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छोटे कदमों से भर रहे बड़े डग
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Tue, 14 Nov 2017 01:49 AM IST
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himadri dheeraji
- फोटो : Amar Ujala
उम्र भले ही कच्ची हो, लेकिन उनके हौसले फौलाद की तरह पक्के हैं। ये बच्चे अपनी कामयाबी की कलम से एक ऐसी लकीर खींचना चाहते हैं, जो एक नजीर बन जाए। नजीर बन भी रही है। हिमाद्री, आदित्य अभिनय में नई इबारत लिख रहे हैं, तो फैज अपने सुरों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। वहीं, जिशनू रंग और कूची से सफलता की तस्वीर बना रहे हैं। बाल दिवस पर इन्हीं बच्चों से उनके सपनों को जानने की कोशिश की गई। आप भी पढ़िये उनकी अलहदा सोच को।
हवाओं से बात करने का जुनून
शहर की शान हिमाद्री धीरज सेंट फिदेलिस में कक्षा छह में पढ़ रही हैं। हिमाद्री के सिर के ताज में कामयाबी के कई हीरे जड़ चुके हैं। हालांकि, अभिनय के क्षेत्र में उम्र के लिहाज से वह काफी नाम कमा चुकी हैं। लेकिन उनमें हवाओं से बात करने का जुनून है, इसलिए वह पायलट बनना चाहती हैं। हाल ही में उनकी फिल्म देसी रेसलर देशभर रिलीज हो चुकी है। कई अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी हैं। उनके अभिनय की प्रशंसा सनी देओल, गोविंदा, अजय देवगन तक कर चुके हैं। पत्रकार पंकज धीरज व काजल धीरज की छोटी बेटी हिमाद्री को क्लासिकल, सेमी क्लासिकल शैली में महारत हासिल है।
कार्टून से लाएंगे होठों पर मुस्कान
विजडम पब्लिक स्कूल में कक्षा चार के छात्र जिशनू गुप्ता एक नई लकीर खींचना चाहते हैं। महज साढ़े तीन साल की आयु में कूची और ड्राइंग शीट से प्यार करने वाले जिशनू जब पेंटिंग दिखाते हैं, तो लोग यकीन नहीं कर पाते कि यह पेेंटिंग उन्होंने ही बनाई है। ज्ञान सरोवर सौ फुटा के निवासी हर्ष व रेनू गुप्ता के बेटे जिशनू का पेंटिंग में कोई गुरु नहीं है। वह खुद ही यूट्यूब से सीखकर अपने हुनर में और इजाफा कर रहा है। उसे कॉमिक्स स्टोरी बनाना अच्छा लगता है। वह अमेरिका में कार्टून बनाने वाली एक बड़ी कंपनी में काम करने का इच्छुक है। जिशनू पेंटिंग में कई इनाम भी जीत चुका है।
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उम्र से तीन गुनी जीती ट्रॉफी
एकता नगर के मोहसिन सैफी के बेटे फैज मोहसिन की जान गायकी में बसती है। एएमयू के मिंटो सर्किल के कक्षा छह के छात्र फैज का ख्वाब सिंगर अरिजित सिंह की तरह सफलता हासिल करना है। उनकी गायकी के संगीत प्रेमी भी कायल हैं। फैज को बचपन से ही गाना गाने का शौक है। फैज इसी क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाएंगे। 11 साल के फैज अब तक 32 ट्रॉफी जीत चुके हैं। अलीगढ़ ही नहीं, मेरठ और मोदीनगर में भी अपनी गायकी की खुशबू बिखेर चुके हैं। फैज मास्टर ऑफ अलीगढ़ में सिंगिंग का खिताब चुके हैं। फैज कलर्स के राइजिंग स्टार्स में भी अपनी आवाज का जादू दिखा चुके हैं। कला प्रेमी उनमें असीम संभावनाएं देख रहे हैं।
अभिनय के क्षेत्र में नाम कमाने की चाहत
यूं तो आदित्य माहेश्वरी के खानदान में अभिनय क्षेत्र से किसी का कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए उनका भी रुझान इस ओर नहीं रहा। चूंकि आदित्य के पिता संजय माहेश्वरी की दोस्ती ‘भाबी जी घर पर हैं’ के स्क्रिप्ट राइटर मनोज संतोषी से है। इसी नाते मनोज से संजय का मिलना जुलना लगा रहता है। एक दिन मनोज सराय मान सिंह स्थित संजय के घर आए हुए थे। उन्होंने आदित्य को देखा और उनके मन में उसे सीरियल में लेने का आइडिया आ गया। लड्डू के दोस्त के किरदार में आदित्य नजर आए। बाबूलाल जैन इंटर कॉलेज में कक्षा नौ में पढ़ रहे आदित्य का सपना अभिनय के क्षेत्र में नाम कमाना है और शहर का नाम रोशन करना है।
गुगली पर बल्लेबाज को देंगे गच्चा
महानगर के शताब्दी नगर निवासी चौधरी उदयवीर सिंह के बेटे विशाल चौधरी ने अंडर-16 क्रिकेट कैंप में तीन विकेट चटकाकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपने तरफ आकर्षित कराया। दाहिने हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज विशाल सात वर्ष की आयु से क्रिकेट खेल रहे हैं। उनकी गुगली पर बल्लेबाज गच्चा खा जाते हैं। इंजीनियर्स कॉलोनी हाईस्कूल में पढ़ने वाले विशाल का ख्वाब देश के लिए खेलना है। यूपी अंडर-14 कैंप में उनके चुने जाने की संभावना प्रबल हैं। कोच मसूदुज्ज्फर अमीनी भी विशाल की गेंदबाजी से संतुष्ट हैं। वह कहते हैं कि अगर इसी तरह वह अपने खेल पर फोकस करता रहा, तो काफी आगे तक जाएगा।
