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बर्ड फ्लू : बाहर से आने वाले अंडे, चूजे, मुर्गा-मुर्गी पर 24 जनवरी तक प्रतिबंध
Tue, 12 Jan 2021 01:14 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2021 01:14 AM IST
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बर्ड फ्लू
- फोटो : अमर उजाला
अलीगढ़ जिले में आगामी 24 जनवरी तक दूसरे जिलों और प्रांतों से आने वाले अंडा, मुर्गा-मुर्गी या डीओसी नहीं आएंगे। डीओसी यानी डे ओल्ड चिक्स, जिनको एक दिनी चूजा कहा जाता है। उन पर सर्वाधिक निगरानी होगी। बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए शासन के निर्देश पर इस पर सख्ती से रोक लगा दी गई है। वहीं, शेखा झील में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश बंद करा दिया गया है। सोमवार को कलक्ट्रेट सभागार में हुई जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में अंडों को लेकर स्थानीय उत्पादन, प्रयोग पर कोई रोक नहीं लगने से कारोबारियों ने राहत की सांस ली है। पशुपालन विभाग को सतर्क रहने और कोई भी केस मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि अलीगढ़ जिले के बाहर से आने वाले मुर्गी-मुर्गा और अंडे पर रोक लगाई गई है। स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले मुर्गी, मुर्गा और अंडे का प्रयोग जारी रहेगा। इस पर कोई रोक नहीं है। कोई भी खाने-पीने का शौकीन प्रयोग कर सकता है। बशर्ते कि वह उबला हुआ हो, कच्चा न हो। डा. बीपी सिंह ने बताया कि बर्ड फ्लू की जांच के लिए भेजे गए 20 परिंदों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। ये नमूने शेखा झील, जलाली, कौड़ियागंज, अतरौली और दादों के फार्म से भेजे गए थे। बरेली के इज्जतनगर स्थित इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) से इन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
मुख्य पशु चिक्तिसाधिकारी ने बताया कि जिले में वर्तमान में 30-30 हजार परिंदों के दस यानी तीन लाख पक्षी और 10-10 हजार परिंदों के 10 फार्म यानी एक लाख पक्षी के फार्म संचालित हैं। जिनको सरकारी अनुदान प्राप्त है। इन परिंदों की कुल संख्या चार लाख है। इस तरह से चार लाख परिंदों के ये फार्म है। इसके अलावा एक लाख परिंदे शेखा झील में हैं। एक लाख थोक और फुटकर बाजार में है। ये संख्या पांच से छह लाख तक हो जाती है।
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बर्ड फ्लू के लक्षण जान लें, मौके पर पहचान लें
अलीगढ़। बर्ड फ्लू परिंदों में होने वाली एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है। परिंदों से लेकर इनको इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति की जान तक जा सकती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि इस बीमारी में पक्षियों की गर्दन और पैर में सूजन हो जाती है। वह दस्त करने लगता है। आंखों से आंसू और नाक से पानी आता है। इस बीमारी में परिंदे की मृत्यु दर सौ फीसदी होती है। एक फार्म में अगर पांच से दस परिंदों को ये बीमारी होती है तो सरकार पूरे फार्म के परिंदों को खत्म करा देती है, ताकि बीमारी का प्रसार न हो। पक्षियों से ये बीमारी मनुष्य में आती है। अलीगढ़ में अभी तक इस बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है। फिर भी लोगों को एहतियातन अंडा और चिकन अच्छी तरह से उबाल कर इस्तेमाल करना चाहिए।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि अलीगढ़ जिले के बाहर से आने वाले मुर्गी-मुर्गा और अंडे पर रोक लगाई गई है। स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले मुर्गी, मुर्गा और अंडे का प्रयोग जारी रहेगा। इस पर कोई रोक नहीं है। कोई भी खाने-पीने का शौकीन प्रयोग कर सकता है। बशर्ते कि वह उबला हुआ हो, कच्चा न हो। डा. बीपी सिंह ने बताया कि बर्ड फ्लू की जांच के लिए भेजे गए 20 परिंदों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। ये नमूने शेखा झील, जलाली, कौड़ियागंज, अतरौली और दादों के फार्म से भेजे गए थे। बरेली के इज्जतनगर स्थित इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) से इन सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
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मुख्य पशु चिक्तिसाधिकारी ने बताया कि जिले में वर्तमान में 30-30 हजार परिंदों के दस यानी तीन लाख पक्षी और 10-10 हजार परिंदों के 10 फार्म यानी एक लाख पक्षी के फार्म संचालित हैं। जिनको सरकारी अनुदान प्राप्त है। इन परिंदों की कुल संख्या चार लाख है। इस तरह से चार लाख परिंदों के ये फार्म है। इसके अलावा एक लाख परिंदे शेखा झील में हैं। एक लाख थोक और फुटकर बाजार में है। ये संख्या पांच से छह लाख तक हो जाती है।
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बर्ड फ्लू के लक्षण जान लें, मौके पर पहचान लें
अलीगढ़। बर्ड फ्लू परिंदों में होने वाली एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है। परिंदों से लेकर इनको इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति की जान तक जा सकती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बीपी सिंह ने बताया कि इस बीमारी में पक्षियों की गर्दन और पैर में सूजन हो जाती है। वह दस्त करने लगता है। आंखों से आंसू और नाक से पानी आता है। इस बीमारी में परिंदे की मृत्यु दर सौ फीसदी होती है। एक फार्म में अगर पांच से दस परिंदों को ये बीमारी होती है तो सरकार पूरे फार्म के परिंदों को खत्म करा देती है, ताकि बीमारी का प्रसार न हो। पक्षियों से ये बीमारी मनुष्य में आती है। अलीगढ़ में अभी तक इस बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है। फिर भी लोगों को एहतियातन अंडा और चिकन अच्छी तरह से उबाल कर इस्तेमाल करना चाहिए।