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अलीगढ़ : स्कूल बस-वैन न आने पर घर बैठे हैं संत फिदेलिस स्कूल के बच्चे
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गाजियाबाद के मोदी नगर में स्कूल बस में छात्र की मौत के बाद परिवहन विभाग निजी स्कूल वाहनों के खिलाफ अभियान छेड़े है। इस सख्ती के कारण कई ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहनों का संचालन बंद कर दिया है। इसके चलते खेड़ा खुशखबर स्थित संत फिदेलिस स्कूल के 1100 से अधिक बच्चे तीन दिन से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। बृहस्पतिवार को 60-70 अभिभावक अपने वाहनों से बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे थे। शुक्रवार को जुमा अलविदा होने के कारण स्कूल में छुट्टी रही।
शासन के आदेश पर परिवहन विभाग प्रत्येक स्कूल वाहन का भौतिक सत्यापन कर रहा है। खामियां मिलने और अवैध रूप से संचालित होने वाले वाहनों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है। इस जुर्माने से बचने के लिए ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहनों का संचालन बंद कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन खुद का ट्रांसपोर्ट न होने की बात कह पल्ला झाड़ रहा है। हम लोग कामधंधा छोड़कर बच्चों को स्कूल नहीं पहुंचा सकते हैं। स्कूल में 10-12 ट्रांसपोर्टर अपनी 40-50 बसों और वैन का संचालन कराते हैं।
कक्षा सात तक चलती हैं कक्षाएं
- विद्यालय में एलकेजी-यूकेजी से लेकर कक्षा सात तक की कक्षाएं चलती हैं। प्रत्येक कक्षा में तीन-तीन सेक्शन हैं। यहां तकरीबन 1300 बच्चे इन कक्षाओं में पंजीकृत हैं।
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- मंगलवार से बृहस्पतिवार तक स्कूल वाहन बच्चों को लेने घर नहीं पहुंचे। कामधंधा छोड़कर बच्चों को स्कूल भी नहीं भेज सकते हैं। बच्चे घर पर बैठे हैं। - पुष्पेंद्र पचौरी, क्षेत्रीय सह संयोजक, शिक्षक प्रकोष्ठ भाजपा।
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- तीन दिन से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, क्योंकि स्कूल वैन घर नहीं पहुुंच रही है। स्कूल वालों ने कह दिया है कि हम ट्रांसपोर्ट फैसिलिटी नहीं देते हैं। - एडवोकेट सुनील सिंह, निवासी प्रतिभा कॉलोनी।
- सभी स्कूल वैन संचालकों और बस संचालकों को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार मानक पूरे करने के लिए कह दिया है। इसके बाद ही इन वाहनों में बच्चे सफर करेंगे। ट्रांसपोर्ट से विद्यालय प्रबंधन का लेना देना नहीं है। छात्रों के हित में अन्य ट्रांसपोर्टरों से बातचीत की जाएगी। - फादर सुरेश डिसूजा, प्रिंसिपल।
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शासन के आदेश पर परिवहन विभाग प्रत्येक स्कूल वाहन का भौतिक सत्यापन कर रहा है। खामियां मिलने और अवैध रूप से संचालित होने वाले वाहनों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है। इस जुर्माने से बचने के लिए ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहनों का संचालन बंद कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन खुद का ट्रांसपोर्ट न होने की बात कह पल्ला झाड़ रहा है। हम लोग कामधंधा छोड़कर बच्चों को स्कूल नहीं पहुंचा सकते हैं। स्कूल में 10-12 ट्रांसपोर्टर अपनी 40-50 बसों और वैन का संचालन कराते हैं।
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कक्षा सात तक चलती हैं कक्षाएं
- विद्यालय में एलकेजी-यूकेजी से लेकर कक्षा सात तक की कक्षाएं चलती हैं। प्रत्येक कक्षा में तीन-तीन सेक्शन हैं। यहां तकरीबन 1300 बच्चे इन कक्षाओं में पंजीकृत हैं।
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- मंगलवार से बृहस्पतिवार तक स्कूल वाहन बच्चों को लेने घर नहीं पहुंचे। कामधंधा छोड़कर बच्चों को स्कूल भी नहीं भेज सकते हैं। बच्चे घर पर बैठे हैं। - पुष्पेंद्र पचौरी, क्षेत्रीय सह संयोजक, शिक्षक प्रकोष्ठ भाजपा।
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- तीन दिन से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, क्योंकि स्कूल वैन घर नहीं पहुुंच रही है। स्कूल वालों ने कह दिया है कि हम ट्रांसपोर्ट फैसिलिटी नहीं देते हैं। - एडवोकेट सुनील सिंह, निवासी प्रतिभा कॉलोनी।
- सभी स्कूल वैन संचालकों और बस संचालकों को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार मानक पूरे करने के लिए कह दिया है। इसके बाद ही इन वाहनों में बच्चे सफर करेंगे। ट्रांसपोर्ट से विद्यालय प्रबंधन का लेना देना नहीं है। छात्रों के हित में अन्य ट्रांसपोर्टरों से बातचीत की जाएगी। - फादर सुरेश डिसूजा, प्रिंसिपल।