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Aligarh News:आईएम सॉरी मम्मी-पापा, मैने आपको नीचा दिखाया है, लिख कर बेटे ने फंदे पर लटककर दी जान

Wed, 31 May 2023 02:49 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Wed, 31 May 2023 02:49 AM IST
सार

सुसाइड नोट में उसने मम्मी-पापा के लिए लिखा कि उसे माफ कर देना, उसने आपको नीचा दिखाया है। फिलहाल पुलिस तथ्यों की जांच में जुटी है। इधर, बेटे की इस तरह मौत के बाद परिवार ने उसकी आंखों का दान कर दिया है।

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Class 11th student hanged himself to death
मृतक दक्ष - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

अलीगढ़ महानगर के महुआ खेड़ा थाना क्षेत्र के ग्रीन पार्क अपार्टमेंट में सोमवार रात एक सीए (चार्टर्ड एकाउंटेंट) के 11वीं में पढ़ रहे छात्र बेटे ने फ्लैट में फंदे पर झूलकर आत्महत्या कर ली। छात्र ने यह कदम उस समय उठाया, जब वह घर में अकेला था। उसने ऐसा क्यों किया, यह तो अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ। मगर सुसाइड नोट में उसने मम्मी-पापा के लिए लिखा कि उसे माफ कर देना, उसने आपको नीचा दिखाया है। फिलहाल पुलिस तथ्यों की जांच में जुटी है। इधर, बेटे की इस तरह मौत के बाद परिवार ने उसकी आंखों का दान कर दिया है।

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ग्रीन पार्क अपार्टमेंट निवासी अमित निर्मल के दो बेटों में बड़ा 16 वर्षीय दक्ष शहर के नामचीन स्कूल का 11वीं का छात्र था। छोटा लक्ष्य भी उसी स्कूल का छात्र है। शनिवार को अमित अपनी पत्नी के साथ मसूरी घूमने गए थे, जबकि लक्ष्य स्कूल टूर पर पुणे गया है। सोमवार रात अमित दंपती वापस लौटे थे। रात एक बजे जब वे अपने फ्लैट पर पहुंचे तो काफी प्रयास के बाद भी दरवाजा नहीं खुला। इस पर उन्होंने बगल के अपने दूसरे फ्लैट की बालकनी में पहुंचकर दरवाजा खोला तो अंदर पहुंच दंग रह गए। 
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दक्ष का शव फंदे से पंखे पर लटका हुआ था। इस पर पड़ोसियों की मदद से शव उतारा गया और पुलिस को खबर दी गई। आनन-फानन उसे क्वार्सी के नर्सिंग होम ले जाया गया। मगर वहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इधर, पुलिस ने जब जांच शुरू की तो उसकी टेबिल पर स्कूल की कापी में सुसाइड नोट लिखा मिला, जिस पर अंकित था कि आईएम सॉरी मम्मी-पापा, आई हैव लेट यू डाउन (मुझे माफ कर देना मम्मी-पापा, मैने आपको नीचा दिखाया है)। पुलिस ने सुसाइड नोट सीज कर दिया है। वहीं शव मंगलवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद परिवार को सौंप दिया है।

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ग्रीन पार्क अपार्टमेंट में किशोर की आत्महत्या के बाद हुई जांच में सुसाइड नोट मिला है। उसके लैपटॉप व मोबाइल की जांच की जा रही है। परिवार का भी किसी तरह का कोई आरोप नहीं है। तथ्यों के सामने आने पर आगे कार्रवाई तय की जाएगी।-पुनीत द्विवेदी, एएसपी/सीओ-द्वितीय

