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Aligarh News: चाबी रखकर भूल रहे हैं तो हो जाएं सावधान
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चाबी कहां रखी, दवा ली या नहीं, किससे क्या बात हुई और कुछ देर पहले क्या तय किया था। यही नहीं, किस काम के लिए घर से बाहर निकले थे, यह तक याद रखने के लिए दिमाग पर जोर देना पड़ रहा है तो सावधान हो जाएं। ऐसी भूलों को महज उम्र का असर मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं, क्योंकि ये कमजोर होती याददाश्त के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
जेएन मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग में हर महीने 40 से 45 मरीज याददाश्त कमजोर होने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें 50 से 60 वर्ष की उम्र के मरीजों की संख्या अधिक है। कुछ मामलों में 40 वर्ष के आसपास की उम्र में भी ऐसी परेशानी सामने आ रही है।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद रियाजुद्दीन के अनुसार, याददाश्त कमजोर होने के पीछे उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलाव के अलावा स्ट्रोक (लकवा) समेत कई कारण हो सकते हैं। विभाग में आने वालों में 50 वर्ष की उम्र के करीब 25 और 60 वर्ष की उम्र के 20 मरीज होते हैं। हर महीने एक से दो मरीज करीब 40 वर्ष की उम्र के भी पहुंचते हैं।
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उन्होंने बताया कि अल्जाइमर की शुरुआत अक्सर सामान्य लगने वाली भूलों से होती है। हाल की बातचीत भूलना, एक ही सवाल बार-बार पूछना, सामान रखकर उसकी जगह भूल जाना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर परिचित रास्तों पर भ्रमित होना, बातचीत में सही शब्द न मिलना और सामान्य निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है।
भूलने को उम्र का असर मानकर न टालें :
एएमयू के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने बताया कि भूलने को उम्र का असर मानकर न टालें। मरीज की भूल पर उसे डांटने के बजाय परिजनों को धैर्य से पेश आना चाहिए। मरीज की दिनचर्या व्यवस्थित रखने और जरूरी कामों के लिए लिखित संकेत इस्तेमाल करने से मदद मिल सकती है। बाहर जाते समय पहचान और आपातकालीन संपर्क की जानकारी साथ रखना भी उपयोगी है। बीमारी बढ़ने पर मरीज को नहाने, कपड़े पहनने, खाना खाने, दवा लेने और बाहर आने-जाने जैसे सामान्य कामों में भी मदद की जरूरत पड़ सकती है।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज :
हाल में हुई बातें बार-बार भूलना
एक ही सवाल बार-बार पूछना
सामान रखकर उसकी जगह भूल जाना
परिचित रास्ते या स्थान पर भ्रमित होना
बातचीत में सही शब्द खोजने में लगातार परेशानी
रोजमर्रा के परिचित काम करने में कठिनाई
समय और तारीख को लेकर बार-बार भ्रमित होना
सामाजिक गतिविधियों और सामान्य कामों से दूरी बनाना
बचाव और रोकथाम के उपाय
नियमित व्यायाम : योग या हल्का व्यायाम करने से दिमाग तक खून का संचार बेहतर होता है।
मानसिक रूप से सक्रिय रहें : नई चीजें सीखें, किताबें पढ़ें, या पहेलियां सुलझाएं जिससे दिमाग की कसरत हो।
संतुलित आहार : खाने में हरी सब्जियां, फल और मेवा शामिल करें।
बीपी और शुगर का नियंत्रण : उच्च रक्तचाप और शुगर को नियंत्रण में रखें।
पर्याप्त नींद और सामाजिक जुड़ाव : रोज पूरी नींद लें और परिवार व दोस्तों के साथ मेल-जोल बनाए रखें।
केस-1 : एक ही बात कई बार पूछने लगे
सर सैयद नगर के 52 वर्षीय व्यक्ति के परिवार ने शुरुआत में उनकी भूलने की समस्या को उम्र का असर माना। वह कभी चाबी या मोबाइल रखने की जगह भूल जाते थे। बाद में बातचीत याद रखने में परेशानी होने लगी और वह एक ही बात कई बार पूछने लगे। इसके बाद डॉक्टर से सलाह ली गई और उनकी देखभाल व निगरानी शुरू की गई।
केस-2 : याद करने के लिए दिमाग पर लगाना पड़ता है जोर
