Good News: अलीगढ़ में बनेंगे मेट्रो के द्वार, गाजियाबाद की फर्म ने शुरू की तैयारी, लोगों को मिलेंगी नौकरी
इस यूनिट में मेट्रो में प्रयोग होने वाले प्लेटफार्म स्क्रीन डोर, ई टिकट मशीन आदि उपकरण के साथ-साथ डेटा सेंटर को दिए जाने वाले कुछ उपकरण बनाएगी। फर्म को सभी एनओसी मिल गई हैं। बहुत जल्द यूनिट निर्माण शुरू कराया जा रहा है।
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गाजियाबाद की ओरियन प्रो सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड फर्म अलीगढ़ के ख्यामई स्थित इंडस्ट्रियल स्टेट में मेट्रो के द्वार व डेटा सेंटर संबंधी उपकरण बनाने की इकाई लगाने जा रही है। इसके लिए फर्म ने सभी प्रकार की एनओसी प्राप्त कर ली हैं। जल्द यूनिट उत्पादन शुरू होगा।
कंपनी प्रबंधन का प्रयास है कि 2027 में इस यूनिट पर उत्पादन शुरू कर दिया जाए। 50 करोड़ के निवेश वाली इस यूनिट में 300 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने के संकेत हैं। फर्म के एमडी संजीव सचदेव ने ख्यामई इंडस्ट्रियल स्टेट में निवेश प्रस्ताव के साथ-साथ पिछले वर्ष ऑनलाइन दो प्लॉट आवेदन किए थे, जिनमें से एक बड़ा प्लॉट उन्हें मेट्रो के द्वार, ई-टिकट मशीन, मेट्रो ट्रेन के अन्य उपकरण बनाने के लिए चाहिए था। लेकिन नीलामी में उन्हें सिर्फ एक प्लॉट ही मिल सका।
इसके चलते उस समय उन्होंने यहां मेट्रो के द्वार बनाने संबंधी यूनिट लगाने का प्लान टाला था। बाद में अधिकारियों से विमर्श के बाद इसी प्लॉट पर अपनी नई यूनिट लगाना तय किया है। संजीव सचदेव बताते हैं कि यूनिट लगाने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। सभी एनओसी मिल गई हैं। बहुत जल्द यूनिट निर्माण शुरू कराया जा रहा है। प्रयास रहेगा कि अगले वर्ष यानि 2027 में यहां हम अपने उत्पादों का उत्पादन शुरू कर दें।
ये प्रमुख उत्पाद बनेंगे यहां
यह फर्म इस यूनिट में मेट्रो में प्रयोग होने वाले प्लेटफार्म स्क्रीन डोर, ई टिकट मशीन आदि उपकरण के साथ-साथ डेटा सेंटर को दिए जाने वाले कुछ उपकरण बनाएगी। मेट्रो का जो प्लेटफार्म स्क्रीन डोर बनेगा, वह मेट्रो के स्टेशन पर रुकने पर नियत स्थान पर स्वचलित प्लेटफार्म पर खुलता है। खुद ही बंद होता है।
अलीगढ़ से इस परिवार का पुराना नाता
संजीव सचदेव के पिता स्व.ओमप्रकाश सचदेव ने एएमयू से इंजीनियरिंग की थी। रघुवीरपुरी में उनका पुराना घर था। उन्होंने खुद ओएलएफ से दसवीं तक की पढ़ाई की। पिता ने 1962 से 82 तक दुबे पड़ाव पर मशीनरी पार्ट बनाने का कारखाना चलाया। बाद में गाजियाबाद में कारखाना लगाया। अलीगढ़ में जमीन का प्रस्ताव मिलने पर पुराना परिचित शहर होने के चलते यहां आए थे।
ये तथ्य जानें
- 50 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की यूनिट, प्लॉट कीमत अलग
- 300 से अधिक मजदूरों को इस यूनिट में मिल सकेगा रोजगार
- पूर्व में प्लॉट छोटा होने के कारण टाला था प्लान, अब उसी प्लॉट पर शुरू होगा काम
- मेट्रो के प्लेटफार्म स्क्रीन डोर के अलावा डेटा सेंटर संबंधी उत्पाद बनाने की भी तैयारी
- ख्यामई में आवंटित प्लॉट पर लगेगी यूनिट, सभी प्रकार की एनओसी मिलीं
- अगले साल तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य