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दुष्कर्म के मामलों में डीएनए सैंपल लेने में डॉक्टर लापरवाह : कोर्ट
Mon, 12 Oct 2020 09:05 PM IST
राजेश सिंह
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: राजेश सिंह
Updated Mon, 12 Oct 2020 09:05 PM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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दुष्कर्म के मामलों में गिरफ्तार होकर आने वाले आरोपियों के मेडिकल परीक्षण के दौरान डीएनए सैंपल लेने में जिले के डॉक्टरों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। इसे लेकर अदालत ने आपत्ति जताते हुए सीएमओ को निर्देशित किया है कि प्रत्येक मामले में मेडिकल परीक्षण के दौरान ही आरोपी का डीएनए सैंपल संकलित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। ताकि विवेचना में देरी न हो। अदालत ने यह आदेश खैर के ताजा दुष्कर्म मामले में विवेचक द्वारा आरोपी का डीएनए सैंपल लेने की अनुमति देने के दौरान दिया है।
खैर में पिछले सप्ताह हुए नाबलिग बच्ची से दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आरोपी अजीत कुमार का डीएनए सैंपल कराने की अनुमति विवेचक स्तर से एडीजे-विशेष पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश नंद प्रताप ओझा के न्यायालय से मांगी गई।
इस मामले में विवेचक ने अपनी अनुमति आवेदन में उल्लेख किया कि 3 अक्तूबर की घटना में 4 अक्तूबर को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जिसके मेडिकल परीक्षण के दौरान डीएनए के लिए सैंपल संकलित नहीं किए गए हैं। इसलिए आरोपी का डीएनए परीक्षण कराने के लिए अनुमति प्रदान की जाए।
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पॉक्सो न्यायालय के विशेष लोक अभियोजक महेश चंद्र के अनुसार अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इस तरह के प्रकरणों में आरोपी के मेडिकल परीक्षण के समय ही डॉक्टर द्वारा डीएनए सैंपल संकलित किया जाना चाहिए।
मगर यहां ऐसा नहीं किया जा रहा है, जिससे विवेचना में देरी होती है और विवेचक द्वारा अलग से अनुमति लेकर यह प्रक्रिया कराई जाती है। न्यायालय ने सीएमओ को निर्देशित किया है कि नियमानुसार मेडिकल परीक्षण के समय यह व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। साथ में आरोपी अजीत की सैंपलिंग कराने की अनुमति दी है। इस संबंध में सीएमओ व जेल अधीक्षक को आदेश भेजा गया है।
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खैर में पिछले सप्ताह हुए नाबलिग बच्ची से दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आरोपी अजीत कुमार का डीएनए सैंपल कराने की अनुमति विवेचक स्तर से एडीजे-विशेष पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश नंद प्रताप ओझा के न्यायालय से मांगी गई।
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इस मामले में विवेचक ने अपनी अनुमति आवेदन में उल्लेख किया कि 3 अक्तूबर की घटना में 4 अक्तूबर को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जिसके मेडिकल परीक्षण के दौरान डीएनए के लिए सैंपल संकलित नहीं किए गए हैं। इसलिए आरोपी का डीएनए परीक्षण कराने के लिए अनुमति प्रदान की जाए।
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पॉक्सो न्यायालय के विशेष लोक अभियोजक महेश चंद्र के अनुसार अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इस तरह के प्रकरणों में आरोपी के मेडिकल परीक्षण के समय ही डॉक्टर द्वारा डीएनए सैंपल संकलित किया जाना चाहिए।
मगर यहां ऐसा नहीं किया जा रहा है, जिससे विवेचना में देरी होती है और विवेचक द्वारा अलग से अनुमति लेकर यह प्रक्रिया कराई जाती है। न्यायालय ने सीएमओ को निर्देशित किया है कि नियमानुसार मेडिकल परीक्षण के समय यह व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। साथ में आरोपी अजीत की सैंपलिंग कराने की अनुमति दी है। इस संबंध में सीएमओ व जेल अधीक्षक को आदेश भेजा गया है।