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Aligarh News: बड़े शोरूम संभले, छोटे सुनार डगमगाए.. बोले- न लगा टांका, न हुई बोहनी

Tue, 19 May 2026 02:46 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़ Updated Tue, 19 May 2026 02:46 AM IST
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Big showrooms were steadfast, small goldsmiths were shaken
फुलपुर चौराहे पर सूनी पड़ी सोनार की दुकान। संवाद 
साहब, आठ दिन से दुकान पर एक ग्राहक नहीं आया। न टांका लगा, न बोहनी हुई। कारीगर भी खाली बैठे हैं...अब सबसे बड़ी चिंता उन्हें मेहनताना देने की है। फूल चौराहा स्थित छोटे सराफा कारोबारी सोनू वर्मा अपनी दुकान के बाहर कुर्सी पर बैठे यही कहते नजर आए। सामने कांच की अलमारी में सजे जेवर चमक रहे थे, लेकिन दुकान में ग्राहक नहीं थे।
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सोमवार दोपहर जब संवाददाता फूल चौराहा स्थित सराफा बाजार पहुंचा तो वहां आम दिनों जैसी चहल-पहल गायब थी। जिन गलियों में आमतौर पर हथौड़ी की आवाज, मशीनों की खटर-पटर और ग्राहकों की भीड़ दिखाई देती थी, वहां सन्नाटा पसरा था। अधिकांश दुकानदार अपनी दुकानों के बाहर बैठे ग्राहकों का इंतजार कर रहे थे। कई दुकानों पर कारीगर हाथ पर हाथ धरे बैठे मिले।
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कारोबारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना नहीं खरीदने की अपील और लगातार बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। बड़े शोरूम किसी तरह स्थिति संभाल ले रहे हैं, लेकिन छोटे सुनारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सोनू वर्मा बताते हैं कि पहले उनकी दुकान पर रोजाना मरम्मत, टांका और छोटे ऑर्डर का काम चलता रहता था। इससे 800 से 1000 रुपये तक की आमदनी हो जाती थी, लेकिन अब दिनभर में 100 रुपये भी निकलना मुश्किल हो गया है।
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रोजाना एक करोड़ का कारोबार, अब ठप
फूल चौराहा सराफा बाजार में करीब 500 छोटी दुकानें हैं। यहां अधिकांश कारोबार छोटे ऑर्डर, पुराने जेवरों की मरम्मत और कारीगरी पर निर्भर है। स्वर्णकार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हरिओम रघुवंशी बताते हैं कि आठ दिन पहले तक इस बाजार में रोजाना करीब एक करोड़ रुपये का कारोबार होता था, लेकिन अब यह लगभग ठप हो चुका है।


उन्होंने कहा कि बड़े ज्वैलर्स के यहां जब ऑर्डर कम होते हैं तो उसका सीधा असर छोटे कारीगरों और दुकानदारों पर पड़ता है। हालात यह हैं कि टांका लगाने और जेवर चमकाने वाले कारीगरों के पास भी काम नहीं बचा।


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बाजार से जुड़े कारीगरों का कहना है कि शादी सीजन खत्म होने और सोने की रिकॉर्ड कीमतों ने पहले ही बाजार कमजोर कर दिया था। अब ग्राहकों के कदम और रुक गए हैं। बाजार में करीब 100 कारीगर काम करते हैं, जिन्हें प्रतिदिन काम के हिसाब से भुगतान मिलता है।


काम ठप होने से उनकी दिहाड़ी भी बंद हो गई है। एक कारीगर ने यहां तक कहा कि पहले सुबह से रात तक काम रहता था। अब पूरा दिन दुकान में बैठे रहते हैं। डर इस बात का है कि अगर यही हाल कुछ और दिन रहा तो घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।
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