{"_id":"5b4e45694f1c1b572f8b50f8","slug":"bans-on-polythene-boom-in-demand-for-eco-friendly-envelope","type":"story","status":"publish","title_hn":"पॉलिथीन पर प्रतिबंध: ‘इको फ्रेंडली’ लिफाफे की मांग में उछाल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पॉलिथीन पर प्रतिबंध: ‘इको फ्रेंडली’ लिफाफे की मांग में उछाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Updated Wed, 18 Jul 2018 01:18 AM IST
विज्ञापन
पॉलिथीन पर प्रतिबंध: ‘इको फ्रेंडली’ लिफाफे की मांग में उछाल
- फोटो : Rupesh
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश में पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद कागज एवं कपड़ों के थैले की मांग में जबर्दस्त उछाल है। आलम यह है कि वर्तमान समय में मांग के अनुसार लिफाफा (कागज के थैले) नहीं मिल रही है। थोक कारोबारी छोटे दुकानदारों को इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं।
15 जुलाई से प्रदेश में पॉलिथीन प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसकी वजह से पिछले तीन दिन से महानगर के अधिकतर प्लास्टिक एवं पॉलिथीन की दुकानें बंद हैं। जुर्माना एवं अन्य प्रशासनिक कार्यवाही के भय से ठेले एवं ढकेल वालों से लेकर दुकानदार तक पॉलिथीन में सामान देने से बच रहे हैं।
पॉलिथीन के दुष्परिणामों को देखते हुए दुकानदारों पर एक जन दबाव भी है। आम लोग सरकार के फैसले का स्वागत कर रहे हैं। यहीं कारण है कि कागज के लिफाफे (कागज के छोटे-बड़े थैले) की मांग में जबर्दस्त उछाल है। यहीं नहीं कागज के प्लेट, कप, दोने और ग्लास आदि भी खूब बिकने लगे हैं। महानगर में ढाक के पत्ता के दोने व थाली भी दुकानों पर सजा दिये गये हैं। कपड़ा के छोटे-बड़े थैले भी खूब बिक रहे हैं।
विज्ञापन
कागज के थैले की जबर्दस्त डिमांड है। व्यवसायी थोड़ा-बहुत माल देकर इंतजार करने को कह रहे हैं। पॉलिथीन पर रोक के बाद दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
- राज कुमार वार्ष्णेय, व्यवसायी हाथरस अड्डा
पॉलिथीन पर रोक लगने के बाद कागज एवं कपड़े के थैले ही विकल्प बचे हैं। पहले सामान पैक कर पॉलिथीन में देते थे। अब थैले में ग्राहकों को सामान दे रहे हैं।
- परमजीत सिंह, मिठाई व्यवसायी, आगरा रोड
पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद कागज के थैले के कारोबार में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक का उछाल है। अभी व्यवसायियों के पास माल ही नहीं है।
- राज कुमार अग्रवाल, कनवरीगंज
विज्ञापन
15 जुलाई से प्रदेश में पॉलिथीन प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसकी वजह से पिछले तीन दिन से महानगर के अधिकतर प्लास्टिक एवं पॉलिथीन की दुकानें बंद हैं। जुर्माना एवं अन्य प्रशासनिक कार्यवाही के भय से ठेले एवं ढकेल वालों से लेकर दुकानदार तक पॉलिथीन में सामान देने से बच रहे हैं।
विज्ञापन
पॉलिथीन के दुष्परिणामों को देखते हुए दुकानदारों पर एक जन दबाव भी है। आम लोग सरकार के फैसले का स्वागत कर रहे हैं। यहीं कारण है कि कागज के लिफाफे (कागज के छोटे-बड़े थैले) की मांग में जबर्दस्त उछाल है। यहीं नहीं कागज के प्लेट, कप, दोने और ग्लास आदि भी खूब बिकने लगे हैं। महानगर में ढाक के पत्ता के दोने व थाली भी दुकानों पर सजा दिये गये हैं। कपड़ा के छोटे-बड़े थैले भी खूब बिक रहे हैं।
विज्ञापन
कागज के थैले की जबर्दस्त डिमांड है। व्यवसायी थोड़ा-बहुत माल देकर इंतजार करने को कह रहे हैं। पॉलिथीन पर रोक के बाद दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
- राज कुमार वार्ष्णेय, व्यवसायी हाथरस अड्डा
पॉलिथीन पर रोक लगने के बाद कागज एवं कपड़े के थैले ही विकल्प बचे हैं। पहले सामान पैक कर पॉलिथीन में देते थे। अब थैले में ग्राहकों को सामान दे रहे हैं।
- परमजीत सिंह, मिठाई व्यवसायी, आगरा रोड
पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद कागज के थैले के कारोबार में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक का उछाल है। अभी व्यवसायियों के पास माल ही नहीं है।
- राज कुमार अग्रवाल, कनवरीगंज