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भाजपा चल रही हर वो दाव... कैसे भी दूर हो पांच साल का वनवास

Mon, 31 Oct 2022 01:42 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 31 Oct 2022 01:42 AM IST
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BJP is going on every claim ... how far away five years of exile
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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उत्तर प्रदेश का निकाय चुनाव होने जा रहा है। लगातार बीस साल से जिस अलीगढ़ नगर निगम पर भाजपा का कब्जा था, उस पर 2017 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। प्रदेश की सत्ता में रहते इस हार पर भाजपा संगठन पूरे पांच साल बिलबिलाया रहा। मगर इस चुनाव में भाजपा हर वो जतन कर रही है कि कैसे भी पांच साल का वनवास दूर हो।
इसी कड़ी में अलीगढ़ नगर निगम को सबसे हॉट श्रेणी में रखा गया है और पूरा संगठन एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। एक-एक कदम फूंक-फूंककर रखा जा रहा है। कहीं कोई गलती न हो जाए और कोई ऐसी कमी न रह जाए, जिसकी वजह से कल को पछताना पड़े। इसी सोच के साथ संगठन चुनाव लड़ने और जीतने की दृष्टि से लगा हुआ है। बाकी परिणाम भविष्य तय करेगा?
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पिछले परिणाम ने दिया सबक
ये जगजाहिर है कि अलीगढ़ शहर में चुनाव धार्मिक ध्रुवीकरण के आधार पर होता रहा है। एक तरफ भाजपा और दूसरी ओर भाजपा को हराने का दमखम रखने वाले सशक्त उम्मीदवार का ही चयन कर मतदान किया जाता है। पिछले ढाई दशक के सियासी इतिहास में 2017 में यह पहला मौका था, जब शहर की दोनों सीट शहर-कोल पर भाजपाई विधायक चुने गए।
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इसी का परिणाम रहा कि भाजपा विरोधी खेमे ने अपने अस्तित्व व नेतृत्व की वापसी की खातिर नगर निगम चुनाव में एड़ी चोटी का जोर लगाया। मेयर पद मुस्लिम-अनुसूचित गठजोड़ से बसपा के खाते में डालकर भाजपा से छीन लिया। इस हार के बाद महानगर व जिला स्तर से लेकर प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व तक बड़ी छीछालेदार हुई। हालांकि भाजपा की हार अलीगढ़ के साथ मेरठ में भी हुई थी। मगर उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ इकलौता ऐसा निगम था, जहां भाजपा लगातार जीतती थी। इसके ज्यादा मायने निकाले गए।
दूर की जा रहीं गलतियां, जीतने के लिए लड़ेंगे हम : सुनील
भाजपा द्वारा नगर निगम चुनाव के लिए संयोजक बनाए गए संगठन के वरिष्ठ नेता सुनील पांडेय कहते हैं कि नगर निगम चुनाव 2017 में हार का बड़ा कारण वोटों का छितराना था। इस बार ऐसा न हो, इसके लिए अभी से वार्ड व बूथ स्तर पर हमारी टीमें काम कर रही हैं। 28 व 29 अक्तूबर को हर बूथ व वार्ड स्तर पर बैठकें कर मतदाता सूचियों का मिलान हर मकान व वोटर वार किया गया है। अब फिर एक बैठक होनी है।
जहां जो कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। बाकी राजनीतिक स्तर पर यह देखा जा रहा है कि किस क्षेत्र में किस वर्ग का प्रभुत्व है। वहां उसी अनुसार वार्ड प्रत्याशी चयनित किए जाएंगे। वार्ड प्रत्याशी मेयर प्रत्याशी की जीत में बड़ा सहायक होता है। उसके अनुसार ही वार्ड प्रत्याशी चयनित होंगे। किसी भी स्तर पर कमी नहीं होने दी जाएगी। दूसरे दलों की रणनीति से हमें कोई फर्क नहीं। हम अपना पूरा फोकस किए हुए हैं। मतदान प्रतिशत भी बढ़े, यह भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। बाकी जो छोटे-मोटे कारण रहे हैं, उन पर भी गौर किया जा रहा है।
-20 वर्ष शहर विधायक सीट पर रहा गैरभाजपाई कब्जा -1996 सपा से अब्दुल खालिक, 2002 कांग्रेस से विवेक बंसल, 2007 सपा से जमीरउल्लाह, 2012 सपा से जफर आलम।
इस गलती को सुधार पर सर्वाधिक फोकस
भाजपा संगठन ने अपनी समीक्षा में माना था कि 2017 के नगर निगम चुनाव में वोटरों को अपने बूथ या वार्ड पर वोटर लिस्ट में अपने नाम नहीं मिले थे। यह सर्वाधिक शिकायत आई थी। मसलन कोई स्वर्ण जयंती नगर में रहता है और उसका वोट ज्ञान सरोवर के बूथ पर है।

इस वजह से भाजपा समर्थित वोटरों का मतदान प्रतिशत बेहद कम रहा और 10 हजार के करीब वोटों से भाजपा को बसपा से हार का सामना करना पड़ा। इस बार इस गलती को पहले से सुधारने के लिए एक-एक वोटर से वार्डवार संपर्क शुरू कर दिया गया है। वोटर लिस्ट लेकर भाजपा की बूथवार टीमें सक्रिय हैं और यह देख रही हैं कि किसका वोट कहां है और नहीं है तो क्यों नहीं है। गलत बूथ पर है तो उसे दुरुस्त कराया जा रहा है।
--1996 में सृजित नगर निगम में अब तक के मेयर--
1997--प्रथम मेयर आशुतोष वार्ष्णेय भाजपा
2002--द्वितीय मेयर सावित्री वार्ष्णेय भाजपा
2007--तृतीय मेयर आशुतोष वार्ष्णेय भाजपा
2012--चतुर्थ मेयर शकुंतला भारती भाजपा
2017--पांववें मेयर मोहम्मद फुरकान बसपा
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