रखा तो सहमति भी बन गई। दोपहर करीब 11.30 बजे पोस्टमार्टम के बाद शव प्रद्युम्न विहार पहुंच गया। मगर शव के यहां पहुंचते ही माहौल बदल गया।
यहां शर्मा पक्ष के गुस्साए लोग शव के अंतिम संस्कार से पहले खेत में बने शौचालय को तोड़ने की मांग करने लगे। इस पर यहां मौजूद अधिकारी उच्चाधिकारियों से फोन पर बात करने लगे। बाद में उन्होंने लोगों को समझाने का प्रयास किया, मगर वे नहीं माने। सूचना पाकर पहुंचे भाजपाइयों ने हस्तक्षेप किया तो लोगों ने उनके सामने भी अपनी मांग रख दी। लोगों ने कहा कि अगर शौचालय नहीं टूटा तो विवाद बढ़ सकता है।
इन लोगों ने बीते शनिवार को हुए विवाद में शर्मा पक्ष पर झूठा मुकदमा दर्ज होने और मुस्लिम पक्ष के खिलाफ कार्रवाई न होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विजयगढ़ पुलिस द्वारा लापरवाही बरतने से विवाद बढ़ा है। उन्होंने शौचालय तोड़वाने, मुकदमा निरस्त कराने और विजयगढ़ थाना प्रभारी, एसडीएम द्वारा दिए गए आदेश का अनुपालन न करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। इस पर भाजपाइयों ने एडीएम सिटी व एसपी सिटी से वार्ता की।
अधिकारी अंतिम संस्कार से पहले शौचालय तोड़वाने के लिए राजी नहीं हुए तो लोग मानव उपकार संस्था से मंगाए गए शव वाहन में शव रखकर गांव जाने के लिए तैयार हो गए। इस पर एडीएम सिटी व एसपी सिटी ने भाजपाइयों व प्रमुख रिश्तेदारों से फिर वार्ता की। इस दौरान समस्या का हल न होता देख फ्रीजर लगी गाड़ी में धक्का मारकर पैदल ही लोग शव को गांव ले जाने लगे। इससे वहां भगदड़ मच गई। पुलिस ने शव को एटा चुंगी पर रोक लिया। इस पर परिजन शव को सड़क पर रखकर चारों ओर बैठ गए और जाम लगा दिया। पुलिस व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
इस पर डीएम ऋषिकेश भास्कर याशोद व एसएसपी राजेश कुमार पांडेय वहां पहुंच गए। उन्होंने लोगों को समझाया। करीब एक घंटे तक अधिकारियों व परिजनों में तर्क-वितर्क होते रहे। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष चौ. देवराज सिंह, भाजपा के् तीन विधायकों संजीव राजा, अनिल पाराशर, रवेंद्रपाल सिंह, भाजपा के मेयर प्रत्याशी राजीव अग्रवाल, निवर्तमान मेयर शकुंतला भारती ने डीएम व एसएसपी से वार्ता की। भाजपा जिलाध्यक्ष ने परिजनों की सभी मांगों को पूरा करने के अलावा पीड़ित परिवार को 50 लाख का मुआवजा देने के लिए कहा।
डीएम व एसएसपी ने उनकी मांगों को मानते हुए एक सप्ताह में पूरा करने का भरोसा दिया है। इस पर मामला शांत हो गया। इसके बाद शाम चार बजे पुलिस की मौजूदगी में शव को शहर के नौरंगाबाद स्थित शमशान गृह ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार कर दिया गया।