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अलीगढ़ : चंदा की मां बोलीं, दोषियों को दंड और परिवार को न्याय

Tue, 26 Apr 2022 01:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 01:39 AM IST
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Chanda's mother said, punishment to the guilty and justice to the family
मृतक चंदा की मां मुन्नी, बेटी कुलसुम, बेटा अनस और भाई रफीक। - फोटो : CITY OFFICE
शाहजमाल के इर्द-गिर्द वक्फ की जमीन पर अवैध कब्जे और जरायम में वर्चस्व की जंग में इस दोहरे हत्याकांड की नींव रखी गई थी। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि इस दोहरे हत्याकांड को ईद (18 जुलाई 2015) के छह दिन बाद अंजाम दिया गया और न्यायालय ने फैसला ईद (3 मई 2022) से आठ दिन पहले सुनाया है। इस संयोग पर चंदा की मां ने कहा है कि ये ऊपर वाले की ओर से दोषियों को दिया गया दंड है और परिवार को न्याय मिला है। यही बात नौशे के भाई ने कही। उनका कहना है कि हमेशा हमने कानून पर भरोसा रखा और आज न्याय मिला है।
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दोनों पक्षों के परिवार रहे दीवानी में मौजूद
चंदा-नौशे हत्याकांड का फैसला सोमवार को सुनाए जाने की तारीख नियत थी। इसे लेकर दोनों पक्षों के परिवार दोपहर से ही दीवानी परिसर में जमा थे। पुलिस भी सतर्क थी। जैसे ही फैसला सुनाया गया तो एक तरफ जहां हत्यारे परिवारों के चेहरे लटक गए और महिलाएं बिलखने लगीं। वहीं, दूसरी ओर मृतक के परिवारों के चेहरों की खुशी देखने लायक थी। खुशी के मारे उनके आंसू छलक आए थे।
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पैर में फ्रैक्चर के साथ जेल पहुंचा कफील
इस घटना में दोषी कफील पिछली तारीख पर पैर में फ्रैक्चर होने के कारण नहीं आ सका था। मगर अदालत द्वारा वारंट जारी किए जाने के कारण वह कोर्ट में उसी हालत में पहुंचा। उसके पैर में प्लास्टर था और दो लोग उसे पकड़कर चल रहे थे।
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नौशे के भाई रईस के अनुसार, शाहजमाल कब्रिस्तान के आसपास की आबादी वक्फ की संपत्तियों पर बसी हुई है। लोग ज्यादातर पट्टों के आधार पर रह रहे हैं। 2013 के आसपास इस जमीन के मुतवल्ली ग्यासुद्दीन सेक्रेटरी बनकर आ गए, जिन्होंने पट्टा धारकों से रुपये मांगना शुरू कर दिया। अपने पुराने आपराधिक रसूख के चलते दबंग छवि के नौशे ने रुपये देने से मना कर दिया। उसके कहने पर अन्य लोगों ने भी रुपये देने से इंकार कर दिया था। चूंकि, नौशे की अपनी बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान थी। इसलिए उसका इलाके में ठीकठाक प्रभाव था। इसे लेकर 2013-14 में ग्यासुद्दीन से विवाद शुरू होने लगा। विवाद में नौशे को मुकदमे में जेल तक जाना पड़ा। बाद में ग्यासुद्दीन ने नौशे की हत्या का एलान कर दिया। तत्कालीन एसएसपी के सामने नौशे ने पेश होकर पूरा वाकया बताया। उस समय पुलिस ने कुछ निगरानी भी रखी। मगर बात जब ठंडी हो चली थी। तभी ग्यासुद्दीन ने मामूद नगर इलाके के नए अपराधियों को इस हत्या की सुपारी दे दी। ये लोग जैसे ही एक अन्य अपराध से छूटकर आए और इन्होंने नौशे की हत्या का प्लान बना लिया। हालांकि हत्या सिर्फ नौशे की होनी थी, मगर घटना वाली रात चंदा साथ था। इसलिए वह भी मारा गया।
