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जिरौली डोर के बूथ संख्या तीन पर खत्म हो थे बीडीसी के मतपत्र
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लोधा ब्लॉक के जिरौली डोर गांव में बूथ संख्या तीन पर बीडीसी के मतपत्र साढ़े 11 बजे खत्म हो गए। ऐसे में कुछ देर यहां मतदान प्रभावित रहा, जबकि कुछ लोग जिला पंचायत सदस्य और प्रधान पद का वोट डालकर ही चले गए। ऐसे में मतदान अभिकर्ताओं ने जब पीठासीन अधिकारी के समक्ष निस्तारण के लिए कहा तो सुलह के आधार पर छह वोटरों को वोट डालने की अनुमति दी गई।
जिरौली डोर में बूथ संख्या तीन पर मूसेपुर बीडीसी के वार्ड नंबर 10, 11, 12 और 13 के वोट डाले जा रहे थे। साढ़े 11 बजे मतपत्र खत्म हो गए। इस पर आननफानन में मतपत्र मंगाए गए। साढ़े 12 बजे तक मतपत्र मिले, तब कहीं जाकर मतदान सुचारु हुआ। इस बीच कई ऐसे लोग थे, जो मतपत्र का इंतजार कर रहे थे।
जबकि कुछ मतदाताओं ने बीडीसी मतपत्र लिए बिना जिला पंचायत सदस्य और प्रधान पद के लिए मतदान किया। इसके बाद जब मतपत्र आए तो मतदान अभिकर्ताओं ने कहा कि मूसेपुर बीडीसी वार्ड 12-13 में जिरौली डोर का क्षेत्र भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस गांव के प्रत्याशी के वोट रह गए हैं।
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इसका निस्तारण कैसे होगा अथवा क्या नियम है। सुलह के आधार पर तय हुआ कि तकरीबन 24 लोगों ने बीडीसी के वोट नहीं डाले हैं। बीडीसी चुनाव में चार प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में यदि कुल 24 वोटों को चार प्रत्याशियों में बांटे तो एक प्रत्याशी के पक्ष में छह वोट आ रहे हैं।
ऐसे में कम से कम छह वोट डालने दिए जाएं। पीठासीन अधिकारी ने रजामंदी जाहिर करते हुए इन छह वोट डालने की अनुमति दे दी। पीठासीन अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि 722 में से बीडीसी के 372 मतपत्र आए थे। बाद में 350 मतपत्र मंगा लिए हैं। समस्या का समाधान हो गया है।
- साढ़े 11 बजे मतपत्र समाप्त हो गए। जिरौली गांव से बीडीसी का इकलौता प्रत्याशी हूं। ऐसे में लगभग 25 मतदाताओं ने बीडीसी का वोट ही नहीं दिया। पीठासीन अधिकारी ने छह वोटरों को बुलाकर वोट डलवाने के लिए कहा है। लेकिन हकीकत तो यह है कि हर वोट जरूरी होता है। भले ही वह मेरे पक्ष में होता अथवा विपक्ष में। -राजेश कुमार, बीडीसी प्रत्याशी मूसेपुर, लोधा।
- बीडीसी के मतपत्र खत्म हो गए हैं। एक घंटे से लाइन में खड़ी हूं। गर्मी से परेशानी हो रही है। जब पता था कि चुनाव है तो आखिरकार कम मतपत्र क्यों भेजे गए। गर्मी में तो जनता परेशान हो रही है। -गीता सिंह, जिरोली डोर, लोधा।
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जिरौली डोर में बूथ संख्या तीन पर मूसेपुर बीडीसी के वार्ड नंबर 10, 11, 12 और 13 के वोट डाले जा रहे थे। साढ़े 11 बजे मतपत्र खत्म हो गए। इस पर आननफानन में मतपत्र मंगाए गए। साढ़े 12 बजे तक मतपत्र मिले, तब कहीं जाकर मतदान सुचारु हुआ। इस बीच कई ऐसे लोग थे, जो मतपत्र का इंतजार कर रहे थे।
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जबकि कुछ मतदाताओं ने बीडीसी मतपत्र लिए बिना जिला पंचायत सदस्य और प्रधान पद के लिए मतदान किया। इसके बाद जब मतपत्र आए तो मतदान अभिकर्ताओं ने कहा कि मूसेपुर बीडीसी वार्ड 12-13 में जिरौली डोर का क्षेत्र भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस गांव के प्रत्याशी के वोट रह गए हैं।
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इसका निस्तारण कैसे होगा अथवा क्या नियम है। सुलह के आधार पर तय हुआ कि तकरीबन 24 लोगों ने बीडीसी के वोट नहीं डाले हैं। बीडीसी चुनाव में चार प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में यदि कुल 24 वोटों को चार प्रत्याशियों में बांटे तो एक प्रत्याशी के पक्ष में छह वोट आ रहे हैं।
ऐसे में कम से कम छह वोट डालने दिए जाएं। पीठासीन अधिकारी ने रजामंदी जाहिर करते हुए इन छह वोट डालने की अनुमति दे दी। पीठासीन अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि 722 में से बीडीसी के 372 मतपत्र आए थे। बाद में 350 मतपत्र मंगा लिए हैं। समस्या का समाधान हो गया है।
- साढ़े 11 बजे मतपत्र समाप्त हो गए। जिरौली गांव से बीडीसी का इकलौता प्रत्याशी हूं। ऐसे में लगभग 25 मतदाताओं ने बीडीसी का वोट ही नहीं दिया। पीठासीन अधिकारी ने छह वोटरों को बुलाकर वोट डलवाने के लिए कहा है। लेकिन हकीकत तो यह है कि हर वोट जरूरी होता है। भले ही वह मेरे पक्ष में होता अथवा विपक्ष में। -राजेश कुमार, बीडीसी प्रत्याशी मूसेपुर, लोधा।
- बीडीसी के मतपत्र खत्म हो गए हैं। एक घंटे से लाइन में खड़ी हूं। गर्मी से परेशानी हो रही है। जब पता था कि चुनाव है तो आखिरकार कम मतपत्र क्यों भेजे गए। गर्मी में तो जनता परेशान हो रही है। -गीता सिंह, जिरोली डोर, लोधा।