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प्रमुख सचिव साहब! जीएसटी की गुत्थी सुलझाइए
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Mon, 11 Sep 2017 01:52 AM IST
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जीएसटी
- फोटो : Amar Ujala
जीएसटी के रिटर्न जमा करने में जीएसटी नेटवर्क हैंग होने, फार्म डाउनलोड-अपलोड नहीं होने सहित अन्य समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो रहा है। जीएसटी के अलीगढ़ जिले के प्रमुख नोडल अधिकारी प्रमुख सचिव सुधीर गर्ग सोमवार को कलक्ट्रेट के नवीन सभागार में जीएसटी की समीक्षा करेंगे। उम्मीद है कि वह व्यापारियों और अधिकारियों के सवालों का जवाब देंगे। इसके साथ ही प्रमुख सचिव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैर, तहसील खैर का निरीक्षण करेंगे। वह नगर निगम, खैर के गांव भमरौला का भी जायजा लेंगे।
चार बड़ी समस्याएं
1- जीएसटीएन नेटवर्क पूरी तरह से बेहतर स्पीड से काम नहीं कर रहा। हैंग हो जाता है। ओवरलोडिंग के कारण डाटा अपलोड करने में बहुत समय बर्बाद हो रहा है। पांच मिनट में रिटर्न दाखिल करने का दावा किया गया था लेकिन सुबह से शाम तक 10 लोगों के रिटर्न जमा नहीं हो रहे हैं।
2- जीएसटीआर वन फार्म को भरने में बड़ी समस्या हो रही है। जीएसटीआर वन और जीएसटीआर थ्री अपलोड नहीं हो रहा है। जीएसटीआर टू का फार्म आ ही नहीं रहा है। फार्म के फार्मेट समझ नहीं आ रहे। क्या-क्या सूचना देनी है इसकी जानकारी अधिकारी भी नहीं दे पा रहे। फार्म बहुत जटिल हैं।
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3- जीएसटी नेटवर्क पर फार्म डाउनलोड करने, सूचना भरने और उसे सम्मिट करने में बहुत समय लग रहा है। सरकार सभी रिटर्न समय से जमा कराना चाहती है लेकिन अभी तक सारे फार्म ही सिस्टम पर नहीं आए हैं। आइटम का क्लासीफिकेशन और कोड बार-बार बदल रहा है।
4- सरकारी विभागों में ठेकेदारी और जॉब वर्क करने वाले भी भ्रम में हैं। ऐसे लोगों को ये नहीं पता है कि उनका किस आइटम में कितना जीएसटी काटा जाना है। विभागीय अधिकारियों का जवाब है कि केंद्र सरकार के आदेश आने का इंतजार है। ऐसे में ठेकेदार अपना बिल नहीं बना पा रहे हैं।
सेल्स टैक्स को बदल कर वैट लागू करने के दौरान एक सुविधाजनक व्यवस्था दी गई थी। जिसमें पूर्व के सेल्स टैक्स और तत्कालीन वैट दोनों सिस्टम से रिटर्न जमा हो रहा था। जिससे व्यापारियों को उलझन नहीं हुई थी। जिसको जहां सुविधा हुई वहां रिटर्न जमा कर दिया। जब व्यापारी वैट में सुविधाजनक हो गए तो सेल्स टैक्स का सिस्टम पूरी तरह से बंद कर दिया गया। लेकिन वैट से जीएसटी लागू करने में ये सुविधा नहीं दी जा रही है, जिससे व्यापारियों में दहशत का माहौल हो रहा है। अगर रिटर्न जमा नहीं हुआ तो उनको जुर्माना न भरना पड़ जाए। जीएसटी के अधिकारी व्यापारियों और वकीलों के सवालों का जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं। जीएसटी नेटवर्क ओवरलोड है, सिस्टम हैंग हो रहा है। जीएसटी फार्म अपलोड नहीं होते नियम कायदे पूरे नहीं हुए हैं। हर तीसरे दिन बदलाव करने से भी बहुत भ्रम हो गया है। अगर यही हाल रहा तो जीएसटी का पूरा सिस्टम बैठ जाएगा
