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विस्फोटक बनाने के दो आरोपियों को पांच वर्ष की कैद
Updated Fri, 12 Oct 2018 02:48 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
विस्फोटक बनाते समय विस्फोट होने और लोक शांति भंग करने के एक मामले में अदालत ने दो आरोपियों को पांच वर्ष की कैद और दो हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
10 अप्रैल 2006 को थाना सासनी गेट के प्रभारी मनोहर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि वह अपने हमराह फोर्स के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। कि रात करीब 10.30 बजे मदीना कालोनी कासिम नगर की ओर से जोरदार विस्फोट की आवाज आई। मौके पर जाकर देखा तो कांच के टुकड़े, विस्फोट के कारण अन्य सामग्रियों के टुकड़े आदि पड़े हुए थे। विस्फोट वाली जगह जाकर देखा तो दो व्यक्ति घायल थे। दोनों ने अपने नाम शाकिर पुत्र कल्लू और गुड्डू उर्फ काले उर्फ फजलुर्रहमान बताए।
विस्फोट का खौफ इतना था कि गवाही के लिए भी कोई आदमी घर से बाहर निकल कर नहीं आ रहा था। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद दोनों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम और लोक शांति भंग करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। मामले की सुनवाई अदालत में हुई, जिसके बाद उनका दोष सिद्ध हुआ। अदालत ने दोनों को पांच वर्ष की कैद और दो हजार रुपये अर्थ दंड अदा करने की सजा सुनाई है।
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विस्फोटक बनाते समय विस्फोट होने और लोक शांति भंग करने के एक मामले में अदालत ने दो आरोपियों को पांच वर्ष की कैद और दो हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है।
10 अप्रैल 2006 को थाना सासनी गेट के प्रभारी मनोहर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि वह अपने हमराह फोर्स के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। कि रात करीब 10.30 बजे मदीना कालोनी कासिम नगर की ओर से जोरदार विस्फोट की आवाज आई। मौके पर जाकर देखा तो कांच के टुकड़े, विस्फोट के कारण अन्य सामग्रियों के टुकड़े आदि पड़े हुए थे। विस्फोट वाली जगह जाकर देखा तो दो व्यक्ति घायल थे। दोनों ने अपने नाम शाकिर पुत्र कल्लू और गुड्डू उर्फ काले उर्फ फजलुर्रहमान बताए।
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विस्फोट का खौफ इतना था कि गवाही के लिए भी कोई आदमी घर से बाहर निकल कर नहीं आ रहा था। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद दोनों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम और लोक शांति भंग करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। मामले की सुनवाई अदालत में हुई, जिसके बाद उनका दोष सिद्ध हुआ। अदालत ने दोनों को पांच वर्ष की कैद और दो हजार रुपये अर्थ दंड अदा करने की सजा सुनाई है।
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