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हवाओं से बात करने का जुनून
शहर की शान हिमाद्री धीरज सेंट फिदेलिस में कक्षा छह में पढ़ रही हैं। हिमाद्री के सिर के ताज में कामयाबी के कई हीरे जड़ चुके हैं। हालांकि, अभिनय के क्षेत्र में उम्र के लिहाज से वह काफी नाम कमा चुकी हैं। लेकिन उनमें हवाओं से बात करने का जुनून है, इसलिए वह पायलट बनना चाहती हैं। हाल ही में उनकी फिल्म देसी रेसलर देशभर रिलीज हो चुकी है। कई अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी हैं। उनके अभिनय की प्रशंसा सनी देओल, गोविंदा, अजय देवगन तक कर चुके हैं। पत्रकार पंकज धीरज व काजल धीरज की छोटी बेटी हिमाद्री को क्लासिकल, सेमी क्लासिकल शैली में महारत हासिल है।
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कार्टून से लाएंगे होठों पर मुस्कान
विजडम पब्लिक स्कूल में कक्षा चार के छात्र जिशनू गुप्ता एक नई लकीर खींचना चाहते हैं। महज साढ़े तीन साल की आयु में कूची और ड्राइंग शीट से प्यार करने वाले जिशनू जब पेंटिंग दिखाते हैं, तो लोग यकीन नहीं कर पाते कि यह पेेंटिंग उन्होंने ही बनाई है। ज्ञान सरोवर सौ फुटा के निवासी हर्ष व रेनू गुप्ता के बेटे जिशनू का पेंटिंग में कोई गुरु नहीं है। वह खुद ही यूट्यूब से सीखकर अपने हुनर में और इजाफा कर रहा है। उसे कॉमिक्स स्टोरी बनाना अच्छा लगता है। वह अमेरिका में कार्टून बनाने वाली एक बड़ी कंपनी में काम करने का इच्छुक है। जिशनू पेंटिंग में कई इनाम भी जीत चुका है।
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उम्र से तीन गुनी जीती ट्रॉफी
एकता नगर के मोहसिन सैफी के बेटे फैज मोहसिन की जान गायकी में बसती है। एएमयू के मिंटो सर्किल के कक्षा छह के छात्र फैज का ख्वाब सिंगर अरिजित सिंह की तरह सफलता हासिल करना है। उनकी गायकी के संगीत प्रेमी भी कायल हैं। फैज को बचपन से ही गाना गाने का शौक है। फैज इसी क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाएंगे। 11 साल के फैज अब तक 32 ट्रॉफी जीत चुके हैं। अलीगढ़ ही नहीं, मेरठ और मोदीनगर में भी अपनी गायकी की खुशबू बिखेर चुके हैं। फैज मास्टर ऑफ अलीगढ़ में सिंगिंग का खिताब चुके हैं। फैज कलर्स के राइजिंग स्टार्स में भी अपनी आवाज का जादू दिखा चुके हैं। कला प्रेमी उनमें असीम संभावनाएं देख रहे हैं।
अभिनय के क्षेत्र में नाम कमाने की चाहत
यूं तो आदित्य माहेश्वरी के खानदान में अभिनय क्षेत्र से किसी का कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए उनका भी रुझान इस ओर नहीं रहा। चूंकि आदित्य के पिता संजय माहेश्वरी की दोस्ती ‘भाबी जी घर पर हैं’ के स्क्रिप्ट राइटर मनोज संतोषी से है। इसी नाते मनोज से संजय का मिलना जुलना लगा रहता है। एक दिन मनोज सराय मान सिंह स्थित संजय के घर आए हुए थे। उन्होंने आदित्य को देखा और उनके मन में उसे सीरियल में लेने का आइडिया आ गया। लड्डू के दोस्त के किरदार में आदित्य नजर आए। बाबूलाल जैन इंटर कॉलेज में कक्षा नौ में पढ़ रहे आदित्य का सपना अभिनय के क्षेत्र में नाम कमाना है और शहर का नाम रोशन करना है।
गुगली पर बल्लेबाज को देंगे गच्चा
महानगर के शताब्दी नगर निवासी चौधरी उदयवीर सिंह के बेटे विशाल चौधरी ने अंडर-16 क्रिकेट कैंप में तीन विकेट चटकाकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपने तरफ आकर्षित कराया। दाहिने हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज विशाल सात वर्ष की आयु से क्रिकेट खेल रहे हैं। उनकी गुगली पर बल्लेबाज गच्चा खा जाते हैं। इंजीनियर्स कॉलोनी हाईस्कूल में पढ़ने वाले विशाल का ख्वाब देश के लिए खेलना है। यूपी अंडर-14 कैंप में उनके चुने जाने की संभावना प्रबल हैं। कोच मसूदुज्ज्फर अमीनी भी विशाल की गेंदबाजी से संतुष्ट हैं। वह कहते हैं कि अगर इसी तरह वह अपने खेल पर फोकस करता रहा, तो काफी आगे तक जाएगा।