-अवन कुमार सिंह सीए, अध्यक्ष सीए एसोसिएशन
पहले रिटर्न की अंतिम तारीख 10 अक्तूबर तक बढ़ी
पहली जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई का पहला रिटर्न 20 सितंबर तक जमा होना था। इस तारीख को बढ़ा कर 10 अक्तूबर कर दिया गया है। जुलाई का दूसरा रिटर्न 30 अक्तूबर तक जमा होगा। अगस्त के रिटर्न जमा करने की तारीख अभी तय नहीं है।
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चार बड़ी समस्याएं
1- जीएसटीएन नेटवर्क पूरी तरह से बेहतर स्पीड से काम नहीं कर रहा। हैंग हो जाता है। ओवरलोडिंग के कारण डाटा अपलोड करने में बहुत समय बर्बाद हो रहा है। पांच मिनट में रिटर्न दाखिल करने का दावा किया गया था लेकिन सुबह से शाम तक 10 लोगों के रिटर्न जमा नहीं हो रहे हैं।
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2- जीएसटीआर वन फार्म को भरने में बड़ी समस्या हो रही है। जीएसटीआर वन और जीएसटीआर थ्री अपलोड नहीं हो रहा है। जीएसटीआर टू का फार्म आ ही नहीं रहा है। फार्म के फार्मेट समझ नहीं आ रहे। क्या-क्या सूचना देनी है इसकी जानकारी अधिकारी भी नहीं दे पा रहे। फार्म बहुत जटिल हैं।
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3- जीएसटी नेटवर्क पर फार्म डाउनलोड करने, सूचना भरने और उसे सम्मिट करने में बहुत समय लग रहा है। सरकार सभी रिटर्न समय से जमा कराना चाहती है लेकिन अभी तक सारे फार्म ही सिस्टम पर नहीं आए हैं। आइटम का क्लासीफिकेशन और कोड बार-बार बदल रहा है।
4- सरकारी विभागों में ठेकेदारी और जॉब वर्क करने वाले भी भ्रम में हैं। ऐसे लोगों को ये नहीं पता है कि उनका किस आइटम में कितना जीएसटी काटा जाना है। विभागीय अधिकारियों का जवाब है कि केंद्र सरकार के आदेश आने का इंतजार है। ऐसे में ठेकेदार अपना बिल नहीं बना पा रहे हैं।
सेल्स टैक्स को बदल कर वैट लागू करने के दौरान एक सुविधाजनक व्यवस्था दी गई थी। जिसमें पूर्व के सेल्स टैक्स और तत्कालीन वैट दोनों सिस्टम से रिटर्न जमा हो रहा था। जिससे व्यापारियों को उलझन नहीं हुई थी। जिसको जहां सुविधा हुई वहां रिटर्न जमा कर दिया। जब व्यापारी वैट में सुविधाजनक हो गए तो सेल्स टैक्स का सिस्टम पूरी तरह से बंद कर दिया गया। लेकिन वैट से जीएसटी लागू करने में ये सुविधा नहीं दी जा रही है, जिससे व्यापारियों में दहशत का माहौल हो रहा है। अगर रिटर्न जमा नहीं हुआ तो उनको जुर्माना न भरना पड़ जाए। जीएसटी के अधिकारी व्यापारियों और वकीलों के सवालों का जवाब तक नहीं दे पा रहे हैं। जीएसटी नेटवर्क ओवरलोड है, सिस्टम हैंग हो रहा है। जीएसटी फार्म अपलोड नहीं होते नियम कायदे पूरे नहीं हुए हैं। हर तीसरे दिन बदलाव करने से भी बहुत भ्रम हो गया है। अगर यही हाल रहा तो जीएसटी का पूरा सिस्टम बैठ जाएगा
-अवन कुमार सिंह सीए, अध्यक्ष सीए एसोसिएशन
पहले रिटर्न की अंतिम तारीख 10 अक्तूबर तक बढ़ी
पहली जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई का पहला रिटर्न 20 सितंबर तक जमा होना था। इस तारीख को बढ़ा कर 10 अक्तूबर कर दिया गया है। जुलाई का दूसरा रिटर्न 30 अक्तूबर तक जमा होगा। अगस्त के रिटर्न जमा करने की तारीख अभी तय नहीं है।