तो हाईस्कूल में 95 फीसदी नंबरों से संतुष्ट न था किशोर

सीए के बेटे ने आत्महत्या क्यों की..? यह अनुत्तरित सवाल है। जिस तरह के तथ्य और परिवार से मिली जानकारियां सामने आ रही हैं। उससे अंदाजा यही लगाया जा रहा है कि खुद किशोर हाईस्कूल के अपने 95 फीसद नंबरों से संतुष्ट नहीं था। उसे 97 फीसद से अधिक नंबर आने की उम्मीद थी। हालांकि कम नंबरों को लेकर न तो परिवार से कोई टोकाटाकी थी और न किसी और ने सवाल जवाब किया। फिर सुसाइड नोट के अनुसार उसने अपने माता-पिता को किस बात से नीचा दिखाने का जिक्र किया ये स्पष्ट नहीं है ? इन सवालों के जवाब पुलिस तलाश रही है। माना जा रहा है कि कम नंबर ही खुद की व परिवार की असंतुष्टि का कारण होंगे।

दक्ष के परिजन ने उसकी आंखों को किया दान

इंस्पेक्टर महुआ खेड़ा विजय सिंह के अनुसार परिवार से बातचीत व मौके पर हुई जांच से जानकारी में आया कि किशोर पढ़ने में होनहार था। उसके दो ही शौक अब तक सामने आए हैं, एक तो वह ज्यादातर समय पढऩे-लिखने में बिताता था। खाली समय में ऑनलाइन गेम खेलने का शौकीन था। फ्लैट से बाहर उसको बहुत ही कम लोग आते जाते देखते थे। इसी वर्ष उसने दसवीं में 95 फीसदी अंक लाए थे। वह 97 फीसद से अधिक अंक लाने की उम्मीद लगाए था। मगर उससे इस विषय पर कोई सवाल जवाब नहीं हुआ। फिर उसने आत्महत्या क्यों की। ये अभी परिवार भी नहीं समझ पा रहा। क्योंकि पढ़ाई में दबाव जैसी कोई बात नहीं थी। 

इधर, परिवार से जानकारी मिली है कि उसके माता-पिता शनिवार को मसूरी घूमने गए थे। उन्होंने किशोर से भी साथ चलने को कहा था। मगर उसने अपनी कोचिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के चलते जाने से इंकार कर दिया। सोमवार को रात उसकी अपने माता-पिता से बात हुई। इसके बाद लोगों ने रात 11:40 बजे उसके फ्लैट की लाइट जलने पर ध्यान दिया। इसके बाद पिता के आने पर उसके आत्महत्या का शोर मचा। उसके बाद से उसके माता-पिता बदहवास हैं।

खुद बेटे की थी इच्छा, इसलिए नेत्र दान
देहदान कर्तव्य संस्था के पदाधिकारी डा.जयंत शर्मा व भुवनेश आधुनिक ने बताया कि उनके परिवार की ओर से बच्चे की नेत्रदान की खबर पर वे पोस्टमार्टम केंद्र पहुंचे। जहां परिवार ने बताया कि उनका बेटा होनहार था और वह अक्सर घर में कहता था कि वह अपनी आंखें दान करेगा। बेटे की इच्छा के चलते ही यह फैसला लिया है। इस पर मेडिकल कॉलेज की टीम बुलाकर नेत्र दान की प्रक्रिया कराई गई और परिवार को प्रमाण पत्र सौंपा गया। इधर, छोटे बेटे को स्कूल प्रबंधन के जरिये पुणे से वापस लाने की तैयारी हो रही थी। इसलिए देर शाम तक अंतिम संस्कार नहीं हो सका था।

कहीं गेम में हार जीत पर तो नहीं गंवाई जान
पुलिस के अनुसार खुद परिवार, आस पड़ोस के लोग जब उसके कमरे में पहुंचे और पुलिस भी आई तो उसके कंप्यूटर में ऑनलाइन गेम चलता मिला। सिस्टम में ईयर फोन भी लगा हुआ था और गेम की आवाजें ईयरफोन में आ रही थीं। ऐसे में अंदेशा यह भी है कि कहीं उसने गेम में हार जीत को लेकर जान तो नहीं दी। मगर सच जांच के बाद सामने आएगा।
 


 
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