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छत्तीसगढ़ की महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराने में जमानत खारिज
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लोधा थाने में दर्ज हुए जिले के पहले जबरन धर्म परिवर्तन के मुकदमे में अपर सत्र न्यायालय से आरोपी युवक की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। इसे गंभीर और समाज में व्यापक असर डालने वाला अपराध मानते हुए एडीजे विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट अशोक कुमार के न्यायालय से यह जमानत अर्जी खारिज की गई है। न्यायालय ने अपने जमानत आदेश में इस मामले में गंभीर टिप्पणी भी की है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ के गांव रनवा हैड गम्हरिया थाना बगीचा की युवती ने 9 अप्रैल 2021 को लोधा थाने में मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें आरोप था कि वह कई वर्ष से अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहकर निजी अस्पताल में आया का काम करती है। इसी बीच उसकी मुलाकात मोबाइल के जरिये खुद को अशोक राजपूत बताने वाले युवक से हुई। दोनों में नजदीकियों पर 25 मार्च 2019 को दिल्ली के ही मंदिर में शादी कर ली। दोनों साथ रहने लगे और 7 फरवरी 2021 को महिला ने एक बेटी को जन्म दिया।
इसके कुछ दिन बाद 22 मार्च 2021 को कथित अशोक अपनी पत्नी यानी पीड़ित महिला को अपनी बहन नजमा व लालो के घर लोधा के गांव राइट लाया। यहां आते ही महिला का माथा ठनक गया। घर में सब कुछ गैर समुदाय के परिवारों जैसा था। जब उसने इस पर सवाल किया तो बहनों ने बताया कि उनके भाई का नाम अशोक नहीं, बल्कि अफजल पुत्र अली हसन निवासी कुमरई परसारा चंदपा, जिला हाथरस है। इस पर महिला ने विरोध करने का प्रयास किया तो उसे पीटा गया और उसको पूजा पाठ नहीं करने दिया। इतना ही नहीं, उसका जबरन धर्म परिवर्तित करते हुए उसका नाम अलना रख दिया और उसे इबादत के लिए बाध्य किया गया। महिला यह सब सहन नहीं कर सकी तो 8 अप्रैल को उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया और उसकी बेटी को छीन लिया। किसी तरह वह लोधा थाने पहुंची और मामले में पुलिस ने जांच के आधार पर धारा 3/5 उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2020 के तहत मुकदमा दर्ज किया। साथ ही 13 अप्रैल को आरोपी कथित अशोक उर्फ अफजल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में न्यायालय में दायर जमानत अर्जी को खारिज कर दिया गया है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ के गांव रनवा हैड गम्हरिया थाना बगीचा की युवती ने 9 अप्रैल 2021 को लोधा थाने में मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें आरोप था कि वह कई वर्ष से अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहकर निजी अस्पताल में आया का काम करती है। इसी बीच उसकी मुलाकात मोबाइल के जरिये खुद को अशोक राजपूत बताने वाले युवक से हुई। दोनों में नजदीकियों पर 25 मार्च 2019 को दिल्ली के ही मंदिर में शादी कर ली। दोनों साथ रहने लगे और 7 फरवरी 2021 को महिला ने एक बेटी को जन्म दिया।
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इसके कुछ दिन बाद 22 मार्च 2021 को कथित अशोक अपनी पत्नी यानी पीड़ित महिला को अपनी बहन नजमा व लालो के घर लोधा के गांव राइट लाया। यहां आते ही महिला का माथा ठनक गया। घर में सब कुछ गैर समुदाय के परिवारों जैसा था। जब उसने इस पर सवाल किया तो बहनों ने बताया कि उनके भाई का नाम अशोक नहीं, बल्कि अफजल पुत्र अली हसन निवासी कुमरई परसारा चंदपा, जिला हाथरस है। इस पर महिला ने विरोध करने का प्रयास किया तो उसे पीटा गया और उसको पूजा पाठ नहीं करने दिया। इतना ही नहीं, उसका जबरन धर्म परिवर्तित करते हुए उसका नाम अलना रख दिया और उसे इबादत के लिए बाध्य किया गया। महिला यह सब सहन नहीं कर सकी तो 8 अप्रैल को उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया और उसकी बेटी को छीन लिया। किसी तरह वह लोधा थाने पहुंची और मामले में पुलिस ने जांच के आधार पर धारा 3/5 उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2020 के तहत मुकदमा दर्ज किया। साथ ही 13 अप्रैल को आरोपी कथित अशोक उर्फ अफजल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में न्यायालय में दायर जमानत अर्जी को खारिज कर दिया गया है।
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