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बादल बाबू बना आदल: पाकिस्तानी पुलिस ने नहीं माना खुफिया एजेंट, सना को जेल से लिखा यह प्रेम पत्र
Mon, 03 Mar 2025 04:14 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Mon, 03 Mar 2025 04:14 AM IST
सार
पत्र में सना रानी के लिए लिखा था कि वह उससे बहुत प्यार करता है। शादी करना चाहता है। इस्लाम धर्म कबूल कर उसने अपना नाम बादल से आदल कर लिया है। जेल में रोजा रख रहा है और नमाज पढ़ता है। वह उसके जज्बात को समझे। निकाह के बाद वह हमेशा उसके पास पाकिस्तान में ही रहेगा और कभी भारत नहीं जाएगा।
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बरला के नगला खिटकारी का युवक बादल बाबू
- फोटो : परिजन
विस्तार
पाकिस्तान की जेल में बंद बरला के गांव नगला खिटकारी निवासी बादल बाबू ने अपना नाम बदलकर आदल कर लिया है। पाकिस्तान में उसके अधिवक्ता फियाज रामे ने 28 फरवरी को बादल के पिता कृपाल सिंह को फोन पर बताया कि पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर विस्तृत चार्ज शीट न्यायालय में दायर कर दी है। इसमें बादल बाबू को खुफिया एजेंट नहीं माना है।
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पुलिस ने चार्ज शीट में कहा है कि उसने युवती से मिलने की खातिर गैर कानूनी तरीके से बॉर्डर पार किया है। इसी आधार पर उस पर मुकदमा चलाया जाए। उधर, शुक्रवार को बादल बाबू को न्यायालय में तारीख पर पेश किया गया। तभी उसने अपने कुर्ता की जेब में हाथ डालकर एक कागज निकाला और अपने अधिवक्ता फियाज रामे से उस पत्र को सना रानी तक पहुंचाने की गुजारिश की।
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फियाज रामे ने कृपाल सिंह को बताया कि पत्र हिंदी में लिखा हुआ था, जिसको उन्होंने उर्दू में ट्रांसलेट कराकर पढ़ा। पत्र में सना रानी के लिए लिखा था कि वह उससे बहुत प्यार करता है। शादी करना चाहता है। इस्लाम धर्म कबूल कर उसने अपना नाम बादल से आदल कर लिया है। जेल में रोजा रख रहा है और नमाज पढ़ता है। वह उसके जज्बात को समझे। निकाह के बाद वह हमेशा उसके पास पाकिस्तान में ही रहेगा और कभी भारत नहीं जाएगा।
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पत्र में उसने यह भी लिखा है कि उर्दू उसे नहीं आती, इसीलिए हिंदी में पत्र लिखा है। वह मोाबाइल के द्वारा उर्दू में ट्रांसलेट करके पढ़े और उसके प्यार को समझे। पत्र में उसने अपने व सना रानी के कुछ चित्र भी बनाकर खुद को रोते हुए बेहद दुखी होना दर्शाया है। सना रानी के परिजनों से भी निकाह कराने की गुजारिश की है। अंत में सना को आई लव यू लिखा है। अधिवक्ता फियाज रामे ने मंडी बाहुउद्दीन स्थित सना रानी के घर जाकर पत्र देने की कोशिश भी की, लेकिन घर पर कोई नहीं मिला।