माया के ‘आशीर्वाद’ से जय-वीरू ने ‘हुकूमत’ को हराया
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38 निर्विरोध समेत सूबे में कुल 59 सीटें जीतने वाली समाजवादी पार्टी अलीगढ़ और हाथरस में बसपा की बादशाहत को नहीं तोड़ सकी। माया के ‘आशीर्वाद’ से जय-वीरू ने ‘हुकूमत’ को पटखनी दे दी। सपा की आंधी में भी बसपा सुप्रीमो मायावती के जय (पूर्व कबीना मंत्री एवं एमएलसी ठा.जयवीर सिंह) और वीरू (पूर्व कबीना मंत्री रामवीर उपाध्याय) की जोड़ी ने अपना दबदबा बनाए रखा।
जयवीर अपने भतीजे नीटू और रामवीर अपने भाई विनोद उपाध्याय को जीत दिलाने में कामयाब रहे। खास बात यह रही कि दोनों ही सीटों पर बसपा और सपा में सीधा मुकाबला था। जिसमें बसपा ने बाजी मार ली।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में जीत के लिए नेताओं ने साम-दाम-दंड-भेद का प्रयोग किया। चार सीटों के साथ सूबे में तीसरे नंबर पर रहने वाली बसपा के सामने अलीगढ़ और हाथरस में अपनी साख बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं था।
अलीगढ़ में बसपा के कद्दावर एमएलसी ठा. जयवीर सिंह की आंधी चलना पहले ही तय माना जा रहा था। चुनाव के दिन सुबह नौ बजे जब उनके भतीजे और जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदार उपेंद्र सिंह नीटू 38 सदस्यों के साथ कलेक्ट्रेट पर पहुंचे तो सब दंग रह गए। यहां 11 बजे चुनाव होते ही पूरी स्थिति साफ हो गई। इसके बाद 4 वोट और बसपा को मिले। जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी सपा विधायक राकेश सिंह की पत्नी डॉ. नीतू सिंह महज 9 वोटों पर ही सिमट गईं। इधर, हाथरस में चुनाव से एक दिन पहले प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी ओमवती यादव (बुआ) पर जानलेवा हमले के आरोप में फंसे रामवीर के भाई विनोद उपाध्याय की जीत को लेकर संशय बना हुआ था। चुनाव परिणाम आने तक स्थिति कशमकश वाली थी। मात्र एक वोट से जीत हासिल कर जहां बसपा ने पांचवीं वार परचम फहराया वहीं पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय अपनी बादशाहत कायम रखने में कामयाब रहे। सूबे में चार सीटें हासिल करने वाली बसपा ने दो सीटें अलीगढ़ और हाथरस में जीती हैं। वहीं शामली में बसपा समर्थित संतोष देवी (12) ने सपा की शेफाली चौहान (7) को हराया है। वहीं मिर्जापुर में भी बसपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।