फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   before modi many leaders facecs opposed in amu

एएमयू में मोदी से पहले इन नेताओं का हो चुका है विरोध

Fri, 18 Dec 2020 12:26 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Dec 2020 12:26 AM IST
विज्ञापन
before modi many leaders facecs opposed in amu
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अतिथियों के स्वागत के साथ-साथ विरोध का भी सिलसिला बहुत पुराना रहा है। यहां पर सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और सरकार के प्रतिनिधियों का ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं का भी विरोध देखने को मिलता रहा है।
विज्ञापन

विश्वविद्यालय के मामलों की जानकारी रखने वाले डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि 1972 में जब आरिफ मोहम्मद खान एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने यूनियन से प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस के किसी भी नेता को विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं करने देने का एलान किया था। वजह यह थी कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक स्वरूप को समाप्त कर दिया था। यह स्थिति सन 1981 तक बनी रही। जब तक कि विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक स्वरूप फिर से बहाल नहीं हो गया।
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि आरिफ मोहम्मद खान के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रतिनिधि के रूप में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों का मन टटोलने आए बाबू जगजीवन राम को भी छात्रों का विरोध झेलना पड़ा था। उनके विरोध का छात्रों ने नया तरीका निकाला था। जगजीवन राम ऐतिहासिक कैनेडी हॉल में आ चुके थे। हॉल खचाखच भरा था। तभी वहां पर आरिफ मोहम्मद खान पहुंचे और कहा कि हम शांतिपूर्ण विरोध करेंगे और सभी लोग हॉल से बाहर आ जाएं। इसके बाद हॉल पूरी तरह खाली हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

अतिथियों के विरोध की कुछ प्रमुख घटनाएं
- सन 2000 में तत्कालीन कुलपति महमूद उर रहमान के समय केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी को विश्वविद्यालय में आना था। लेकिन छात्रों के जबरदस्त विरोध के चलते वह विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं कर सके।
- सन 2006 में तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय और कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी सहित बहुजन समाज पार्टी के 10 से अधिक नेताओं को यूनियन हॉल में संबोधन के लिए आमंत्रित किया था। छात्रों को एक गुट ने इस बात का जबरदस्त विरोध किया।
- सन 2011 में तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया गया था। लेकिन विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध के चलते वह आ नहीं सके, क्योंकि उस समय छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्र धरना दे रहे थे।
- सन 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय कोर्ट की बैठक में शामिल होने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सांसदों का छात्रों ने विरोध किया।
- इसके अलावा समय-समय पर विश्वविद्यालय में स्मृति ईरानी, संगीत सोम, योगी आदित्यनाथ, अमित शाह, शाहनवाज खान आदि के संबंध में विरोध के स्वर उठते रहे हैं
- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की तीन गवर्निंग बॉडी में से एक एएमयू कोर्ट में 10 सीटें सांसदों के लिए होती हैं। इसमें 6 सांसद लोकसभा के होते हैं और चार सांसद राज्यसभा के होते हैं। बरेली के सांसद संतोष कुमार गंगवार कोर्ट की बैठक में भाग लेने के लिए आते रहे। शीला गौतम, जो अलीगढ़ की सांसद रहीं, विश्वविद्यालय कोर्ट की बैठक में भाग लेने के लिए आती रहीं। यह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की पदेन सीटें हैं। - डॉ. राहत अबरार, निदेशक उर्दू एकेडमी, एएमयू

छात्रों के विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन सतर्क
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के सिलसिले में चल रहे कार्यक्रमों की शृंखला में 22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑनलाइन संबोधन के लिए छात्र नेताओं के विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन सतर्क हो गया है। दूसरी ओर, छात्र नेता भी इस बात पर विचार विमर्श करने में जुटे हैं कि ऑनलाइन होने वाले इस संबोधन के लिए सक्रिय विरोध किस प्रकार प्रदर्शित किया जाए। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की घोषणा होने के साथ ही पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष नदीम अंसारी ने काले झंडे दिखाने का एलान किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed