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कोरोना योद्धाः पापा...पापा की रट लगाकर रोती है तीन साल की बिटिया
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प्रदीप सिंह।
- फोटो : CITY OFFICE
तीन साल की बिटिया को याद कर प्रदीप सिंह की आंखों से आंसू छलक जाते हैं। बहुत मुश्किल से अपनी जज्बातों को संभाल पाते हैं।
अतरौली के प्रदीप सिंह की ड्यूटी हरदुआगंज स्थित कोविड-19 -लेवल वन हॉस्पिटल में लगी है। वह स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं। यहां पर कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों को उपचार के लिए रखा जाता है। अब तक यहां पर 29 मरीज आ चुके हैं, जिसमें से एक निरोग होकर जा चुका है। प्रदीप सिंह संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटे हैं। 15 दिन की ड्यूटी समाप्त कर अब 15 दिन के लिए क्वारंटीन होंगे। मतलब सबकुछ ठीक रहा तो घर जाने का मौका भी 15 दिन बाद मिलने की उम्मीद है।
परिजनों से दूर रहने का कभी मौका भी नहीं मिला है। यह अनुभव उनके लिए बिल्कुल नया है। प्रदीप सिंह के परिवार में मम्मी-पापा और 88 वर्षीय दादा जी हैं। वह सबसे अधिक तीन साल की बिटिया को मिस करते हैं। वह भी अपने पापा को बार-बार याद करती है और मम्मी से वीडियो कॉल कराती है। वीडियो कॉल बंद करने पर पापा-पापा की रट लगाकर रोने लगती है। प्रदीप भी अपने आंसू को नहीं रोक पाते। प्रदीप कहते हैं कि देश संकट की दौर से गुजर रहा है। कोरोना जंग जीतकर घर लौटूंगा तो बिटिया को गले लगाऊंगा।
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अतरौली के प्रदीप सिंह की ड्यूटी हरदुआगंज स्थित कोविड-19 -लेवल वन हॉस्पिटल में लगी है। वह स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं। यहां पर कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों को उपचार के लिए रखा जाता है। अब तक यहां पर 29 मरीज आ चुके हैं, जिसमें से एक निरोग होकर जा चुका है। प्रदीप सिंह संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटे हैं। 15 दिन की ड्यूटी समाप्त कर अब 15 दिन के लिए क्वारंटीन होंगे। मतलब सबकुछ ठीक रहा तो घर जाने का मौका भी 15 दिन बाद मिलने की उम्मीद है।
परिजनों से दूर रहने का कभी मौका भी नहीं मिला है। यह अनुभव उनके लिए बिल्कुल नया है। प्रदीप सिंह के परिवार में मम्मी-पापा और 88 वर्षीय दादा जी हैं। वह सबसे अधिक तीन साल की बिटिया को मिस करते हैं। वह भी अपने पापा को बार-बार याद करती है और मम्मी से वीडियो कॉल कराती है। वीडियो कॉल बंद करने पर पापा-पापा की रट लगाकर रोने लगती है। प्रदीप भी अपने आंसू को नहीं रोक पाते। प्रदीप कहते हैं कि देश संकट की दौर से गुजर रहा है। कोरोना जंग जीतकर घर लौटूंगा तो बिटिया को गले लगाऊंगा।
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