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एसडीएम से लॉ छात्रा तक बमुश्किल पहुंची युवती
Updated Sun, 01 Jul 2018 02:16 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
कानूनगो द्वारा संदेह जताने के बाद आईएएस/एसडीएम कोल जोगिंदर सिंह ममतेश पर पूरा होमवर्क करके बैठे थे। उनके बैचमेट इन दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर में ही हैं। जब वह उनके सामने आई तब भी युवती ने अपनी सही पहचान नहीं बताई। बाद में पुलिस को भी काफी देर तक चकरघिन्नी बनाया। बाद में जब गांव के प्रधान से पुष्टि हो गई तो वह टूटी और उसने अपनी सच्चाई बताई। खास बात है कि संदेह होने के बाद से ही एसडीएम खुद अपने स्तर से इस युवती की निगरानी करा रहे थे। लगातार यह नजर रखी जा रही थी कि कहीं वह किसी अन्य माध्यम से अपना काम न करा ले। मगर वह इसमें सफल नहीं हुई।
वाकया इस तरह हुआ कि एसडीएम ने ममतेश के विषय में अपने परिचित से पूछ लिया था। वहां से पता चला कि मुजफ्फरपुर में दो एसडीएम हैं। एक एसडीएम पूर्व कुंदन सिंह और दूसरे एसडीएम पश्चिम प्रियदर्शी। इस पर सामने आने पर जब एसडीएम ने ममतेश को यह जवाब दिया तो उसने तत्काल बताया कि अब उसकी तैनाती अररिया जिले में है।
इसके बाद जब पुलिस उसके सामने आ गई तो उसने बताया कि वह 2016 बैच की बीपीएस अफसर है। ट्रेनिंग के बाद उसे 22 जुलाई 2017 को ज्वाइनिंग करनी थी। इससे पहले 3 जुलाई को उसका एक्सीडेंट हो गया। तब से वह मेडिकल अवकाश पर है। अब पूर्ण स्वस्थ होने के बाद वह नए सिरे से ज्वाइन करेगी। इसके बाद जब उससे पता पूछा तो वह पहले अपना पता इगलास बताने लगी।
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बाद में जब सख्ती हुई तो उसने अपना सही पता बताया। बाद में उसके गांव के प्रधान अशोक चौधरी से पुलिस ने संपर्क किया तो उसने युवती के गांव का होने की पुष्टि करते हुए बताया कि वह काफी समय से सारसौल इलाके में किराये पर अपने किसी दोस्त के साथ रहती है। वहां क्या कर रही है, इस विषय में जानकारी नहीं है। इसके बाद युवती का भेद खुला तो वह टूट गई और स्वीकारा कि इलाहाबाद से लॉ कर रही है।
कॉलोनी में भी खुद को बता रखा था एसडीएम
पूछताछ में त्रिपुरारी शर्मा ने बताया कि उनके एक रिश्तेदार ममतेश के बगल में ही रहते हैं। ममतेश ने कॉलोनी में भी खुद को एसडीएम बता रखा है। हमें अपनी रिश्तेदारी में देवसैनी में जमीन मिली है और उसमें विवाद है। उस समस्या के समाधान का जिक्र जब हमने अपने रिश्तेदार से किया तो उन्होंने ममतेश की मदद से समाधान का भरोसा दिलाया। बस वहीं से हम ममतेश के संपर्क में आए। इससे ज्यादा हम कुछ नहीं जानते। इंस्पेक्टर ने बताया कि इस बात का सत्यापन होने के बाद उन्हें छोड़ा गया है।
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कानूनगो द्वारा संदेह जताने के बाद आईएएस/एसडीएम कोल जोगिंदर सिंह ममतेश पर पूरा होमवर्क करके बैठे थे। उनके बैचमेट इन दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर में ही हैं। जब वह उनके सामने आई तब भी युवती ने अपनी सही पहचान नहीं बताई। बाद में पुलिस को भी काफी देर तक चकरघिन्नी बनाया। बाद में जब गांव के प्रधान से पुष्टि हो गई तो वह टूटी और उसने अपनी सच्चाई बताई। खास बात है कि संदेह होने के बाद से ही एसडीएम खुद अपने स्तर से इस युवती की निगरानी करा रहे थे। लगातार यह नजर रखी जा रही थी कि कहीं वह किसी अन्य माध्यम से अपना काम न करा ले। मगर वह इसमें सफल नहीं हुई।
वाकया इस तरह हुआ कि एसडीएम ने ममतेश के विषय में अपने परिचित से पूछ लिया था। वहां से पता चला कि मुजफ्फरपुर में दो एसडीएम हैं। एक एसडीएम पूर्व कुंदन सिंह और दूसरे एसडीएम पश्चिम प्रियदर्शी। इस पर सामने आने पर जब एसडीएम ने ममतेश को यह जवाब दिया तो उसने तत्काल बताया कि अब उसकी तैनाती अररिया जिले में है।
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इसके बाद जब पुलिस उसके सामने आ गई तो उसने बताया कि वह 2016 बैच की बीपीएस अफसर है। ट्रेनिंग के बाद उसे 22 जुलाई 2017 को ज्वाइनिंग करनी थी। इससे पहले 3 जुलाई को उसका एक्सीडेंट हो गया। तब से वह मेडिकल अवकाश पर है। अब पूर्ण स्वस्थ होने के बाद वह नए सिरे से ज्वाइन करेगी। इसके बाद जब उससे पता पूछा तो वह पहले अपना पता इगलास बताने लगी।
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बाद में जब सख्ती हुई तो उसने अपना सही पता बताया। बाद में उसके गांव के प्रधान अशोक चौधरी से पुलिस ने संपर्क किया तो उसने युवती के गांव का होने की पुष्टि करते हुए बताया कि वह काफी समय से सारसौल इलाके में किराये पर अपने किसी दोस्त के साथ रहती है। वहां क्या कर रही है, इस विषय में जानकारी नहीं है। इसके बाद युवती का भेद खुला तो वह टूट गई और स्वीकारा कि इलाहाबाद से लॉ कर रही है।
कॉलोनी में भी खुद को बता रखा था एसडीएम
पूछताछ में त्रिपुरारी शर्मा ने बताया कि उनके एक रिश्तेदार ममतेश के बगल में ही रहते हैं। ममतेश ने कॉलोनी में भी खुद को एसडीएम बता रखा है। हमें अपनी रिश्तेदारी में देवसैनी में जमीन मिली है और उसमें विवाद है। उस समस्या के समाधान का जिक्र जब हमने अपने रिश्तेदार से किया तो उन्होंने ममतेश की मदद से समाधान का भरोसा दिलाया। बस वहीं से हम ममतेश के संपर्क में आए। इससे ज्यादा हम कुछ नहीं जानते। इंस्पेक्टर ने बताया कि इस बात का सत्यापन होने के बाद उन्हें छोड़ा गया है।