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श्मशान डेडिकेटेड ... मूलभूत सुविधाएं सिर्फ कागज पर
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जिला प्रशासन ने मंगलवार को नुमाइश ग्राउंड स्थित श्मशान घाट को डेडिकेटेड घोषित कर दिया है। साथ ही नगर निगम को यहां मूलभूत सुविधाओं के इंतजाम के निर्देश दिए गए थे, लेकिन हकीकत तो यह है कि यहां की व्यवस्थाएं रामभरोसे हैं। इंतजाम सिर्फ कागजों पर हैं। यहां सैनिटाइजेशन पिछले चार दिनों से नहीं हुआ है। शव लाने वालों से ही पीपीई किट मांगी जाती है। तब कहीं जाकर शवों का अंतिम संस्कार हो पाता है। सैनिटाइजेशन के बिना यहां संक्रमण फैलने का खतरा है।
मंगलवार को आदेश जारी होने के बाद बुधवार को पड़ताल की गई तो पता चला कि सुविधाएं न मिलने से शवों के अंतिम संस्कार में जुटी मानव उपकार संस्था भी परेशान है। इस संस्था के मजदूर भी काम छोड़कर भागने लगे हैं। बता दें कि यहां पिछले दिनों से कोरोना संक्रमित और संदिग्ध शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है।
लिहाजा, यहां नियमित सैनिटाइजेशन की आवश्यकता है। पिछले चार दिनों से नगर निगम ने यहां सैनिटाइजेशन नहीं किया गया है। इतना ही नहीं मजदूरों को सीमित संख्या में पीपीई किट दी जाती है। आवश्यकता पड़ने पर शव ला रहे परिजनों से पीपीई किट की मांग रखी जाती है, जबकि यहां पर लाइट की व्यवस्था तक नगर निगम ने नहीं की है।
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परिजन नहीं लगाते हाथ तो मजदूर भी लगे भागने
विगत आठ दिनों में 100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार करने वाले मजदूर परेशान हैं। इसका कारण है कि शव ला रहे परिजन यहां कोई मदद नहीं करते हैं। शव आने के बाद मजदूर लकड़ी तौलते हैं।
इसके बाद जगह होने पर चिता लगाते हैं और शव को चिता पर ले जाते हैं। इस दौरान परिजन हाथ नहीं लगाते हैं। दो दिनों से काम पर पांच मजदूर लौटे ही नहीं है। मंगलवार को नए मजदूर बुलाए गए थे। यह व्यवस्था निजी है, न कि सरकारी। इस निर्वहन मानव उपकार सामाजिक संस्था करती है।
- नुमाइश श्मशान घाट को डेडिकेटेड घोषित करना अच्छी बात है। लेकिन हकीकत तो यह है कि प्रशासन ने हमसे कोई राय नहीं ली, न ही यहां सुविधाएं दी हैं। पर्याप्त पीपीई किट नहीं हैं। संस्था इस खर्चे का स्वयं वहन कर रही है। कुछ पीपीई किट तो परिजनों से मांग ली जाती हैं। श्मशान में चार दिनों से सैनिटाइजेशन का कार्य नहीं हुआ है। ऐसे में यहां पर संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता है। हम किसी तरह व्यवस्था को संभाल रहे हैं। अगर प्रशासन ने डेडिकेटेड घोषित कर दिया है तो यहां की व्यवस्थाओं को भी संभाले।
-विष्णु कुमार बंटी, संस्थापक अध्यक्ष, मानव उपकार सामाजिक संस्था।
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मंगलवार को आदेश जारी होने के बाद बुधवार को पड़ताल की गई तो पता चला कि सुविधाएं न मिलने से शवों के अंतिम संस्कार में जुटी मानव उपकार संस्था भी परेशान है। इस संस्था के मजदूर भी काम छोड़कर भागने लगे हैं। बता दें कि यहां पिछले दिनों से कोरोना संक्रमित और संदिग्ध शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है।
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लिहाजा, यहां नियमित सैनिटाइजेशन की आवश्यकता है। पिछले चार दिनों से नगर निगम ने यहां सैनिटाइजेशन नहीं किया गया है। इतना ही नहीं मजदूरों को सीमित संख्या में पीपीई किट दी जाती है। आवश्यकता पड़ने पर शव ला रहे परिजनों से पीपीई किट की मांग रखी जाती है, जबकि यहां पर लाइट की व्यवस्था तक नगर निगम ने नहीं की है।
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परिजन नहीं लगाते हाथ तो मजदूर भी लगे भागने
विगत आठ दिनों में 100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार करने वाले मजदूर परेशान हैं। इसका कारण है कि शव ला रहे परिजन यहां कोई मदद नहीं करते हैं। शव आने के बाद मजदूर लकड़ी तौलते हैं।
इसके बाद जगह होने पर चिता लगाते हैं और शव को चिता पर ले जाते हैं। इस दौरान परिजन हाथ नहीं लगाते हैं। दो दिनों से काम पर पांच मजदूर लौटे ही नहीं है। मंगलवार को नए मजदूर बुलाए गए थे। यह व्यवस्था निजी है, न कि सरकारी। इस निर्वहन मानव उपकार सामाजिक संस्था करती है।
- नुमाइश श्मशान घाट को डेडिकेटेड घोषित करना अच्छी बात है। लेकिन हकीकत तो यह है कि प्रशासन ने हमसे कोई राय नहीं ली, न ही यहां सुविधाएं दी हैं। पर्याप्त पीपीई किट नहीं हैं। संस्था इस खर्चे का स्वयं वहन कर रही है। कुछ पीपीई किट तो परिजनों से मांग ली जाती हैं। श्मशान में चार दिनों से सैनिटाइजेशन का कार्य नहीं हुआ है। ऐसे में यहां पर संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता है। हम किसी तरह व्यवस्था को संभाल रहे हैं। अगर प्रशासन ने डेडिकेटेड घोषित कर दिया है तो यहां की व्यवस्थाओं को भी संभाले।
-विष्णु कुमार बंटी, संस्थापक अध्यक्ष, मानव उपकार सामाजिक संस्था।