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परंपरागत कारोबार से मुंह मोड़ रहे कुम्हार चीनी उत्पादों ने छीना ‘अपनों’ का दुलार

Fri, 26 Oct 2018 02:03 AM IST
इकराम वारिस
इकराम वारिस Updated Fri, 26 Oct 2018 02:03 AM IST
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Chinese products turning away from traditional business
क्वार्सी बाइपास पर करवाचौथ के लिए करवा तैयार करते पन्नालाल। अमर उजाला - फोटो : Dig Vishal

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 त्योहारों पर परंपरागत प्रयोग में लाए जाने वाले मिट्टी से के बर्तन, दीपक, करवा, घड़ा सहित तमाम वस्तुओं को बनाने वाले कुम्हार अब इस काम से मुंह मोड़ रहे हैं। उन्हें कभी चीन के आइटम परेशान कर देते हैं, तो कभी मिट्टी की कमी रुलाने को मजबूर कर देती है। इस कश्मकश भरी जिंदगी के चलते इस रोजगार से एक पूरी गली ने नाता तोड़ लिया है, जो कर रहे हैं, वे अपने बच्चों को आगे इस रोजगार से दूर रखना चाहते हैं।
क्वार्सी के पास कमिश्नर दफ्तर के पास कुम्हारी कला के सहारे अपने परिवार का सहारा बने अतरौली के गांव वीरपुरा निवासी पन्नालाल के मुताबिक, यह धंधा उनके लिए मजबूरी है। इस धंधे में पहले जैसी बात नहीं रही। दशहरा से पहले ही दीपक व करवा बनना शुरू कर देते थे, लेकिन अब दशहरा के बाद करवा बना रहे हैं। कुछ दीपक भी बना लेते हैं। पन्ना लाल कहते हैं अगर कुम्हारी कला को मसीहा न मिला, तो यह कला खत्म हो जाएगी। कुम्हरान वाली गली जयगंज निवासी ज्वाला प्रसाद ने कहा कि पहले एक बुग्गी मिट्टी 300 रुपये की मिलती थी, अब 500-600 रुपये में मिलती है। अलबत्ता, उनके उत्पाद में 50 पैसे या एक रुपये ही बढ़े हैं।
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अखिलेश यादव ने दिया था भरोसा
वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुम्हारी कला को बढ़ावा देने के लिए उन्हें जमीन के पट्टे और सरकारी आवास दिए जाने का भरोसा दिया था। वहीं, यह भी कहा था कि मिट्टी की किल्लत न हो इसके लिए उन्हें पट्टे दिए जाएंगे। कुम्हारों के लिए अलग से मार्केट बनाया जाएगा। अगर यह भरोसा हकीकत में बदलता, तो पन्नालाल को गांव छोड़कर शहर नहीं आना पड़ता। गली को कुम्हारी कला से नाता नहीं तोड़ना पड़ता।
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इस रोजगार से अपने बच्चों को दूर रख रही हूं। बच्चे पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी करके अच्छा जीवन यापन करें। अब विदेशी कंपनियों ने मशीनों से मिट्टी के बर्तन तैयार कर दिए हैं। 


- अनीता, कुम्हरान वाली गली जयगंज

मिट्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, जो 50 साल पहले मिला करते थे। इसलिए 25 साल पहले मिट्टी के बर्तन, दीपक आदि बनाना छोड़ दिया। चीन के सामान ने बाजार प्रभावित किया है। 
- शीला देवी, कुम्हरान वाली गली जयगंज

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