जयगंज के 54 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि पहले दो-तीन महीने पुरानी बातें भी आसानी से याद रहती थीं। पिछले करीब एक साल से एक-दो महीने पहले हुई बातें याद नहीं रहतीं। किसी के याद दिलाने पर बात याद आती है, लेकिन इसके लिए दिमाग पर काफी जोर लगाना पड़ता है।
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जेएन मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग में हर महीने 40 से 45 मरीज याददाश्त कमजोर होने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें 50 से 60 वर्ष की उम्र के मरीजों की संख्या अधिक है। कुछ मामलों में 40 वर्ष के आसपास की उम्र में भी ऐसी परेशानी सामने आ रही है।
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एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद रियाजुद्दीन के अनुसार, याददाश्त कमजोर होने के पीछे उम्र बढ़ने के साथ होने वाले बदलाव के अलावा स्ट्रोक (लकवा) समेत कई कारण हो सकते हैं। विभाग में आने वालों में 50 वर्ष की उम्र के करीब 25 और 60 वर्ष की उम्र के 20 मरीज होते हैं। हर महीने एक से दो मरीज करीब 40 वर्ष की उम्र के भी पहुंचते हैं।
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उन्होंने बताया कि अल्जाइमर की शुरुआत अक्सर सामान्य लगने वाली भूलों से होती है। हाल की बातचीत भूलना, एक ही सवाल बार-बार पूछना, सामान रखकर उसकी जगह भूल जाना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर परिचित रास्तों पर भ्रमित होना, बातचीत में सही शब्द न मिलना और सामान्य निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है।
भूलने को उम्र का असर मानकर न टालें :
एएमयू के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम ने बताया कि भूलने को उम्र का असर मानकर न टालें। मरीज की भूल पर उसे डांटने के बजाय परिजनों को धैर्य से पेश आना चाहिए। मरीज की दिनचर्या व्यवस्थित रखने और जरूरी कामों के लिए लिखित संकेत इस्तेमाल करने से मदद मिल सकती है। बाहर जाते समय पहचान और आपातकालीन संपर्क की जानकारी साथ रखना भी उपयोगी है। बीमारी बढ़ने पर मरीज को नहाने, कपड़े पहनने, खाना खाने, दवा लेने और बाहर आने-जाने जैसे सामान्य कामों में भी मदद की जरूरत पड़ सकती है।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज :
हाल में हुई बातें बार-बार भूलना
एक ही सवाल बार-बार पूछना
सामान रखकर उसकी जगह भूल जाना
परिचित रास्ते या स्थान पर भ्रमित होना
बातचीत में सही शब्द खोजने में लगातार परेशानी
रोजमर्रा के परिचित काम करने में कठिनाई
समय और तारीख को लेकर बार-बार भ्रमित होना
सामाजिक गतिविधियों और सामान्य कामों से दूरी बनाना
बचाव और रोकथाम के उपाय
नियमित व्यायाम : योग या हल्का व्यायाम करने से दिमाग तक खून का संचार बेहतर होता है।
मानसिक रूप से सक्रिय रहें : नई चीजें सीखें, किताबें पढ़ें, या पहेलियां सुलझाएं जिससे दिमाग की कसरत हो।
संतुलित आहार : खाने में हरी सब्जियां, फल और मेवा शामिल करें।
बीपी और शुगर का नियंत्रण : उच्च रक्तचाप और शुगर को नियंत्रण में रखें।
पर्याप्त नींद और सामाजिक जुड़ाव : रोज पूरी नींद लें और परिवार व दोस्तों के साथ मेल-जोल बनाए रखें।
केस-1 : एक ही बात कई बार पूछने लगे
सर सैयद नगर के 52 वर्षीय व्यक्ति के परिवार ने शुरुआत में उनकी भूलने की समस्या को उम्र का असर माना। वह कभी चाबी या मोबाइल रखने की जगह भूल जाते थे। बाद में बातचीत याद रखने में परेशानी होने लगी और वह एक ही बात कई बार पूछने लगे। इसके बाद डॉक्टर से सलाह ली गई और उनकी देखभाल व निगरानी शुरू की गई।
केस-2 : याद करने के लिए दिमाग पर लगाना पड़ता है जोर
जयगंज के 54 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि पहले दो-तीन महीने पुरानी बातें भी आसानी से याद रहती थीं। पिछले करीब एक साल से एक-दो महीने पहले हुई बातें याद नहीं रहतीं। किसी के याद दिलाने पर बात याद आती है, लेकिन इसके लिए दिमाग पर काफी जोर लगाना पड़ता है।