उभरते अपराधियों ने अपना रसूख जमाने के लिए की हत्या
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि अपने जमाने में नौशे व चंदा का भी जरायम की दुनिया में रसूख था। उनके सामने इस इलाके में कोई बोलता नहीं था। उम्र के इस पड़ाव पर आने के बाद वे व्यापार में लग गए और पुलिस के साथ मिल बैठकर रहने लगे। इसी बीच 38 वर्षीय आसिफ, 32 वर्षीय अहसान, 28 वर्षीय वकील, 30 वर्षीय भूरा, 28 वर्षीय कफील नए-नए अपराध की दुनिया में उतरे थे। सभी एक-एक दो दो अपराधों में जेल गए थे। उन्होंने अपना रसूख जमाने के लिए ग्यासुद्दीन का ऑफर स्वीकार लिया और घटना को अंजाम दिया।
नौशे को लग गई थी खुद पर हमले की भनक
जिस दिन ये घटना हुई, उस दिन नौशे को भनक लग गई थी कि आज उन पर हमला हो सकता है। इसके चलते वे शादी समारोह में अपने साथ चंदा को लेकर गया था। मगर हमलावरों ने दोनों को बचने तक का मौका नहीं दिया।
दोनों की पारिवारिक पृष्ठभूमि
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, नौशे पांच भाइयों में तीसरे नंबर का था। बड़े भाई रईस के अनुसार, 40 वर्षीय नौशे ने नसीम के साथ प्रेम विवाह किया था। वह तीन बच्चों की मां थी। जिस राजा ने मुकदमा दर्ज कराया था, वह नौशे का सौतेला बेटा था। नसीम उसे पांच माह का अपने साथ लाई थी। नौशे उससे बहुत प्यार करता था। नौशे के दो बच्चे हुए, जिनमें एक का नाम रहमत और दूसरे का फाजिल है। वह अपनी मां के साथ ही रहते हैं। इसी तरह चंदा के भाई रफीक के अनुसार 35 वर्षीय चंदा की हत्या के वक्त उसकी पत्नी रुकसाना गर्भवती थी। उसके पहले से चार बच्चे थे। भाई की हत्या के बाद पत्नी का दुख नहीं देखा गया। इसे देखते हुए उसकी शादी बुआ के बेटे के साथ कर दी गई। चंदा और रुकसाना के पांच बच्चे हैं। बच्चों का आना-जाना घर पर लगा रहता है। दो बच्चे उनके पास ही रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।
नौशे की बीवी की वजह से हुई न्याय में देरी : रईस
नौशे के भाई रईस अहमद ने बताया नौशे की पत्नी नसीम ने जिस व्यक्ति से शादी की है, उस पर कई मुकदमे हैं। बड़ा बेटा रहमत नौशे की हत्या का बदला लेने के लिए एक गैंग में भी शामिल हो गया था। इसके चलते उस पर मुकदमा दर्ज हो गया। बाद में रहमत को अपने पास बुला लिया। उन्होंने एलान किया कि हत्या का बदला हत्या से नहीं बल्कि कानून से लिया जाएगा। उसी का नतीजा है कि आज अदालत ने इंसाफ दिया। हालांकि उसकी बीवी ने मुकदमे में देरी का पूरा प्रयास किया। मगर हम लोग एसएसपी से लेकर हाईकोर्ट तक गए। आरोपी नए सिरे से गवाही कराना चाहते थे। मगर हमने ऐसा नहीं होने दिया।
- इस हत्याकांड में पुलिस पर बेहद दबाव था। आपराधिक, दबंग छवि के नौशे चंदा के समर्थकों ने जमकर बवाल किया था। पुलिस ने किसी तरह प्रयास कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया और गवाही तथा साक्ष्य पूरे कराए।

- विनोद यादव, इंस्पेक्टर/मुकदमा विवेचक
- अदालत ने रात के अंधेरे में हुई घटना में बिना साक्ष्य व बचाव पक्ष की दलीलों को ध्यान दिए बिना सजा सुनाई है। हम इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
- संदीप राय सक्सेना, बचाव पक्ष के अधिवक्ता
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