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कहीं दवाओं का बंपर स्टाक, कहीं भटक रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Sun, 18 Jun 2017 02:32 AM IST
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स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण करतीं एडी हैल्थ डाॅ. गीता प्रधान।
- फोटो : Amar Ujala
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सासनी गेट स्थित ईएसआई अस्पताल में दवाओं का बंपर स्टाक मौजूद है, लेकिन मरीजों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा के निर्देश पर अपर निदेशक स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण डा. गीता प्रधान ने ईएसआई अस्पताल में छापा मारा तो उन्हें गंभीर खामियां मिलीं। कमिश्नर की सलाह पर अब ईएसआई अस्पताल की दवाएं जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में भेजी जाएंगी।
अपर निदेशक डॉ. गीता प्रधान ने बताया कि शुक्रवार को मंडलायुक्त की ओर से अस्पताल की स्थिति जानने के लिए कहा गया। इस पर अस्पताल जाकर उन्होंने निरीक्षण किया। अस्पताल में दवाओं का स्टाक भरा हुआ है, लेकिन मरीजों को दवाएं नहीं बांटी जा रही हैं। अस्पताल का जनरेटर खराब है। मरीज गर्मी से बिलबिला रहे थे। डाक्टर निर्धारित ड्रेस में नहीं थे। वार्डों में गंदगी का भरमार है। इन सभी बातों को दृष्टिगत रखते हुए निर्णय लिया गया है कि दूसरे सरकारी अस्पताल में यहां से दवाएं भेजी जाएं ताकि वहां पर दवाओं की किल्लत दूर हो सके। कहा कि ईएसआई अस्पताल सही तरह से काम करे तो सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में काफी हद तक कमी आ सकती है।
बिना दवाओं के भटक रहे मरीज
मरीजों का सस्ता और सुलभ उपचार के दावे की हकीकत कुछ और ही है। सरकारी अस्पताल में पूरी दवाएं न होने से मरीजों का सही इलाज ही नहीं मिल पा रहा है। शनिवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में मरीजों को काफी देर लाइन में लगने के बाद दवा के काउंटर से पूरी दवाएं ही नहीं मिलीं। आधी दवाएं देने के बाद काउंटर पर डॉक्टर की लिखी स्लिप भी रख ली और बाद में दवा ले जाने के लिए कह दिया। थोड़ी देर बाद जब मरीज पहुंचे तो स्लिप न होने पर उन्हें दवा ही नहीं दी गई।
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हालत यहां तक बदतर थे कि हड्डी या ज्वाइंट पेन का उपचार कराने पहुंचे मरीजों को थोड़ी ही देर बाद ही दर्द निवारक जैल (मरहम) देने से मना कर दिया गया। मरीजों के हंगामा करने पर काउंटर पर कह दिया कि स्टोर वाले ही दवा नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा दर्द निवारक दवाएं भी पूरी नहीं दी गई।
इस संबंध में जब हड्डी रोग विशेषज्ञ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मरीज उनसे दवाएं न मिलने की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन पूरी कोशिश है कि सभी को दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
मरीजोें के हित में डॉक्टर्स सीएमएस को लिखा पत्र
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिकित्सकों ने अस्पताल में पूरी दवाएं न मिलने पर सीएमएस को हस्ताक्षर कर पत्र दिया है। इसमें डॉक्टर्स ने मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा है। चिकित्सकों का कहना है उनसे बाहरी दवाएं न लिखने के लिए शपथपत्र देने की बात कही गई है, इसका विरोध करते हुए चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश दवाएं, उपकरण अस्पताल में मौजूद ही नहीं हैं। केवल कुछ गिनीचुनी दवाओं से हजारों मरीजों का इलाज करना संभव नहीं है। विभाग पहले लिखित में आश्वस्त करे कि मरीजों के हित में जो भी दवा या उपकरण की जरूरत होगी, उसे अस्पताल में उपलब्ध कराएगा या लोकल परचेज कराएगा।
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अपर निदेशक डॉ. गीता प्रधान ने बताया कि शुक्रवार को मंडलायुक्त की ओर से अस्पताल की स्थिति जानने के लिए कहा गया। इस पर अस्पताल जाकर उन्होंने निरीक्षण किया। अस्पताल में दवाओं का स्टाक भरा हुआ है, लेकिन मरीजों को दवाएं नहीं बांटी जा रही हैं। अस्पताल का जनरेटर खराब है। मरीज गर्मी से बिलबिला रहे थे। डाक्टर निर्धारित ड्रेस में नहीं थे। वार्डों में गंदगी का भरमार है। इन सभी बातों को दृष्टिगत रखते हुए निर्णय लिया गया है कि दूसरे सरकारी अस्पताल में यहां से दवाएं भेजी जाएं ताकि वहां पर दवाओं की किल्लत दूर हो सके। कहा कि ईएसआई अस्पताल सही तरह से काम करे तो सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में काफी हद तक कमी आ सकती है।
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बिना दवाओं के भटक रहे मरीज
मरीजों का सस्ता और सुलभ उपचार के दावे की हकीकत कुछ और ही है। सरकारी अस्पताल में पूरी दवाएं न होने से मरीजों का सही इलाज ही नहीं मिल पा रहा है। शनिवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में मरीजों को काफी देर लाइन में लगने के बाद दवा के काउंटर से पूरी दवाएं ही नहीं मिलीं। आधी दवाएं देने के बाद काउंटर पर डॉक्टर की लिखी स्लिप भी रख ली और बाद में दवा ले जाने के लिए कह दिया। थोड़ी देर बाद जब मरीज पहुंचे तो स्लिप न होने पर उन्हें दवा ही नहीं दी गई।
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हालत यहां तक बदतर थे कि हड्डी या ज्वाइंट पेन का उपचार कराने पहुंचे मरीजों को थोड़ी ही देर बाद ही दर्द निवारक जैल (मरहम) देने से मना कर दिया गया। मरीजों के हंगामा करने पर काउंटर पर कह दिया कि स्टोर वाले ही दवा नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा दर्द निवारक दवाएं भी पूरी नहीं दी गई।
इस संबंध में जब हड्डी रोग विशेषज्ञ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मरीज उनसे दवाएं न मिलने की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन पूरी कोशिश है कि सभी को दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
मरीजोें के हित में डॉक्टर्स सीएमएस को लिखा पत्र
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिकित्सकों ने अस्पताल में पूरी दवाएं न मिलने पर सीएमएस को हस्ताक्षर कर पत्र दिया है। इसमें डॉक्टर्स ने मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा है। चिकित्सकों का कहना है उनसे बाहरी दवाएं न लिखने के लिए शपथपत्र देने की बात कही गई है, इसका विरोध करते हुए चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश दवाएं, उपकरण अस्पताल में मौजूद ही नहीं हैं। केवल कुछ गिनीचुनी दवाओं से हजारों मरीजों का इलाज करना संभव नहीं है। विभाग पहले लिखित में आश्वस्त करे कि मरीजों के हित में जो भी दवा या उपकरण की जरूरत होगी, उसे अस्पताल में उपलब्ध कराएगा या लोकल परचेज कराएगा।