{"_id":"619554e9cbc751400272e1b1","slug":"be-careful-ayushman-cards-are-also-making-fake-city-office-news-ali2784030134","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलीगढ़ः रहें सावधान... नकली भी बन रहे आयुष्मान कार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलीगढ़ः रहें सावधान... नकली भी बन रहे आयुष्मान कार्ड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर में फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाला गिरोह सक्रिय है, जो खुद को आयुष्मान कार्ड बनाने वाला बताकर शिविर लगाता है। लोगों से कार्ड बनाने के नाम पर रुपये लेता है। बाद में पता चलता है कि यह कार्ड फर्जी है। ऐसा ही शिविर अक्तूबर में निरंजनपुरी इलाके में लगा था, वहां करीब 100 कार्ड बने थे। इन्हीं कार्डधारकों में शामिल जब एक व्यक्ति अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा तो डेटा मिलान न होने के कारण उस कार्ड को फर्जी करार दिया गया तो सारा मामला खुला। हालांकि, भेद खुलने के बाद कार्ड बनाने वाले युवक ने सभी के रुपये लौटा दिए हैं। मगर, सवाल यह है कि इस युवक और इसके सहयोगियों ने अब तक ऐसे कितने कैंप लगाकर, कितने लोगों को फर्जी कार्ड बनाकर दिए होंगे। खास बात है कि स्वास्थ्य महकमा इस सबसे अंजान है।
वाकये की शुरुआत ऐसे हुई कि बरौला आईटीआई इलाके का एक युवक अक्तूबर माह में निरंजनपुरी पहुंचा और बोला कि उसे आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए एक शिविर लगाना है। इस पर उसे इसी इलाके के एक संस्थान में बैठने के लिए जगह दे दी गई। यहां तीन चार दिन में उसने करीब सौ लोगों के कार्ड बनाए और सभी से नियम विरुद्ध 300 से 500 रुपये लेकर करीब 50 हजार रुपये वसूले। इलाके के लोगों ने बताया कि एक व्यक्ति का कार्ड जब फर्जी बता दिया गया तो इस युवक को बुलाया गया और जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने इन कार्डों के फर्जी होने की बात स्वीकार ली। साथ में स्वीकार किया कि वह पिछले करीब एक साल से इस काम को कर रहा है। उसने अपने दिल्ली से संपर्क भी बताए। बाद में लोगों की सख्ती पर इस युवक ने तीन बार में 50 हजार रुपये वापस किए हैं, जो अब लोगों को बांटे गए हैं। लोगों ने बाकायदा उसकी फर्जीवाड़ा स्वीकारते हुए यह बातचीत मोबाइल में वीडियो बनाकर कैद कर ली है। अब लोग इस युवक के खिलाफ शिकायत की तैयारी में हैं।
ये है आयुष्मान कार्ड बनने की प्रक्रिया
आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सरकार ने कुछ एजेंसियों को ठेका दे रखा है। उन एजेंसियों ने अपने सब वेंडर नियत कर रखे हैं। नियम के अनुसार ये वेंडर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में पूर्व में सूचना प्रसारित कर कैंप लगाते हैं। कार्ड के लिए वही व्यक्ति आवेदन कर सकता है, जिसका नाम आयुष्मान कार्ड बनने वाली सूची में पहले से शामिल है। किसी को अगर अपना नाम पता करना है तो उसे टोल फ्री नंबर पर फोन करके अपने आधार या राशन कार्ड नंबर से अपना नाम पूछना होगा या सीएचसी व आशा वर्कर के पास मौजूद सूची देखनी होगी या फिर सरकारी पोर्टल पर नाम सर्च करना होगा। तभी उसका आयुष्मान कार्ड आधार या राशन कार्ड नंबर देकर बन सकेगा।
विज्ञापन
इस तरह से बना रहे फर्जी आयुष्मान कार्ड
फर्जीवाड़ा करने वाले लोग जहां भी कहीं कैंप लगा रहे हैं तो वे पहले से इसके लिए प्रशिक्षित हैं। उन्होंने या तो किसी वेंडर के यहां काम किया है या उन पर पहले से वेंडर लाइसेंस रहा है। उन्हें ये जानकारी है कि किस इलाके की सूची में अभी कम कार्ड बने हैं। वे जहां भी कैंप लगा रहे हैं, वहां 10-15 सही लोगों के आवेदन ऑनलाइन करके सही कार्ड बना दे रहे हैं। बाकी वे लोग इस तरह से फर्जीवाड़ा करते हैं कि अगर किसी रामगोपाल नाम के 45 वर्षीय व्यक्ति ने उनके पास आवेदन किया तो वे सूची में रामगोपाल सर्च करेंगे। उसमें उस उम्र के कुछ नाम मिल जाएंगे। फिर उसे आधार या राशन कार्ड नंबर से केवाईसी अपडेट के नाम पर आवेदक के नाम से आयुष्मान कार्ड बनाकर दे देंगे।
फर्जीवाड़े में दोनों का नुकसान
जानकार बताते हैं कि इस फर्जीवाड़े में कार्ड बनने पर सिर्फ नाम व उम्र सही होगी। फोटो गलत होगा। आधार या राशन नंबर नए या फर्जी आवेदक का पड़ जाएगा। ऐसे में जब वह इलाज के लिए जाएगा तो उसका डेटा मिलान न होने पर उसका इलाज नहीं हो पाएगा। जिसका असली कार्ड है, उसका कार्ड भी डेटा बदल जाने के कारण खराब हो जाएगा।
