Snakebite: बरसात में बढ़े सांप डसने के मामले, एक माह में 19 को डसा, तीन महिलाओं की मौत, गांव में ज्यादा घटनाएं
जानकारों का कहना है कि बरसात के मौसम में बिलों में पानी भर जाने से सांप बाहर आ जाते हैं। यही वजह है कि सामान्य दिनों की तुलना में बरसात में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
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बरसात के मौसम में सर्पदंश के मामले बढ़ रहे हैं। एक जून से सात जुलाई तक 19 लोगों को सांप ने डसा है। इनमें 12 को जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है। इनमें बरला गांव में सांप के डसने से इंद्रा देवी की मौत 2 जुलाई को हुई है जबकि बाससुदामा गांव में पूनम देवी की मौत 24 जून को हुई थी। वहीं अकराबाद के एक गांव में 12 जून को घर में काम करते वक्त दर्शनी को सांप ने डसा था जिससे उसकी मौत हो गई थी।
जानकारों का कहना है कि बरसात के मौसम में बिलों में पानी भर जाने से सांप बाहर आ जाते हैं। यही वजह है कि सामान्य दिनों की तुलना में बरसात में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इस समय खेतों में ज्यादा सांप नजर आ रहे हैं। सर्पदंश की घटनाएं भी ग्रामीण क्षेत्रों में ही ज्यादा हो रही हैं। जून माह में जिला अस्पताल की इमरजेंसी तक सर्पदंश के 12 मामले पहुंचे। इनमें से दो का अस्पताल में इलाज किया गया जबकि 10 को मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया है।
डॉ. फारुख अंसारी ने बताया कि जो भी मामले सर्पदंश से संबंधित आते हैं, पहले उनका परीक्षण होता है। सर्पदंश के लक्षण आने में छह घंटे लगते हैं। ऐसे में अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं होने के कारण मेडिकल कालेज रेफर किया जा रहा है। बिना सर्पदंश के लक्षण के एंटी स्नेक वेनम (एसवी) नहीं लगाया जा सकता है। अस्पताल में 154 वायल एसवी के मौजूद हैं।
डीडीयू अस्पताल के सीमएस डॉ. एमके माथुर ने बताया 21 मई से 20 जून तक अस्पताल में सर्पदंश के छह केस आए। जिसमें से दो मरीजों को अस्पताल में उपचार दिया गया। बाकी चार को मेडिकल कालेज रेफर किया गया। अभी तक 40 वायल खर्च हुए हैं। अस्पताल में करीब 450 एएसवी के वायल मौजूद हैं।
जेडी हेल्थ डॉ. मोहन झा ने बताया कि सर्पदंश घातक हो सकता है। सभी सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध है। सर्प दंश वाले स्थान पर दांतों के हल्के या स्पष्ट दिखने वाले निशान व जख्म होते हैं, जो सूजन से कई बार ढक जाते है। इनमें दंश के स्थान पर तीव्र जलन, सूजन और दर्द होना, आवाज का बैठना, ज्यादा नींद लगना, तनाव, मिचली व उल्टी होना के मुख्य लक्षण हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचा कर उपचार कराएं।- डॉ मोहन झा, जेडी हेल्थ, अलीगढ़
हर अस्पताल में है एंटी स्नेक वेनम
- सीएचसी गोंडा- एएसवी वायल (एंटी स्नेक वेनम) है। मगर साल भर से कोई मरीज दर्ज नहीं हुआ।
- सीएचसी बिजौली- एएसवी वायल है। मगर साल भर से कोई मरीज दर्ज नहीं हुआ।
- सीएचसी गंगीरी-एएसवी है।
- सीएचसी खैर-एएसवी है।
- सीएचसी चंडौस-एएसवी है।
- सीएचसी गभाना-एएसवी है।
- सीएचसी टप्पल-एएसवी है।
- सीएचसी अतरौली-एएसवी है।
- सीएचसी जवां-एएसवी है।
सांप के डसने पर क्या ना करें
- पीड़ित को अत्यधिक दबाव या घबराहट न होने दें।
- सांप पर हमला करने या उसे मारने की कोशिश ना करें।
- घाव को बांध कर रक्त संचार रोकने का प्रयास न करें।
- रोगी को पीठ के बल न लिटाएं, इससे वायुमार्ग में रुकावट हो सकती है।
- पारंपरिक तरीकों से उपचार करने का प्रयास न करें।
झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें, तत्काल पहुंचे अस्पताल
अगर कहीं भी किसी को सांप डसता है तो तत्काल उसे अस्पताल लेकर जाएं। यहां चिकित्सक परीक्षण करने के बाद एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाएंगे। कई बार झाड़फूंक के चक्कर में लोगों की तबीयत बिगड़ जाती है। मौत तक हो जाती है।