आयकर छापे में 12 करोड़ की ‘ब्लैक मनी’ सरेंडर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
34 घंटे तक चला दोनों सर्राफा कारोबारियों के यहां आयकर सर्वे
आयकर छापे में 12 करोड़ की ‘ब्लैक मनी’ सरेंडर
अलीगढ़ (ब्यूरो)। महानगर के दो प्रमुख सर्राफा कारोबारियों ने आयकर छापे में 6-6 करोड़ (कुल 12 करोड़) की ऐसी रकम सरेंडर की है, जिसका उनके पास कोई लेखा-जोखा नहीं था। लगातार 34 घंटे तक चले इस सर्वे में आयकर टीम को कारोबारियों के छह ठिकानों पर शुरुआती दौर में ही ऐसे सुराग मिल गए थे, जिनके दोनों कारोबारी जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद सर्वे में सख्ती बरतना शुरू हुआ तो दोनों कारोबारी सरेंडर को मजबूर हो गए। दोनों पर तगड़ा जुर्माना तय कर दिया गया और इस जमा करने के लिए 15 दिन का समय भी दिया गया है। मगर अभी पिछले 8 साल के आयकर रिटर्न का भी सत्यापन होगा। इसके बाद दोनों पर अग्रिम कार्रवाई होगी।
आयकर के अधिकारिक सूत्रों पर विश्वास करें तो यह छापा आयकर के प्रधान निदेशक जांच (कानपुर) दिनेश कुमार झा के निर्देश पर उप निदेशक जांच सतीश कुमार राजौरिया की अगुवाई वाली टीम यहां मारने आई थी। इसमें कानपुर से ही सहायक आयकर अधिकारी ज्योत्सना के अलावा आगरा व हाथरस के भी कुछ अधिकारी शामिल थे। कुल सात टीमों ने रेलवे रोड के नामचीन राठी ज्वैलर्स शोरूम, स्वामी राजीव राठी के मोहल्ला बराई स्थित घर और दिनेश ज्वैलर्स का शोरूम, स्वामी दिनेश गुप्ता का जापान हाउस स्थित आवास, दिनेश ज्वैलर्स से जुड़े ज्ञान मान सरोवर विमल कुमार गुप्ता व अनूप कुमार गुप्ता के यहां सर्वे की, जबकि एसवी ज्वैलर्स के यहां मारपीट के चलते सर्वे नहीं हो सका। बुधवार सुबह सात बजे से शुरू हुआ यह सर्वे सबसे पहले दो कारोबारियों के यहां पूरा हो गया। इसके बाद बृहस्पतिवार सुबह तक दोनों शोरूमों में भी सर्वे पूरा हो गया। मगर दोनों के घरों पर सर्वे बृहस्पतिवार शाम पांच बजे तक चला। अधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस दौरान एक के यहां से बोरों में बंद नोट, शेयर में निवेश और भारी मुनाफे का कोई लेखा-जोखा न होना, भारी मात्रा में फर्जी एंट्री मिली हैं। इसी तरह दूसरे के यहां बिना लाइसेंस के साहूकारी धंधे से जुड़ी रकम मिली है, जब सख्ती शुरू हुई तो बृहस्पतिवार दोपहर होते होते दोनों ने कुल 6-6 करोड़ की काली कमाई स्वीकारते हुए सरेंडर कर दिया। अब नियमानुसार दो साल के असल कारोबार पर 30 प्रतिशत टैक्स व 24 प्रतिशत ब्याज का जुर्माना बतौर असिस्मेंट तय किया गया है। जमा करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। पिछले आठ साल के रिटर्न का अभी सत्यापन होना बाकी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस विषय में असिस्टेंट कमिश्रर सर्च विंग अजय कुमार इतना ही बताते हैं कि करोड़ों रुपये का हेरफेर मिला है, जिस पर असिस्मेंट नियमानुसार तय किया गया है। आगे जांच जारी रहेगी।