ये है स्थिति
-12 लाख 20 हजार आयुष्मान कार्ड अपने जिले में बनने हैं
-2 लाख 80 हजार आयुष्मान कार्ड अब तक बन भी चुके हैं
- हाल ही में हमारे पास आयुष्मान कार्ड को लेकर किसी तरह के फर्जीवाड़े की सूचना नहीं आई है। हालांकि पिछले दिनों लखनऊ से इस तरह के फर्जीवाड़े की ओर इशारा करते हुए पत्र मिला था, जिसमें स्पष्ट निर्देश है कि अगर कहीं शिकायत मिलती है तो तत्काल जांच कर पुलिस मुकदमा दर्ज कराया जाए। इस मामले में भी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. दुर्गेश, नोडल अधिकारी आयुष्मान योजना
विज्ञापन
वाकये की शुरुआत ऐसे हुई कि बरौला आईटीआई इलाके का एक युवक अक्तूबर माह में निरंजनपुरी पहुंचा और बोला कि उसे आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए एक शिविर लगाना है। इस पर उसे इसी इलाके के एक संस्थान में बैठने के लिए जगह दे दी गई। यहां तीन चार दिन में उसने करीब सौ लोगों के कार्ड बनाए और सभी से नियम विरुद्ध 300 से 500 रुपये लेकर करीब 50 हजार रुपये वसूले। इलाके के लोगों ने बताया कि एक व्यक्ति का कार्ड जब फर्जी बता दिया गया तो इस युवक को बुलाया गया और जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने इन कार्डों के फर्जी होने की बात स्वीकार ली। साथ में स्वीकार किया कि वह पिछले करीब एक साल से इस काम को कर रहा है। उसने अपने दिल्ली से संपर्क भी बताए। बाद में लोगों की सख्ती पर इस युवक ने तीन बार में 50 हजार रुपये वापस किए हैं, जो अब लोगों को बांटे गए हैं। लोगों ने बाकायदा उसकी फर्जीवाड़ा स्वीकारते हुए यह बातचीत मोबाइल में वीडियो बनाकर कैद कर ली है। अब लोग इस युवक के खिलाफ शिकायत की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
ये है आयुष्मान कार्ड बनने की प्रक्रिया
आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सरकार ने कुछ एजेंसियों को ठेका दे रखा है। उन एजेंसियों ने अपने सब वेंडर नियत कर रखे हैं। नियम के अनुसार ये वेंडर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ग्रामीण या शहरी क्षेत्र में पूर्व में सूचना प्रसारित कर कैंप लगाते हैं। कार्ड के लिए वही व्यक्ति आवेदन कर सकता है, जिसका नाम आयुष्मान कार्ड बनने वाली सूची में पहले से शामिल है। किसी को अगर अपना नाम पता करना है तो उसे टोल फ्री नंबर पर फोन करके अपने आधार या राशन कार्ड नंबर से अपना नाम पूछना होगा या सीएचसी व आशा वर्कर के पास मौजूद सूची देखनी होगी या फिर सरकारी पोर्टल पर नाम सर्च करना होगा। तभी उसका आयुष्मान कार्ड आधार या राशन कार्ड नंबर देकर बन सकेगा।
विज्ञापन
इस तरह से बना रहे फर्जी आयुष्मान कार्ड
फर्जीवाड़ा करने वाले लोग जहां भी कहीं कैंप लगा रहे हैं तो वे पहले से इसके लिए प्रशिक्षित हैं। उन्होंने या तो किसी वेंडर के यहां काम किया है या उन पर पहले से वेंडर लाइसेंस रहा है। उन्हें ये जानकारी है कि किस इलाके की सूची में अभी कम कार्ड बने हैं। वे जहां भी कैंप लगा रहे हैं, वहां 10-15 सही लोगों के आवेदन ऑनलाइन करके सही कार्ड बना दे रहे हैं। बाकी वे लोग इस तरह से फर्जीवाड़ा करते हैं कि अगर किसी रामगोपाल नाम के 45 वर्षीय व्यक्ति ने उनके पास आवेदन किया तो वे सूची में रामगोपाल सर्च करेंगे। उसमें उस उम्र के कुछ नाम मिल जाएंगे। फिर उसे आधार या राशन कार्ड नंबर से केवाईसी अपडेट के नाम पर आवेदक के नाम से आयुष्मान कार्ड बनाकर दे देंगे।
फर्जीवाड़े में दोनों का नुकसान
जानकार बताते हैं कि इस फर्जीवाड़े में कार्ड बनने पर सिर्फ नाम व उम्र सही होगी। फोटो गलत होगा। आधार या राशन नंबर नए या फर्जी आवेदक का पड़ जाएगा। ऐसे में जब वह इलाज के लिए जाएगा तो उसका डेटा मिलान न होने पर उसका इलाज नहीं हो पाएगा। जिसका असली कार्ड है, उसका कार्ड भी डेटा बदल जाने के कारण खराब हो जाएगा।
ये है स्थिति
-12 लाख 20 हजार आयुष्मान कार्ड अपने जिले में बनने हैं
-2 लाख 80 हजार आयुष्मान कार्ड अब तक बन भी चुके हैं
- हाल ही में हमारे पास आयुष्मान कार्ड को लेकर किसी तरह के फर्जीवाड़े की सूचना नहीं आई है। हालांकि पिछले दिनों लखनऊ से इस तरह के फर्जीवाड़े की ओर इशारा करते हुए पत्र मिला था, जिसमें स्पष्ट निर्देश है कि अगर कहीं शिकायत मिलती है तो तत्काल जांच कर पुलिस मुकदमा दर्ज कराया जाए। इस मामले में भी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. दुर्गेश, नोडल अधिकारी आयुष्मान योजना