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बीएचयू के प्रोफेसर फिरोज खान का विरोध जायज नहीं : भराला
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सर्किट हाउस में अध्यक्ष श्रम कल्याण परिषद सुनील भराला प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी देते हुए ।
- फोटो : CITY OFFICE
उत्तर प्रदेश श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष पंडित सुनील भराला ने कहा कि बीएचयू के प्रोफेसर फिरोज खान को लेकर जो हंगामा मचा है, वह जायज नहीं है, क्योंकि उन्हें योग्यता के आधार पर नियुक्ति मिली है। फिर भी विरोध हो रहा है, तो वहां के छात्र ही जानें।
वह बृहस्पतिवार को अलीगढ़ के सर्किट हाउस में कासगंज, एटा, हाथरस और अलीगढ़ में श्रम विभाग की योजनाओं की समीक्षा करने आए थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि समीक्षा में जनकल्याणकारी योजनाओं में मंडल से पात्रता शून्य है, जो चिंताजनक है। अधिकारियों को इस पर जोर देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के लिए योगी सरकार ने दो योजनाएं और शुरू की हैं। एक मिल्खा सिंह खेल कल्याण योजना और दूसरा स्वामी विवेकानंद धार्मिक पर्यटन यात्रा योजना है। इससे श्रमिक के बच्चों को खेल में प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि श्रमिक धार्मिक यात्रा भी कर सकते हैं।
प्रदेश के खिलाड़ियों के बजाय पंजाब के मिल्खा सिंह के नाम पर योजना शुरू करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि काफी विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है। सुनील भराला ने कहा कि प्रदेश में करीब एक करोड़ झुग्गी झोंपड़ियां हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री ग्रामीण व शहरी विकास योजना के तहत पक्की छत मुहैया कराई जा रही है।
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उन्होंने कहा कि ठेकेदार के जरिये कारखाना में काम करने वाले श्रमिक भी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित होंगे। यह श्रम कल्याण परिषद की बोर्ड की बैठक में पास हो चुका है। अब एक्ट में संशोधन के लिए विधानसभा में विधेयक लाया जाएगा।
अध्यक्ष ने कहा कि अनुच्छेद 370 खत्म हो गया, जबकि राम जन्मभूमि मामले पर सुप्रीमकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया। मोदी सरकार ने जो भी वादा किया था, उसे पूरा कर दिया। राम मंदिर का निर्माण कब से शुरू हो रहा है, इस सवाल पर वह चुप्पी साध गए। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार राज्य परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष रघुराज सिंह, कोल विधायक अनिल पाराशर, भाजपा नेता पवन खंडेलवाल, विभागीय अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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वह बृहस्पतिवार को अलीगढ़ के सर्किट हाउस में कासगंज, एटा, हाथरस और अलीगढ़ में श्रम विभाग की योजनाओं की समीक्षा करने आए थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि समीक्षा में जनकल्याणकारी योजनाओं में मंडल से पात्रता शून्य है, जो चिंताजनक है। अधिकारियों को इस पर जोर देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के लिए योगी सरकार ने दो योजनाएं और शुरू की हैं। एक मिल्खा सिंह खेल कल्याण योजना और दूसरा स्वामी विवेकानंद धार्मिक पर्यटन यात्रा योजना है। इससे श्रमिक के बच्चों को खेल में प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि श्रमिक धार्मिक यात्रा भी कर सकते हैं।
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प्रदेश के खिलाड़ियों के बजाय पंजाब के मिल्खा सिंह के नाम पर योजना शुरू करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि काफी विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है। सुनील भराला ने कहा कि प्रदेश में करीब एक करोड़ झुग्गी झोंपड़ियां हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री ग्रामीण व शहरी विकास योजना के तहत पक्की छत मुहैया कराई जा रही है।
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उन्होंने कहा कि ठेकेदार के जरिये कारखाना में काम करने वाले श्रमिक भी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित होंगे। यह श्रम कल्याण परिषद की बोर्ड की बैठक में पास हो चुका है। अब एक्ट में संशोधन के लिए विधानसभा में विधेयक लाया जाएगा।
अध्यक्ष ने कहा कि अनुच्छेद 370 खत्म हो गया, जबकि राम जन्मभूमि मामले पर सुप्रीमकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया। मोदी सरकार ने जो भी वादा किया था, उसे पूरा कर दिया। राम मंदिर का निर्माण कब से शुरू हो रहा है, इस सवाल पर वह चुप्पी साध गए। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार राज्य परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष रघुराज सिंह, कोल विधायक अनिल पाराशर, भाजपा नेता पवन खंडेलवाल, विभागीय अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।