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दस साल में एक भी यूनिट बिजली नहीं बनी एटूजेड प्लांट में

Mon, 07 Oct 2019 01:57 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Oct 2019 01:57 AM IST
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bijali unit
एटूजेड प्लांट में जमा कूड़े का ढेर। - फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा
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शहर के कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के मकसद से एक दशक पहले स्थापित की गई एटूजेड कंपनी की मथुरा रोड स्थित इकाई से पिछले दस साल में एक यूनिट तक बिजली का उत्पादन नहीं हुआ है।
इसके अलावा इस इकाई से पूरे होने वाले अन्य उद्देश्य भी अटके पड़े हैं। इसके विपरीत कूड़े के उठान में प्रतिदिन 100 टन का फर्जीवाड़ा हो रहा है, जिसके लिए नगर निगम 754 रुपये प्रति टन के हिसाब से कंपनी को भुगतान करता है। इस भुगतान के अनुसार बीते पांच साल में कंपनी को लगभग 13 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है लेकिन शहर में कूड़ा उठाने की स्थिति नहीं बदली है। मुख्यमंत्री बनने के तीन महीने ही योगी आदित्यनाथ पांच जून 2017 को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर एटूजेड प्लांट घूमने आए थे।
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एटूजेड प्लांट में बिजली बनाने की प्रक्रिया भी सीएम ने समझी थी। इसी दिन अलीगढ़ से कूड़ा प्रथक्करण योजना की शुरुआत हुई थी, जिसमें हरे रंग के कूड़ेदान में गीला और नीले रंग के कूड़ेदान में सूखा कूड़ा रखने का आह्वान हुआ था। सीएम के आने के बाद से लगभग दो साल चार महीने का समय बीत चुका है लेकिन प्लांट में एक भी यूनिट बिजली नहीं बन सकी है।
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अब मामले की शिकायत जनहित मानवाधिकार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पांडेय ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि एटूजेड कंपनी को अलीगढ़ में नगर निगम ने सन 2009 में मथुरा रोड पर करोड़ों रुपये की जमीन दी। उस समय कंपनी ने दावा किया था कि अगर एक व्यक्ति के हाथ से कागज गिरेगा तो उसे उठाने के लिए तीन लोग मौजूद होंगे, लेकिन अब यह प्लांट घोटाले का कारखाना बन कर रह गया है। पत्र में पूरे प्लांट की और इसकी कार्यशैली की गहराई से जांच करने की मांग की गई है।

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शिकायती पत्र की मुख्य बातें
-प्लांट का मकसद था कि जो भी कूड़ा उठेगा उससे खाद बनाएंगे। उसके बाद बिजली बनाएंगे। कूड़े की राख से ईंट बनाएंगे।
-पिछले दस वर्ष में एक यूनिट बिजली का भी उत्पादन नहीं हुआ है। कूड़े से बनी खाद भी जहां से आर्डर हुए वापस आ जाती है।
-प्रतिदिन 450 टन कूड़ा शहर से उठाकर प्लांट पर जाता है। इसमें 100 टन कूड़ा फर्जी तरीके से कागजों पर दिखाया जाता है।
-745 रुपये प्रतिटन के हिसाब से नगर निगम एटूजेड को कूड़ा उठाने के लिए भुगतान करता है। (एक दिन में 7.45 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा)
-कुछ दिन पहले एटूजेड कंपनी ने अपने दो हजार डंपर कूड़ा 500 रुपये प्रति डंपर की दर से बेच दिया।
-यहां पर कूड़ा तौलने के कांटे का कैलीबर नहीं है। कैलीबर से किसी भी कोने पर खड़ा होने पर वजन बराबर दिखता है।
-ट्रैक्टर में अधिक से अधिक टन कूड़ा ढाई टन तक आता है। यह लोग उसे चार टन तक दिखाते हैं।
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पिछले पांच साल से यहां पर काम कर रहा हूं। प्लांट का मकसद वेस्ट कंपोस्ट पर काम करना था। जहां तक बिजली उत्पादन का सवाल है तो वह उनके समय में नहीं हो रहा था। आने वाले समय में स्वीडन की कंपनी इकरो टोस यह वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बराबर में लगाएगी, जिसे हम कूड़ा देंगे। यह शहर के लिए अच्छी शुरुआत है।
- समय सिंह, प्लांट हेड।
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